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वो लाश अभी तक रोती है

सोचा था इन बम धमाकों पर अभी कुछ नही लिखूँगा, जाहिर था अंदर का आक्रोश शब्दों को सही शक्ल नही लेने देगा लेकिन फिर……………। अपने को इस आदमी की जगह रखकर पढ़के देखिये – वो बीस हजार कमाता था, घर पर राशन पानी लाता था। जैसे तैसे भी करके वो, घर का खर्च चलाता था। [...]

[ More ] July 29th, 2008 | 15 Comments | Posted in शायरी और गजल |

चंद शब्द चुनके लाया हूँ

कुछ समय पहले ये लिखा था, इस कलाम की कहानी कुछ वैसी ही है जैसी ‘तिल बना रहे थे, स्याही फैल गयी’ की। मुलाहयजा फरमायें – शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम चंद शब्द चुनके लाया था, जाने कहाँ वो हो गये गुम। कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा [...]

[ More ] July 18th, 2008 | 13 Comments | Posted in शायरी और गजल |

लघु कथाः ये कैसी मोहब्बत

मैं नही जानता इसे लघु कथा कहनी चाहिये या नही लेकिन ये बहुत कुछ सिखाती है। मुझे एक ई-मेल में ये प्राप्त हुई जिसे मैंने अंग्रेजी से अनुवाद करके यहाँ पोस्ट कर दिया, साथ ही इसे ये टाईटिल भी दे दिया। एक अंधी लड़की थी जो अपने से इसलिये घृणा करती थी क्योंकि वो अंधी [...]

[ More ] July 18th, 2008 | 9 Comments | Posted in जरा हट के |

माँ सुनाओ मुझे वो कहानी और लब पे आती है दुआ

गीत और संगीत में आज दो ऐसे गीत पेश हैं जो हैं तो जगजीत सिंह के एलबम से लेकिन जिसे उन्होंने नही बल्कि एक बच्ची सिजा रॉय ने गाया है। शायद ही कोई ऐसा होगा जिसे भावविभोर कर देने वाले ये गीत पसंद ना आयें। 1995 में जगजीत सिंह का एक एलबम आया था जिसका [...]

[ More ] July 15th, 2008 | 4 Comments | Posted in गीत संगीत |

ईर कहे भारत बंद, बीर कहे भारत बंद और फत्ते कहे…

अब फत्ते क्या कहे ये जानने के लिये आपको ये पोस्ट तो पढ़नी पड़ेगी, आप यह भी सोच रहे होंगे कि भला ये ईर, बीर और फत्ते हैं कौन। अंग्रेजी की एक कहावत में तीन नाम आते हैं- टॉम, डिक और हैरी (उदाहरण के लिये If every Tom, Dick and Harry knows about something, then [...]

[ More ] July 13th, 2008 | 3 Comments | Posted in खालीपीली |

बालीवुड के गीत पर हालीवुड की थिरकन

ब्रिटेन/अमेरिका का रियल्टी शो “So you think you can dance” आप देख रहे हों और उसमें एक हिंदी गाना “धूम ताना” (ओम शांति ओम) बजने लगे और इस धुन पर थिरक रहे हों विदेशी कदम तो कैसा लगेगा। अगर कहूँ जबरदस्त लगेगा तो, इसे देख शायद शाहरूख को थोड़ा डांस सीखने की जरूरत ही आ [...]

मसंद, Viewers की पसंद जाने तू या जाने ना

एक व्यक्ति हैं राजीव मसंद जो IBNLive पर फिल्मों की क्रिटिक्सगिरी यानि आलोचना (शायद मुझे समीक्षा कहना चाहिये) करते हैं, वैसे ही जैसे अपने चवन्नी छाप यानि अजय ब्रह्मात्मज (जाने तू अब्बास की जुबानी, इस फिल्म पर छवन्नी की छाप)। उनके द्वारा समीक्षा की गयी कई फिल्में जिन्हें उन्होंने अच्छा बताया (४ स्टार टाईप) वो [...]

एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी

मैं तब अल्मोड़ा में था जब गुलाम अली का ये एलबम निकला था, लाला बाजार में घूमते हुए अक्सर इसकी एक गजल जो सुनायी पड़ती थी, वो थी – एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी। तब गुलाम अली की गजलें मुझे इतनी पसंद नही थी लेकिन फिर भी ना जाने क्यूँ [...]

[ More ] July 6th, 2008 | 9 Comments | Posted in गीत संगीत |

फिल्म समीक्षाः धर्म

This summer do yourself a favour and watch this film Dharm. वैसे तो 2007 में रीलिज हुई इस फिल्म की समीक्षा का अब उतना कोई औचित्य नही है लेकिन फिर भी अच्छे सिनेमा के लिये तारीफ के दरवाजे कभी भी खोले जा सकते हैं। फिल्म धर्म का निर्देशन किया है भावना तलवार ने जो उनकी [...]

[ More ] June 29th, 2008 | 4 Comments | Posted in फिल्म समीक्षा |