अगर आप सोच रहे हैं ये किसी व्यक्ति के लिये है तो गलत, आज ये कहावत मैं वास्तव में एक कम्पनी के लिये यूज कर रहा हूँ, कम्पनी जो है अमेरिका का पांचवां सबसे बड़ा Investment बैंक। वो बैंक जो शुक्रवार की सुबह तक अर्श पर था और आज सोमवार की सुबह फर्श पर, वो […]

पिछली पोस्ट में काफी लोगों ने अपने विचार रखे और पूनम ने एक अच्छा सवाल उठाया जिससे ये चर्चा थोड़ा और आगे बड‌े।
टिप्पणियों को लेकर आपकी क्या अपेक्षाएं होती हैं, जाहिर सी बात है टिप्पणियाँ किसे नही अच्छी लगती। लेकिन कई बार होता है कि आप अपनी समझ के अनुसार सोचते हैं अहा ये […]

कुछ समय पहले मैंने अंग्रेजी के एक ब्लोग में इस विषय पर देखा था कि बड़ी अच्छी चर्चा चली थी। सब अपने अपने कारणों को बता रहे थे। तो मुझे लगा क्यों ना हिंदी चिट्ठाकारों में भी इस विषय को उठा के देखा जाय।
चाहे आप चिट्ठे लिखते पढ़ते है या सिर्फ पढ़ते हैं, दोनों […]

मैने शायद इतना चौंकाने वाला विज्ञापन आजतक नही देखा था, इस पर ज्यादा ताज्जुब इस बात का है कि ये एक महिला द्वारा बनाया गया है और एक महिला के ऊपर ही शूट भी किया गया है। ये विज्ञापन जर्मनी में बनाया गया है और वहाँ की ही किसी मैगजीन के लिये। कह नही सकता […]

ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर कहने वाले कबीर दास जैसा व्यक्तित्व शायद ही किसी और हिन्दी साहित्यकार का होगा। स्कूल के वक्त भी वो कबीर और उनके दोहे ही थे जो आसानी से समझ में आते थे। उनका व्यक्तित्व अनुपम तो था ही लेकिन उनके जन्म को लेकर कई किंवदन्तियाँ भी प्रचलित […]

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