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आया है मुझे फिर याद वो जालिम

अभी कुछ दिनों पहले मैं लाइब्रेरी गया था अपने बेटे के लिये कुछ कॉमिक्स लेने, ना जाने कितने सालों बाद फिर से कॉमिक्स की शक्लें देखीं। इनमें से एक थी अवतार जो कि एशियन करेक्टर पर बनी कहानी है जो कि भारतीय मूल के एम नाइट श्यामलन की अगली फिल्म की विषय वस्तु भी है। [...]

[ More ] August 13th, 2009 | 7 Comments | Posted in old days of childhood, खालीपीली |

ख्वाब की दस्तक ने खोले बंद यादों के किवाड़ – 2

स्कूल के दिनों में दूरदर्शन के बेहतरीन टीवी सीरियलस को याद करते हुए मैने कुछ सीरियलस पिछली बार बताये थे, आज उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए कुछ और सीरियलस को याद करते हैं। शरद जोशी का लिखा हुआ एक बहुत ही सरल और सरस कामेडी सीरियस आता था, “ये जो है जिंदगी“। इस सीरियल [...]

[ More ] March 30th, 2009 | 12 Comments | Posted in old days of childhood |

ख्वाब की दस्तक ने खोले बंद यादों के किवाड़ – 1

एक रोज काम के बोझ से थका ट्रेन में आंखें मूँदे बैठ वापस लौट रहा था तब अचानक मुझे सुनायी दिया, “ताना ना न न ना, ताना ना न न ना”। ऐसा लगा जैसे किसी ने घंटी बजायी हो उठा किवाड़ खोले, सामने कोई नही था। इधर उधर झाँक कर देखा एक बच्ची खिलखिलाकर हँस [...]

[ More ] March 27th, 2009 | 16 Comments | Posted in old days of childhood |