सराय के बारे में सबसे पहले मैने नीलिमा की किसी एक शुरूआती पोस्ट में पढ़ा था जो जिसमें बताया था सराय रिसर्च करवाती थी और कुछ पैसे भी देती थी। उसके बाद कुछ दिनों पहले अविनाश ने जब सराय में किसी ब्लोगरस भेंटवार्ता के संबन्ध में लिखा था तब शायद दूसरी बार सुना लेकिन तब […]

कभी कभी ये मेरे दिल में ख्याल आता है कि काश हम या हमारे कोई मित्र मीडिया में होते। लाल रंग देखते ही जिस तरह किसी सांड में एनर्जी का उबाल आता है कुछ कुछ वैसा ही उबाल कभी कभी हमारे दिल में आता है जब भी ये किसी हिन्दी चिट्ठाजगत की खबर पर उछलते […]

बहुत दिनों से सोच रहा था कि इन दोनों को आमने सामने रख के तोलूँ, अब आप पूछोगे कितने दिनों से? तो जनाब उन दिनों से जब चिट्ठाजगत का स्वरूप धारावी (मुम्बई की मशहूर झोपड़पट्टी) जैसा हो गया था। लेकिन हर वक्त कंप्यूटर खोलते ही भूल जाता था।
पिछले कई हफ्तों से मैने नोट किया है […]

एक बहुत पुराना फिल्मी गीत है, “चैन से हमको कभी, तुमने जीने ना दिया“, अगर भारत (माता) में जीवन होता तो वो यही गीत हरदम गुनगुना रही होती। चिट्ठाजगत हो या मुम्बई या कहीं ओर सब जगह यही लड़ना लड़ाना, मरना मारना, तू मेरी पीठ में मार, मैं तेरी पीठ में मारूँगा मचा हुआ है।
मुम्बई […]

आशीष के बोल हल्ला में, मैं चिट्ठाकार और पत्रकार के बीच की कभी ना खत्म होने वाली पोस्ट पढ़ रहा था। मुझे लगा क्यों ना मैं भी अपने 2 सेंटस की आहुति इस बहस में डाल दूँ।
चिट्ठाकार यानि पर्सनल कंप्यूटर और पत्रकार यानि मैंकिंतोस
मैं तकनीक से जुड़ा चिट्ठाकार हूँ इसलिये इन दोनों के फर्क को […]

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