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आज पंद्रह अगस्त है

आज पंद्रह अगस्त यानि भारत की स्वतंत्रता की सालगिरह के मौके पर पंद्रह अगस्त पर लिखी कुछ पंक्तियाँ राष्ट्र को समर्पित है। सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई। आज पंद्रह अगस्त है वो दिन जब हमने पहली बार खुली हवा में साँस ली थी वो दिन जिसकी खातिर कई जानें गई थी [...]

[ More ] August 15th, 2009 | 13 Comments | Posted in भारत, शायरी और गजल |

मेरे बेटे की लिखी पहली हाइकू कविताः बर्फ

कविताओं के जानकारों का क्या कहना है एक छोटे से बच्चे की लिखी इस हाईकू कविता के बारे में। आज अभी जब मैं उसकी टीचर से मिलने गया तो सबसे बड़ा सरप्राईज मुझे मिला उसकी लिखी हाईकू कविता देखकर। वैसे उसने २ लिखी थीं लेकिन मैं ये वाली ही टिप पाया। मेरा बेटा जो कि [...]

होली पर लिखी एक कविता और एक विडियो

हमेशा की तरह इस बार भी होली आ ही गयी, ये होली भी ना, कभी आना नही भूलती, देखिये तो हर तरफ कैसे कैसे रंग बिखेरे हुए हैं इस ने। आप लोग तो होली होली के दिन ही मनायेंगे, हम तो हर त्यौहार की तरह इसे भी यहाँ वीकेंड में ही मनायेंगे। निठल्ला चिंतन पढने [...]

मेरा वाला जेनेरिक: सूर्य अस्त शराबी मस्त

आप सोच में तो नही पड़ गये कि ये क्या बला हुई, ज्यादा मत सोचिये पहले मैं आपको ये बताऊँगा ये क्या है और उसके बाद जेनेरिक शेर भी सुनाऊँगा। आपने ये शायद ही कभी पहले सुना हो क्योंकि अभी अभी हमने ये बिल्कुल ताजा अपने दिमाग की भट्टी से निकाला है, शब्द तो पुराना [...]

वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी

जगजीत सिंह की गायी मशहूर गजल से २-३ लाईनें उधार लेकर अपने बचपन की यादों को इस गीत गजल में समेटने की कोशिश की है। आज ऐसे ही कुछ सफाई कर रहा था तो २-३ साल पहले लिखी ये गजल मुझे मिल गयी। पहाड़ों में बिताये उन अनमोल पलों को समेटने की कोशिश जो अब [...]

[ More ] January 8th, 2009 | 17 Comments | Posted in शायरी और गजल |

पराशर गौड़ की एक कविताः पीड़ा

पराशर गौड़ उत्तराखंडी सिनेमा के जनक कहे जाते हैं, इनके द्वारा पहाड़ी महिला के संघर्ष की कहानी पर निर्मित फिल्म गौरा अभी इस साल के शुरू में रिलीज हुई थी। इन्होंने फिल्मों के साथ साथ कई नाटक और कवितायें भी लिखीं हैं, आज इन्हीं की एक कविता पोस्ट कर रहा हूँ जो इन्होंने कल-परसों शायद [...]

प्रेम कविता

जिन्हें अब तक नही मालूम उन्हें बता दें कि यदा कदा हम भी कविता जैसे शब्द कागज में उड़ेल लेते हैं। ये अलग बात है कि उसमें प्रेम या श्रृंगार रस नही के बराबर पाया जाता है। लेकिन ऐसा नही है कि हम शब्दों को प्रेमरस या श्रृंगार रस की चासनी में भिगोने का प्रयास [...]

[ More ] August 27th, 2008 | 17 Comments | Posted in शायरी और गजल |

उजाला

हर तरफ फैला उजाला, हर कली खिलने लगी आई सूरज की किरण, रात घर चलने लगी। पंछी जो सब चुप थे अब तक, सहसा चहचहाने लगे कहीं शोर बच्चों का है तो, कहीं गीत बजने लगे। अब भी कुछ ऐसी जगह हैं, जहाँ रहता हरदम अंधेरा गोलियों के शोर के बीच, सिसकियाँ लेता सवेरा। पंछी [...]

[ More ] August 25th, 2008 | 6 Comments | Posted in शायरी और गजल |

वो लाश अभी तक रोती है

सोचा था इन बम धमाकों पर अभी कुछ नही लिखूँगा, जाहिर था अंदर का आक्रोश शब्दों को सही शक्ल नही लेने देगा लेकिन फिर……………। अपने को इस आदमी की जगह रखकर पढ़के देखिये – वो बीस हजार कमाता था, घर पर राशन पानी लाता था। जैसे तैसे भी करके वो, घर का खर्च चलाता था। [...]

[ More ] July 29th, 2008 | 15 Comments | Posted in शायरी और गजल |