शायरी और गजल


उजाला

हर तरफ फैला उजाला, हर कली खिलने लगी
आई सूरज की किरण, रात घर चलने लगी।
पंछी जो सब चुप थे अब तक, सहसा चहचहाने लगे
कहीं शोर बच्चों का है तो, कहीं गीत बजने लगे।
अब भी कुछ ऐसी जगह हैं, जहाँ रहता हरदम अंधेरा
गोलियों के शोर के बीच, सिसकियाँ लेता सवेरा।
पंछी वहाँ मिलते नही हैं, बचपन बच्चों [...]

वो लाश अभी तक रोती है

सोचा था इन बम धमाकों पर अभी कुछ नही लिखूँगा, जाहिर था अंदर का आक्रोश शब्दों को सही शक्ल नही लेने देगा लेकिन फिर……………। अपने को इस आदमी की जगह रखकर पढ़के देखिये -

वो बीस हजार कमाता था,
घर पर राशन पानी लाता था।
जैसे तैसे भी करके वो,
घर का खर्च चलाता था।
आफिस से घर पर [...]