सबसे पहले अंग्रेजी पत्रकार बंधुओं को धन्यवाद ना वो यूँ स्विपयाते ना हम ये पोस्ट लिखकर इसका मतलब पूछ पाते। मन को काम से आराम देने के लिये हमने सोचा क्यों ना कुछ खबर-शबर पढ़ी जाय, देखा तो सभी अंग्रेजी खबरची स्विपयाने में लगे थे। कोई हैडिंग में स्विपया रहा था तो कोई कंटेंट में। […]

पिछले कई हफ्तों से समाचारों की सुर्खियों में छायी रहने वाली दोनो फिल्में आखिरकार समाचार चैनलों से निकल बड़े पर्दे में आ ही गयी। इन दोनों फिल्मों के निर्माताओं ने इसके प्रचार और प्रसार में कोई कसर नही छोड़ी। बात आगे बढ़ाने से पहले मैं आपको प्रचार और प्रसार का अंतर समझा दूँ।
हमने दिवाली के […]

बंदे में था दम - वंदे मातरम्, अब ये बंदा कौन है ये जानने के लिये तो आपको मुन्नाभाई से मिलने जाना पड‌ेगा क्योंकि मैं तो आपको बताने से रहा। ३ साल बाद एक बार फिर मुन्नाभाई अपने जिगरी सर्किट के साथ आपका मनोरंजन करने आ पहुँचे हैं। लगे रहो मुन्नाभाई एक बहुत ही मस्त […]

कल ही मधुर भंडारकर की नई मूवी कोरपोरेट देखी, जो व्यवसायिक रूप से असफल रही। लेकिन मधुर तारीफ के हकदार हैं ऐसी फिल्म बनाने के लिये, जहाँ दूसरे फिल्मकार वही पुरानी शराब बार-बार प्रोसेस कर नई बोतल परोसने में लगे हैं वहीं कुछ ही फिल्मकार हैं जो हर वक्त कुछ अलग परोसने की कोशिश करते […]

कॉल सेंटर

ये जनाब शायद इंडिया के कॉल सेंटर से रूबरू हुए बिना ही यह मूवी बना बैठे, १२ मिनट की मूवी आप भी देखिये और मजा लीजिये।

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