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अनोखा विज्ञापन: जब यू-ट्यूब विडियो से निन्जा बाहर कूद पड़े

बहुत सालों पहले, जब यू-ट्यूब नही था तब एक जावा स्क्रिप्ट बहुत पोपुलर थी जो वेब पेज में लिखे हुए को इधर उधर घुमा देती थी, फोटुओं वाले पेज की फोटो बिखरा देती थी। शायद उसी को याद करके पैट्रिक बोयविन ने नेक्सस वन (Nexus One) फोन के लिये ये विज्ञापन बनाया जिसमें एक एक [...]

[ More ] February 2nd, 2011 | 6 Comments | Posted in जरा हट के, विडियो |

बेस्ट फोटोः शब्द गौण हैं, भाव मौन हैं

ये फोटो मुझे ईमेल से मिला और कुछ लिखने की जगह इतना ही कह सकता हूँ – शब्द गौण हैं, भाव मौन हैं। आप कुछ कहना चाहेंगे?

[ More ] March 21st, 2009 | 23 Comments | Posted in जरा हट के |

वो मेरा पहला कवि सम्मेलन

अभी रविवार के दिन यहाँ प्रिंसटन में एक कवि सम्मेलन था जिसका आयोजन अनूप भार्गव जी ने किया था, हमें भी न्यौता मिला तो हम भी जा पहुँचे। इससे पहले कि कुछ गलतफहमी हो जाये मैं बताता दूँ हम छोटे से स्टेज में नही बड़ी सी दर्शक दीर्घा में बैठने के लिये गये थे। हालांकि [...]

[ More ] March 16th, 2009 | 17 Comments | Posted in जरा हट के |

होली पर लिखी एक कविता और एक विडियो

हमेशा की तरह इस बार भी होली आ ही गयी, ये होली भी ना, कभी आना नही भूलती, देखिये तो हर तरफ कैसे कैसे रंग बिखेरे हुए हैं इस ने। आप लोग तो होली होली के दिन ही मनायेंगे, हम तो हर त्यौहार की तरह इसे भी यहाँ वीकेंड में ही मनायेंगे। निठल्ला चिंतन पढने [...]

इंडियन कहाँ हैं?

एक अमेरिकन इंडिया घूमकर वापस अमेरिका आया और जब वो अपने इंडियन दोस्त से मिला तो उस इंडियन दोस्त ने उससे इंडिया के बारे में जानना चाहा। उसने अमेरिकन से पूछा, तो मेरा देश तुम्हें कैसा लगा? अमेरिकन ने जवाब दिया, इंडिया इज ग्रेट कंट्री विद सोलिड एंसियेंट हिस्ट्री एंड इमेंसली रिच विद नेचुरल रिसोर्सेज। [...]

[ More ] March 6th, 2009 | 19 Comments | Posted in जरा हट के |

आते जाते खुबसूरत आवारा सड़कों पे – ब्लागर चर्चा 1

[इस सीरिज में हिंदी के कुछ ऐसे ब्लोगरस (या ब्लोग) की बात करेंगे जो मुझे पसंद हैं, इनमें से कुछ साथ चलते चलते कब दोस्त बन गये पता ही नही चला। इस सफर के लिये इस गीत की चंद लाईने बहुत उपयुक्त हैं - "आते जाते खुबसूरत आवारा सड़कों पे, कभी कभी इत्तेफाक से, कितने [...]

[ More ] January 27th, 2009 | 22 Comments | Posted in जरा हट के |

आदमी को क्या चाहिये

क्या आप जानते हैं कि एक आदमी को क्या चाहिये? अगर नही और जानना चाहते हैं तो हमारी शब्दों के साथ खेलने की कोशिश पर नजर दौड़ाईये। आदमी को चाहिये चबाने को दाँत और पेट में आँत नेता को चाहिये कुछ घूँसे और संसद में चलाने को लात। आदमी को चाहिये दो वक्त की रोटी [...]

[ More ] October 24th, 2008 | 14 Comments | Posted in जरा हट के |

देशों का एल्फाबेट सोंग

ये है Nations of the World, आपने Alphabet Song तो सुना ही होगा लेकिन इस दुनिया के लगभग सभी देशों के नाम अगर उसी अंदाज में कहे जायें या मुझे कहना चाहिये गाये जायें तो और वो भी 1 मिनट 47 सेंकड में। इस Alphabet Song को बनाने वालों ने काफी दिमाग लगाया है इसे [...]

[ More ] October 9th, 2008 | 8 Comments | Posted in जरा हट के, विडियो |

बम धमाकों पर निठल्लिकाएँ

मैं कोई साहित्यिक नही इसलिये शब्दों के फेर में ज्यादा पड़े बिना मैने ये शब्द ईजाद कर लिया। कम लाईनों में कविता करने के एक तरीके को शायद क्षणिकाएँ कहते हैं। अगर वैसे ही कम लाईनों में कुछ गद्ध लिखा जाये तो उसे क्या कहेंगे समझ नही आया इसलिये हमने नाम दिया निठल्लिकाएँ। आइये बम [...]

[ More ] October 3rd, 2008 | 14 Comments | Posted in जरा हट के |