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मेरा वाला जेनेरिक: सूर्य अस्त शराबी मस्त

आप सोच में तो नही पड़ गये कि ये क्या बला हुई, ज्यादा मत सोचिये पहले मैं आपको ये बताऊँगा ये क्या है और उसके बाद जेनेरिक शेर भी सुनाऊँगा। आपने ये शायद ही कभी पहले सुना हो क्योंकि अभी अभी हमने ये बिल्कुल ताजा अपने दिमाग की भट्टी से निकाला है, शब्द तो पुराना [...]

“सुर्पनखा बन नाक कटाये”,, क्या इसे कहावत बना सकते हैं?

ये तो सभी जानते हैं कि त्रेता युग में विभिषण ने रावण को हरवाने में भगवान राम की मदद की थी जिसके फलस्वरूप इस तरह के केस के लिये ही ये कहावत बनी है – घर का भेदी लंका ढाये। उसी त्रेता युग में सुर्पनखा भी हुई थी, जो पहले राम पर लट्टू हुई लेकिन [...]

एक मीडिया, एक गाली, एक ब्लोगर और बचेखुचे भारतीय

कुछ लिखने से पहले ही बता दूँ मेरी समझ से ‘बचेखुचे’ कहना गाली में नही आता, अगर आता है तो बता दें मेरा भी थोड़ा ज्ञान बढ़ जायेगा। अभी पिछले कुछ दिनों में ही पत्रकार बनाम ब्लोगर प्रकरण पढ़ने में आया। कुछ लोग खासकर मीडिया वाले पत्रकार (बरखा दत्त) का पक्ष ले रहे हैं, वहीं [...]

क्या ये नैतिक है? – सात बच्चे सोचे थे लेकिन वो आठ थे

यहाँ अमेरिका में एक ३३ साल की औरत ने आठ बच्चों को एक साथ जन्म दिया, उसके पहले से ही ६ बच्चे थे। एक ही उम्मीद में ये सब किया गया लेकिन हो गये आठ, यहाँ तक की डाक्टर भी ७ बच्चे समझ के डीलिवरी करवा रहे थे। ऐसा पढ़ने में आया कि वह औरत [...]

[ More ] February 2nd, 2009 | 5 Comments | Posted in देश दुनिया |

आते जाते खुबसूरत आवारा सड़कों पे – ब्लागर चर्चा 1

[इस सीरिज में हिंदी के कुछ ऐसे ब्लोगरस (या ब्लोग) की बात करेंगे जो मुझे पसंद हैं, इनमें से कुछ साथ चलते चलते कब दोस्त बन गये पता ही नही चला। इस सफर के लिये इस गीत की चंद लाईने बहुत उपयुक्त हैं - "आते जाते खुबसूरत आवारा सड़कों पे, कभी कभी इत्तेफाक से, कितने [...]

[ More ] January 27th, 2009 | 22 Comments | Posted in जरा हट के |

समस्या स्लम से है या डॉग से या उसे मिलेनियर बनाने वाले से

स्लमडॉग ऐसी फिल्म नही जिस पर इतनी ज्यादा क्रिया प्रतिक्रिया की जाये, कुछ इसे फिल्म से हटकर सोचते हैं और वहाँ पर सवाल या समस्या उठ खड़ा होता है। अब सवाल ये है कि समस्या स्लम से है या डॉग से या उसे मिलेनियर बनाने वाले से? समस्या स्लम से तो होनी नही चाहिये क्योंकि [...]

चेतावनीः कुछ हिंदी ब्लोगस आपके कंप्यूटर के लिये खतरनाक

सर्व साधारण को ये सूचना दी जाती है कि कुछ ब्लोगस जिन्हें आप बड़े चाव से पढ़ते हैं वो आपके कंप्यूटर की ऐसी तेसी करने का सामान मुहया कराते हैं। मुझे नही लगता कि उन ब्लोगस के मालिकों को इसका जरा भी इल्म होगा। आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे? तो ऐसा होता है या [...]

[ More ] January 22nd, 2009 | 13 Comments | Posted in Announcement |

जाको राखे साईंया – क्या वाकई में?

हमारी और आसपास के लोगों की जिंदगी में अक्सर ऐसा कुछ ना कुछ घटित हो जाता है जिससे सभी का ‘जाको राखे साईंया’ कहावत पर यकीन बना रहता है। सवाल ये भी उठ सकता है जब बचाना उसी ने ही है तो वो क्यों ऐसी परिस्थिति आने देता है जहाँ उसे बचाने आना पड़े। इसका [...]

फिल्म समीक्षाः Slumdog Millionaire

स्लमडॉग मिलेनियर को अभी तक हाल में ही संपन्न हुए गोल्डन ग्लोब समेत काफी पुरस्कार मिल चुके हैं। स्लमडॉग मिलेनियर की कहानी एक भारतीय विकास स्वरूप के द्वारा लिखी किताब (Q & A) पर आधारित है। स्लमडॉग मिलेनियर की कहानी स्लम में अपने भाई सलीम के साथ रह रहे एक लड़के जमाल मलिक के इर्दगिर्द [...]

[ More ] January 14th, 2009 | 21 Comments | Posted in फिल्म समीक्षा |