पहले पढ़ सुन कर तो लगा इस बार बड़ा कॉमन सा विषय मिला है अनुगुँज के लिए, कॉमन इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि ये ३ शब्द अक्सर लोगों के मुहँ से एक दूसरे को कहते हुए सुने जा सकते हैं। मसलन, “अरे मिंयाँ आज बड़े चहक रहे हो ‘माजरा क्या है’ और या फिर कभी […]
15 May
Posted by Tarun as मस्ती-मजा, व्यंग्य, अनुगूँज
Tags:अनुगूँज, मस्ती मजा, व्यंग्य10 वीं अनुगूँज का विषय रखा गया - “एक पाती ‘…’ के नाम”। अब पाती लिखे तो हमें जमाना बीत गया, ऊपर से समस्या थी कि पाती लिखे तो किस के नाम, और किस विषय को ले कर। याद आया कि विषय को लेकर थोड़ी छूट मिली हुई है पाती के लिए यूँ ही गप-सड़ाका […]
आशा ही जीवन है, सुनने मे बड़ा अच्छा लगता है लेकिन अगर देखा जाये तो अपने देश में क्या ये संभव है। क्योंकि आशा स्त्रीलिंग है, जीवन पुलिंग और अपने देश में आशा और जीवन के बीच कितना अन्तर है ये बताने की जरूरत नही है। जहाँ आशा को किसी श्राप से कम नही […]