Archive for धर्म
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इस बार काफी दिनों बाद अनुगूँज का आयोजन किया गया और इसकी गूँज इधर उधर सुनायी भी गई। इस बार का विषय है - मेरे जीवन में धर्म का महत्व। वैसे अगर देखा जाय तो हेमामालिनी जी भी काफी कुछ इसमें लिख सकती हैं लेकिन उनको कहे कौन। उनके धर्म पे ज्यादा जोर ना दे [...]
ये सारांश कह रहा हूँ उस बात की चर्चा का जो अफगानिस्तान की गलियों और पश्चिमी देशों के गलियारों के बीच चल रहा है। (आप चाहें तो तेरा को मेरा कर दें और मेरा को तेरा अर्थ नही बदलने वाला) अभी तक अगर नही समझे तो कुछ यहाँ पढ़ोकुछ यहाँ पढ़ो और कुछ यहाँकुछ यहाँ। [...]