Archive for कथा कहानी

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अपराध बोध

अध्याय १: भयानक रातें  
रात का अंधेरा चारों ओर फैला हुआ था, रात के सन्नाटे को चीरती किसी उल्लू की आवाज कभी-कभी सुनायी पड़ रही थी। दूर दूर तक कुछ नजर नही आ रहा था, अशोक के कदम बड़ी तेजी से घर की तरफ बढ़ रहे थे। अचानक आसमान में बड़ी तेजी से बिजली कड़की थी, [...]

बिखरती दुनिया

अरे नहीं जनाब, मुझमे वो कुव्‍वत कहाँ। मैं तो खुद अपनी ही किसी जद्दोजहद में उलझा हुआ था। टैम्‍पो रूका हुआ था, इशरत अली सोच रहा था ना जाने कहाँ से ये नामाकूल थानेदार आ टपका, उसने बाहर झांक के देखा दुकान पास पर ही थी, अली ने टैम्‍पो से उतरने में ही भलाई समझी।
टैम्‍पो [...]