आओ यूँ हीं लड़ मरें
एक बहुत पुराना फिल्मी गीत है, “चैन से हमको कभी, तुमने जीने ना दिया“, अगर भारत (माता) में जीवन होता तो वो यही गीत हरदम गुनगुना रही होती। चिट्ठाजगत हो या मुम्बई या कहीं ओर सब जगह यही लड़ना लड़ाना, मरना मारना, तू मेरी पीठ में मार, मैं तेरी पीठ में मारूँगा मचा हुआ है।
मुम्बई [...]
कौन बड़ा? चिट्ठाकार या पत्रकार
आशीष के बोल हल्ला में, मैं चिट्ठाकार और पत्रकार के बीच की कभी ना खत्म होने वाली पोस्ट पढ़ रहा था। मुझे लगा क्यों ना मैं भी अपने 2 सेंटस की आहुति इस बहस में डाल दूँ।
चिट्ठाकार यानि पर्सनल कंप्यूटर और पत्रकार यानि मैंकिंतोस
मैं तकनीक से जुड़ा चिट्ठाकार हूँ इसलिये इन दोनों के फर्क को [...]
