< Browse > Home / Archive by category 'मस्‍ती-मजा, व्यंग्य'

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ढोल ज्यादा शोर करता है या मीडिया

मेरा मानना है कि वाधयंत्रों (music instruments) में ढोल (या नगाड़ा) सबसे ज्यादा बेसुरा यंत्र है, इसके दो कारण हैं – एक, हल्के सी थाप देने में भी ये जोर की आवाज करता है और दूसरा हर कोई ऐरा-गैरा इस बजाता हुआ मिल जाता है। हो सकता है आपको मेरी बात से इत्तेफाक ना हो [...]

हम लोगों ने जगह जगह थूकना छोड़ जूता फेंकना शुरू कर दिया क्या?

एक ईराकी पत्रकार ने जूता क्या फेंका भारत में जूते यूँ फेंके जाने लगे जैसे कुछ समय पहले डाक्टरों (अस्पताल या मेडिकल स्कूलों) की हड़ताल हुआ करती थी। अगर ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन ऐसा आयेगा जब पब्लिक चाहे लंच बॉक्स रखना भूल जाये लेकिन बैग में एक जोड़ी जूता रखना नही भूलेगी। [...]

मेरा वाला जेनेरिक: सूर्य अस्त शराबी मस्त

आप सोच में तो नही पड़ गये कि ये क्या बला हुई, ज्यादा मत सोचिये पहले मैं आपको ये बताऊँगा ये क्या है और उसके बाद जेनेरिक शेर भी सुनाऊँगा। आपने ये शायद ही कभी पहले सुना हो क्योंकि अभी अभी हमने ये बिल्कुल ताजा अपने दिमाग की भट्टी से निकाला है, शब्द तो पुराना [...]

अगर तुम ना होते

मैं इस नाम की फिल्‍म की बात नहीं करने जा रहा बल्‍िक एक काल्‍पनिक लेख की बात कर रहा हूँ। धार्मिक भावना वाले व्‍यक्‍ति को हो सकता है इसे पढ़ के ठेस पँहुचे (जिसका मेरा कतई इरादा नही है), इसलिये गुजारिश है कि वो इसे या तो ना पढें और या फिर निठल्‍ला चिंतन समझ [...]

जिस रोज मुझे भगवान मिले: अंतिम भाग

अब तक आप ने पढ़ा भाग १ नेताओं की तरह तुरंत पाला बदलते हुए अपना आत्म सम्मान, अपना दिल-दिमाग सब कुछ अपनी जेब में रख हाथ जोड़ के हम बोल पड़े, “बस भगवन बस सब समझ गया। लेकिन शक का इलाज तो किसी वैध के पास है नही मन अभी भी शक कर रहा था [...]

जिस रोज मुझे भगवान मिले

‘ना माया से ना शक्ति से भगवन मिलते हैं भक्ति से’, एक खुबसूरत गीत है और इसको सुनने के बाद लगा कि अगर मिलते होते तो भी प्रभु हमको मिलने से रहते। क्योंकि माया हमे वैसे ही नही आती, शक्ति हममें इतनी है नही और भक्ति हम करते नही, तो कुल जमा अपना चांस हुआ [...]

शबाना जी, तेरा मेरा दर्द ना जाने कोई

शबाना आजमी और इनके हमनिवाला और हमप्याला शौहर जावेद अख्तर किसी परिचय के मोहताज नही, ना ही इनके साहेबजादे लख्ते-जिगर फरहान अख्तर को इसकी जरूरत है। इसलिये बजाय इनका परिचय देने के सीधे मुदद्दे पर आते हैं। शबाना आजमी पूर्व सांसद तो हैं ही, साथ में अच्छी अदाकारा भी हैं और समाज सेवी भी, ये [...]

मैं हूँ असली मनोज बाजपेयी

हम हिंदी ब्लोग जगत के चिट्ठाकार नामक प्राणी भी जबरदस्त हैं जिसके होने में संशय हैं उसे जोरशोर से पढ़े जा रहे हैं, दबाकर टिप्पणी कर रहे हैं और टॉम डिक हैरी (हिंदी अनुवाद ईर बीर फत्ते पढ़ें) जिनका होना तय है वहाँ जाकर कोई झांकता तक नही। कोई जुमा जुमा दो पोस्ट पुराने हिंदी [...]

IPL T20 यानि क्रिकेट का Item Song

वैसे तो IPL खत्म भी हो गया है और कमाने वालों का पैसा अभी हजम होना चालू है, और अभी तक इस विषय में काफी कुछ लिखा और पढ़ा जा चुका होगा। लेकिन जब सास-बहू, शादी-बरबादी, वो ही घर वो ही कहानी टाईप कहानियों पर बने सीरियल बार बार देखे जा सकते हैं तो हमने [...]