चिट्ठाजगत जैसे चांदनी चौक, ब्लोगवाणी जैसे कोयल की कूक
बहुत दिनों से सोच रहा था कि इन दोनों को आमने सामने रख के तोलूँ, अब आप पूछोगे कितने दिनों से? तो जनाब उन दिनों से जब चिट्ठाजगत का स्वरूप धारावी (मुम्बई की मशहूर झोपड़पट्टी) जैसा हो गया था। लेकिन हर वक्त कंप्यूटर खोलते ही भूल जाता था।
पिछले कई हफ्तों से मैने नोट किया है [...]
आओ यूँ हीं लड़ मरें
एक बहुत पुराना फिल्मी गीत है, “चैन से हमको कभी, तुमने जीने ना दिया“, अगर भारत (माता) में जीवन होता तो वो यही गीत हरदम गुनगुना रही होती। चिट्ठाजगत हो या मुम्बई या कहीं ओर सब जगह यही लड़ना लड़ाना, मरना मारना, तू मेरी पीठ में मार, मैं तेरी पीठ में मारूँगा मचा हुआ है।
मुम्बई [...]