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चंदन विष व्यापत नही, लिपटे रहत भुजंग

एक शक्की आदमी था, हर वक्त भ्रमित रहता, लटकती रस्सी को साँप समझकर हमेशा डरा रहता। उसी दुनिया में एक दूसरा आदमी भी था जो आज भी यही समझता था कि कोई अगर तुम्हारे एक गाल में थप्पड़ मारे तो उसके आगे दूसरा गाल कर दो। मैंने आज के दिन दो अलग अलग अलग खबरें [...]

[ More ] August 18th, 2010 | 5 Comments | Posted in खालीपीली |

पुस्तक चर्चाः बिखरे मोती – टूट गयी है माला मोती बिखर गये

कनाडा के एक कस्बे से पास के बड़े शहर को जाती ट्रेन में काला चश्मा लगाये, भरे गदराये जिस्म का एक आदमी बैचेनी से इधर उधर कुछ ढूँढ रहा था। अचानक उसकी नजर थोड़ा दूर पर बैठी मल्टी प्रोसेसिंग की जीती जागती मिसाल एक युवती पर पड़ी, जो गरदन एक तरफ झुका सिर और कंधे [...]

ढोल ज्यादा शोर करता है या मीडिया

मेरा मानना है कि वाधयंत्रों (music instruments) में ढोल (या नगाड़ा) सबसे ज्यादा बेसुरा यंत्र है, इसके दो कारण हैं – एक, हल्के सी थाप देने में भी ये जोर की आवाज करता है और दूसरा हर कोई ऐरा-गैरा इस बजाता हुआ मिल जाता है। हो सकता है आपको मेरी बात से इत्तेफाक ना हो [...]

सेक्स, पैसा और प्रमोशन

इन तीनों का साथ एक खतरनाक कंबीनेशन है और अलग अलग होने पर भी ये एक दूसरे से टकरा ही जाते हैं। आजकल यहाँ एक कामेडियन के ऐसे ही खिलाये कुछ गुल एक बहस का सबब बने बैठे हैं – अपने सहयोगी साथियों के साथ सेक्सुअल संबंध बनाने चाहिये या नही। बहस का नतीजा चाहे [...]

[ More ] October 8th, 2009 | 4 Comments | Posted in खालीपीली |

सिमटती हिंदी ब्लोगिंग का बढ़ना जारी है

आह वाह से उठकर पढ‌़ने वालों को हो सकता है इस पोस्ट के टाईटिल में विरोधाभास नजर आये, इसलिये आगे कुछ कहने से पहले टाईटिल के फर्क को जान लें। बढ़ने और सिमटने में वो ही फर्क है जो किसी भी ग्राफ के x-Axis और y-Axis में यानि बढ़ना vertically होता है और सिमटना horizontally। [...]

डेमोक्रेसी कैसी कैसी

डेमोक्रेसी की जब बात की जाती है तो देशों का जिक्र जरूर आता है, एक भारत और दूसरा अमेरिका। अमेरिका की पुलिस ने अमेरिका के एयरपोर्ट में एक नान अमेरिकी नागरिक को पूछताछ के लिये कुछ देर रोका तो उस पर भारतीय मीडिया और शायद जनता भी हलकान परेशान हो बेमतलब की बहस पर उतर [...]

[ More ] August 26th, 2009 | 2 Comments | Posted in समाज और समस्‍या |

आज पंद्रह अगस्त है

आज पंद्रह अगस्त यानि भारत की स्वतंत्रता की सालगिरह के मौके पर पंद्रह अगस्त पर लिखी कुछ पंक्तियाँ राष्ट्र को समर्पित है। सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई। आज पंद्रह अगस्त है वो दिन जब हमने पहली बार खुली हवा में साँस ली थी वो दिन जिसकी खातिर कई जानें गई थी [...]

[ More ] August 15th, 2009 | 13 Comments | Posted in भारत, शायरी और गजल |

आया है मुझे फिर याद वो जालिम

अभी कुछ दिनों पहले मैं लाइब्रेरी गया था अपने बेटे के लिये कुछ कॉमिक्स लेने, ना जाने कितने सालों बाद फिर से कॉमिक्स की शक्लें देखीं। इनमें से एक थी अवतार जो कि एशियन करेक्टर पर बनी कहानी है जो कि भारतीय मूल के एम नाइट श्यामलन की अगली फिल्म की विषय वस्तु भी है। [...]

[ More ] August 13th, 2009 | 7 Comments | Posted in old days of childhood, खालीपीली |

फिल्म समीक्षाः Ice Age 3 – Dawn of the Dinosaurs

सिड, मेनी और डियेगो आर बैक इन आइस ऐज ३ एंड दिस टाईम बिगर एंड बैटर, बिगर बोले तो डायनासोर और बैटर बोले तो एनीमेशन। आइस ऐज का थर्ड वर्जन दूसरे वर्जन से बेहतर है स्टोरी आयडिया में भी और ग्राफिक्स में भी। साथ ही साथ बोनस के रूप में ये थ्री-डी वर्जन में भी [...]

[ More ] July 6th, 2009 | 9 Comments | Posted in फिल्म समीक्षा |