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महिला दिवस पर विशेष: तस्वीर के दो पहलू

8 मार्च यानि एक बार फिर महिला दिवस, ऐसे समय में दो चौंकाने वाली खबरें जो बताती हैं कि अभी भी बेटियाँ कोई नही चाहता। ताज्जुब की बात ये है कि पढ़े लिखे लोग भी ऐसी संकुचित सोच रखते हैं। अब पहले ही बच्चे के लिंग का पता चल जाने की वजह से कई लोग [...]

पानी कहाँ से लाओगे

मनीषा के नये साल के पहले लेख में पहले पढ़ा फिर अभय ने भी कहा पानी नही मिलेगा, अब जब सब जगह नीर के लिये नीर बहाया जा रहा था तो हमें लगा कि क्यों ना हम भी लगे हाथ पूछ लें, बोलो पानी कहाँ से लाओगे। अब शब्दों के मामले में हम इन दोनों [...]

स्वीमिंग पूल में टॉपलैसः आप का क्या कहना है?

इस बहस में महिला चिट्ठेकारों या रीडरस के क्या विचार हैं ये मैं जरूर जानना चाहूँगा क्योंकि ये कुछ लड़कियों या महिलाओं ने शुरू ही महिला और पुरूषों में समान अधिकार की बात पर किया है। ये खबर है स्टॉकहोम (स्वीडन) की, जहाँ २ लड़कियाँ टॉपलैसे हो कर पब्लिक स्वीमिंग पूल में तैरने पहुँच गयी। [...]

भारतीय देवता पार्टी

हिन्दू देवताओं के बारे में जरा सा भी इधर का उधर कहे जाने पर, या किसी फोटो का वैसा कर दिये जाने पर हत्थे से उखड़ जानी वाली पार्टी और बौखला जाने वाले कार्यकर्त्ता खुद कितने पानी में हैं उसकी ताजा मिसाल राजस्थान में देखने में आयी। कल न्यूज देखने में पता चला कि भारतीय [...]

निशब्दः बच्चे कितने मन के सच्चे?

मैं निशब्द मूवी की बात नही कर रहा, आज ये खबर पढी (देखी) और पढ कर कुछ कहते जैसा नही बना। क्या दोष बच्चों का है (क्या मुझे बच्चे कहना चाहिये?) या अभिवावकों का और या अध्यापकों का और या स्कूल के वातावरण या सिस्टम का? जिस तरह से इस तरह की घटनायें अमेरिकी स्कूलों [...]

[ More ] April 6th, 2007 | 6 Comments | Posted in समाज और समस्‍या |

महिला दिवस का झुनझुना

महिला दिवस पर कुछ कहने से पहले एक सवाल क्योंकि मुझे ये नही पता इसलिये पूछ रहा हूँ, क्या कोई पुरूष दिवस भी मनाया जाता है। शायद नही क्योंकि महिला दिवस मुझे महिलाओं को दिया एक झुनझुना प्रतित होता है। मैने ज्यादा कुछ नही टटोला लेकिन ये महिला दिवस का हल्ला भारत में ज्यादा दिखायी [...]

दिल की भडास निकालो आओ हिन्दू मुस्लिम खेलो

आज दिन में नारद चैक किया तो देखा कि “आईना मोहल्ले के साथ बंद होने की इजाजत मांगे” गोया कह रहा हो कि “हम तुम एक कमरे में बंद हों और चाभी खो जाय”। हमें जगदीश भाई कम से कम अपने से तो ज्यादा समझदार लगते थे इसलिये सोचा हो सकता है कि होली की [...]

तेरा पानी अमृत, मेरा पानी पानी

ये सारांश कह रहा हूँ उस बात की चर्चा का जो अफगानिस्‍तान की गलियों और पश्‍चिमी देशों के गलियारों के बीच चल रहा है। (आप चाहें तो तेरा को मेरा कर दें और मेरा को तेरा अर्थ नही बदलने वाला) अभी तक अगर नही समझे तो कुछ यहाँ पढ़ोकुछ यहाँ पढ़ो और कुछ यहाँकुछ यहाँ। [...]