मेरी ये पोस्ट उन तमाम लोगों को समर्पित है जो कुछ ना कुछ लिख रहे हैं, चाहे किसी चिट्ठे की किसी पोस्ट के रूप में या कही किसी चिट्ठे में टिप्पणी के रूप में। किसी एवार्ड की चाह में या निर्विकार भाव में, चाहे उनकी पोस्ट किसी को भाये या खुद ही देख मंद मंद […]

मेरी ये पोस्ट उन तमाम लोगों को समर्पित है जो कुछ ना कुछ लिख रहे हैं, चाहे किसी चिट्ठे की किसी पोस्ट के रूप में या कही किसी चिट्ठे में टिप्पणी के रूप में। किसी एवार्ड की चाह में या निर्विकार भाव में, चाहे उनकी पोस्ट किसी को भाये या खुद ही देख मंद मंद […]

मनीषा के नये साल के पहले लेख में पहले पढ़ा फिर अभय ने भी कहा पानी नही मिलेगा, अब जब सब जगह नीर के लिये नीर बहाया जा रहा था तो हमें लगा कि क्यों ना हम भी लगे हाथ पूछ लें, बोलो पानी कहाँ से लाओगे।
अब शब्दों के मामले में हम इन दोनों विभूतियों […]

आप सोच में तो नही पड़ गये कि ये क्या बला हुई, ज्यादा मत सोचिये पहले मैं आपको ये बताऊँगा ये क्या है और उसके बाद जेनेरिक शेर भी सुनाऊँगा। आपने ये शायद ही कभी पहले सुना हो क्योंकि अभी अभी हमने ये बिल्कुल ताजा अपने दिमाग की भट्टी से निकाला है, शब्द तो पुराना […]

उजाला

हर तरफ फैला उजाला, हर कली खिलने लगी।
आई सूरज की किरण, रात घर चलने लगी।।
पंछी जो सब चुप थे अब तक, सहसा चहचहाने लगे।
कहीं शोर बच्चों का है तो, कहीं गीत बजने लगे।।
अब भी कुछ ऐसी जगह हैं, जहाँ रहता हरदम अंधेरा।
गोलियों की शोर के बीच, सिसकियाँ लेता सवेरा।।
पंछी वहाँ मिलते नही हैं, बचपन बच्चों […]

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