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ख्वाब की दस्तक ने खोले बंद यादों के किवाड़ – 1

एक रोज काम के बोझ से थका ट्रेन में आंखें मूँदे बैठ वापस लौट रहा था तब अचानक मुझे सुनायी दिया, “ताना ना न न ना, ताना ना न न ना”। ऐसा लगा जैसे किसी ने घंटी बजायी हो उठा किवाड़ खोले, सामने कोई नही था। इधर उधर झाँक कर देखा एक बच्ची खिलखिलाकर हँस [...]

[ More ] March 27th, 2009 | 16 Comments | Posted in old days of childhood |

बेस्ट फोटोः शब्द गौण हैं, भाव मौन हैं

ये फोटो मुझे ईमेल से मिला और कुछ लिखने की जगह इतना ही कह सकता हूँ – शब्द गौण हैं, भाव मौन हैं। आप कुछ कहना चाहेंगे?

[ More ] March 21st, 2009 | 23 Comments | Posted in जरा हट के |

वो मेरा पहला कवि सम्मेलन

अभी रविवार के दिन यहाँ प्रिंसटन में एक कवि सम्मेलन था जिसका आयोजन अनूप भार्गव जी ने किया था, हमें भी न्यौता मिला तो हम भी जा पहुँचे। इससे पहले कि कुछ गलतफहमी हो जाये मैं बताता दूँ हम छोटे से स्टेज में नही बड़ी सी दर्शक दीर्घा में बैठने के लिये गये थे। हालांकि [...]

[ More ] March 16th, 2009 | 17 Comments | Posted in जरा हट के |

होली पर लिखी एक कविता और एक विडियो

हमेशा की तरह इस बार भी होली आ ही गयी, ये होली भी ना, कभी आना नही भूलती, देखिये तो हर तरफ कैसे कैसे रंग बिखेरे हुए हैं इस ने। आप लोग तो होली होली के दिन ही मनायेंगे, हम तो हर त्यौहार की तरह इसे भी यहाँ वीकेंड में ही मनायेंगे। निठल्ला चिंतन पढने [...]

इंडियन कहाँ हैं?

एक अमेरिकन इंडिया घूमकर वापस अमेरिका आया और जब वो अपने इंडियन दोस्त से मिला तो उस इंडियन दोस्त ने उससे इंडिया के बारे में जानना चाहा। उसने अमेरिकन से पूछा, तो मेरा देश तुम्हें कैसा लगा? अमेरिकन ने जवाब दिया, इंडिया इज ग्रेट कंट्री विद सोलिड एंसियेंट हिस्ट्री एंड इमेंसली रिच विद नेचुरल रिसोर्सेज। [...]

[ More ] March 6th, 2009 | 19 Comments | Posted in जरा हट के |

ब्लोगिंग के 5 सालः कुछ फायदे कुछ नुकसान

विगत १५ फरवरी २००९ को ब्लोगिंग करते अपने को ५ साल पूरे हो गये, मंदी के इस दौर में ये बताने की रफ्तार भी कितनी मंद रही ये इसी से दिखता है कि हम ये बात आज ४ मार्च को बता रहे हैं। सोचा आज क्यों ना थोड़ा पीछे मुड़ कर देखा जाये और जानने [...]

[ More ] March 4th, 2009 | 44 Comments | Posted in Announcement |

भारतीय संस्कृति भी कोई दूध की धुली नही है

मैने अपनी पिछली पोस्ट में एक टीन प्रीगनेंसी का जिक्र किया था जो कि हमारे समाज (क्या पश्चिम क्या पूर्व) की विफलता का ही शायद नतीजा है। उसमें शास्त्रीजी की एक टिप्पणी आयी थी, जिसे पढ़कर ही मुझे कहना पड़ रहा है भारतीय संस्कृति (या सभ्यता या समाज) भी कोई दूध की धुली नही है। [...]

छोटी सी आशा पिता बने 13 साल के बच्चे के लिये

ब्रिटेन के अखबारों में ये बात सुर्खियां बनी थी (हैं), सही गलत की बहस अभी जारी है। 13 साल का एक बच्चा अभी अभी पिता बना है, माँ बनी लड़की की उम्र है 15 साल। अमेरिका के सी एन एन की मानें तो इसका एक तीसरा एंगल भी है और वो है 16 साल का [...]

[ More ] February 16th, 2009 | 12 Comments | Posted in देश दुनिया |

अगर मुन्नाभाई फूलों की जगह चड्ढी भेजता तो…

ध्यान रहे मैने गुलाबी नही कहा, क्यों? वो बाद में बताऊंगा पहले चड्ढी की कबड्डी से संबन्धित तीन पोस्ट का जिक्र करना चाहूँगा जो मैने पिछले १-२ दिन में पढ़ी थी। पहली पोस्ट थी सुरेश चिपलूनकर की जिन्होंने शुरूआत तो गुलाबी चड्डी भेजने के विरोध से की लेकिन फिर मुद्दे से भटक गये और व्यक्तिगत [...]