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ट्रेडिंगः हम करेंगे सालसा और वो करेंगे बल्ले बल्ले

आजकल देश में डांसरों में सालसा का बड़ा क्रेज है लेकिन वो लेतिनोज लोग शायद उन स्टेपस से उकता गये हैं इसलिये उन्होंने बल्ले बल्ले पर थिरकने की सोची और सोल्जर फिल्म की ‘तेरा रूप बल्ले बल्ले‘ पर थिरकने लगे। यानि कि जल्दी ही हम तो नाचेंगे ही दुनिया को भी उसी धुन पर नचायेंगे, [...]

[ More ] January 11th, 2009 | 3 Comments | Posted in देश दुनिया |

वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी

जगजीत सिंह की गायी मशहूर गजल से २-३ लाईनें उधार लेकर अपने बचपन की यादों को इस गीत गजल में समेटने की कोशिश की है। आज ऐसे ही कुछ सफाई कर रहा था तो २-३ साल पहले लिखी ये गजल मुझे मिल गयी। पहाड़ों में बिताये उन अनमोल पलों को समेटने की कोशिश जो अब [...]

[ More ] January 8th, 2009 | 17 Comments | Posted in शायरी और गजल |

Incredible India: स्टोरी आफ इंडिया

प्रसिद्ध इतिहासकार, लेखक, प्रसारक और प्रस्तुतकर्ता माइकल वुडस की लिखी किताब In Search of Myths and Heroes अभी खत्म ही की थी कि इन्हीं की इंडिया पर बनायी 6 एपिसोड की डॉक्यूमेंट्री देखने का अवसर मिल गया। ये इन्होंने बीबीसी के लिये बनायी थी और आजकल इसका यहाँ अमेरिका के चैनल पर प्रसारण चल रहा [...]

[ More ] January 7th, 2009 | 15 Comments | Posted in देश दुनिया, भारत |

हिंदी ब्लोगिंग का समाचार पत्रों में उल्लेख रामखिलावन की भैंस की खबर जैसा है

पिछले एक साल में हिंदी ब्लोगरस या ब्लोगिंग का हिंदी समाचार पत्रों में कई बार उल्लेख हुआ है अगर एक या दो लेखों को छोड़ दें तो ज्यादातर आलेख पढ़कर लगा कि ये उसी तरह से छपे हैं जैसे रामखिलावन की भैंस की खबर। ज्यादातर सभी आलेखों में अगर मगर करके गिने-चुने १०-१२ ब्लोगस (या [...]

[ More ] January 6th, 2009 | 17 Comments | Posted in बस यूँ ही |

एहसानफरामोश और अपराधलिप्त नेताओं के देश से वापसी

सठिया चुके दिमाग से उलूल-जुलूल संभावनायें तलाशते अंतुले और मौकापरस्त दलबदलू नेता दिग्विजय सिंह सरीखे नेताओं की जमात वाले देश से बुश को पुश करते ओबामा की रट लगाने वाले देश में हमारी सकुशल वापसी हो गयी है। ये भारत अब वो भारत ना रहा, यहाँ “सच्चाई का बोलबाला, झूठे का मुँह काला” वाली कहावत [...]

[ More ] January 1st, 2009 | 12 Comments | Posted in राजनीति |

एक और दिन एक और विस्फोट

इस पोस्ट से किसी भी तरह की शालीनता और सयंम की उम्मीद ना करें। सपने में भी गैर हिन्दुओं के धार्मिक आकाओं को छुने की हिम्मत ना कर सकने वाली सरकार, उसकी पुलिस और रिपोर्टर जब एक साध्वी को मारमार कर ये कबुलवाने में तुली थी कि वो आतंकवादी है। ठीक उसी समय ही शायद [...]

[ More ] November 27th, 2008 | 24 Comments | Posted in भारत |

माइनस डिग्री तापमान, फुटबाल मैच और कुछ अधनंगे लड़के लड़कियाँ

आज सुबह यहाँ का तापमान था जीरो डिग्री, जिसे ठंडी हवाओं ने माइनस सात डिग्री (-7 सेंटिग्रेट) पहुँचा दिया था और ऐसे में हमें जाना था अपने बेटे के आखिरी फुटबॉल मैच के लिये। ठंड का अनुमान तो फील्ड में पहुँचने पर ही लगा, लेकिन ये कमाल के बच्चे थे ऐसी ठंड में भी रोते [...]

[ More ] November 23rd, 2008 | 11 Comments | Posted in बस यूँ ही |

अगर तुम ना होते

मैं इस नाम की फिल्‍म की बात नहीं करने जा रहा बल्‍िक एक काल्‍पनिक लेख की बात कर रहा हूँ। धार्मिक भावना वाले व्‍यक्‍ति को हो सकता है इसे पढ़ के ठेस पँहुचे (जिसका मेरा कतई इरादा नही है), इसलिये गुजारिश है कि वो इसे या तो ना पढें और या फिर निठल्‍ला चिंतन समझ [...]

कुछ बिखरे बिखरे शब्द

आजकल व्यस्तता कुछ ज्यादा ही है वक्त कब मुट्ठी में से रेत की तरह फिसल जाता है पता ही नही चलता। कुछ वैसे ही जैसे कभी-कभी पर्सनल पत्र चर्चा में आ जाते हैं या कब कैसे थूक मुँह से निकल किसी के चेहरे पर आ लगता है या २ साल का कोई बच्चा घर को [...]

[ More ] November 12th, 2008 | 13 Comments | Posted in बस यूँ ही |