< Browse > Home / Archive by category 'समाज और समस्‍या'

| Mobile | RSS

भेड़ियों के देश में

इसे पढ़ते पढ़ते सोचकर देखिये, आप एक दिन पास के ही सुंदर से जंगल में भ्रमण का विचार बनाते हैं और निकल पड़ते हैं अकेले ही। खुबसूरत वादियों, झरनों, पेड़ों से मंत्रमुग्ध होकर चलते आपके सामने अचानक कुछ भेड़िये आ जाते हैं। उन भेड़ियों से बचने के लिये आप बेतहाशा भागने लगते हैं और अंत [...]

घर की जोगन जोगनी आन गाँव की सिद्ध

इस पोस्ट को आगे बढ़ाने से पहले ये बेहतर होगा कि इस टाईटिल का मतलब समझ लिया जाय, जस्ट इन केस अगर किसी को समझ ना आये। दरअसल ये एक हिन्दी मुहावरा है ‘घर का जोगी जोगना आन गाँव का सिद्ध” चूँकि मैं बात महिला की करने वाला हूँ इसलिये जोगन जोगनी कर दिया, इसका [...]

[ More ] November 20th, 2010 | 3 Comments | Posted in समाज और समस्‍या |

डेमोक्रेसी कैसी कैसी

डेमोक्रेसी की जब बात की जाती है तो देशों का जिक्र जरूर आता है, एक भारत और दूसरा अमेरिका। अमेरिका की पुलिस ने अमेरिका के एयरपोर्ट में एक नान अमेरिकी नागरिक को पूछताछ के लिये कुछ देर रोका तो उस पर भारतीय मीडिया और शायद जनता भी हलकान परेशान हो बेमतलब की बहस पर उतर [...]

[ More ] August 26th, 2009 | 2 Comments | Posted in समाज और समस्‍या |

सेक्सटिंगः गलती किसकी है? लड़की की, उसके दोस्त की या फिर माँ-बाप की

आजकल अमेरिका में ये समस्या बढ़ती जा रही है और इसी कड़ी में ताजातरीन घटना अभी कुछ समय पहले घटी जब एक मीडिल स्कूल की लड़की ने अपनी खुद की एक नग्न तस्वीर खिंच अपने मोबाइल फोन से अपने दोस्त को भेजी। उसके उस दोस्त ने वो ही फोटो अपने मोबाइल से अपने कुछ दोस्तों [...]

[ More ] April 12th, 2009 | 19 Comments | Posted in समाज और समस्‍या |

उसको जब नंगा कर दिवार पर लटकाया था

चोखेरबाली की पोस्ट ‘शर्मनाक हादसा’ पर जाकर देखा तब इस खबर का पता चला, खबर से ज्यादा ताज्जुब इस बात पर हुआ कि उस पर इतनी प्रतिक्रिया नही देखने को मिली जितनी होनी चाहिये थी। कई बार ना जाने मुझे ऐसा क्यों लगता है कि हिंदी ब्लोगरस को देखकर कहूँ, ‘जब रोम जल रहा था [...]

[ More ] October 16th, 2008 | 19 Comments | Posted in समाज और समस्‍या |

देहली ब्लास्ट की चंद तस्वीरें

मुझे पराशरजी ने ईमेल से ये तस्वीरें भेजी, एक तो बहुत ही हृदय विदारक है या भयानक है कहूँ समझ नही आया। मैं कोशिश कर रहा था ये जानने कि फोटो में दिख रहे ये लोग किस धर्म के होंगे, देख रहा था इनके खून से क्या पता कुछ क्लू मिल जाये लेकिन NO LUCK। [...]

[ More ] September 18th, 2008 | 13 Comments | Posted in समाज और समस्‍या |

Teen Pregnancy: इस फर्क का मतलब समाज की रजामंदी नही

मैने पिछली पोस्ट में बताया था कि यहाँ अमेरिका के एक शहर में हाईस्कूल में पढ़ने वाली १६ से १७ साल के बीच की १७ लड़कियों ने आपस में करार किया कि एक साथ Pregnant होते हैं और अब वो १७ लड़कियाँ Pregnant भी हो गयी है। इस घटना ने यहाँ एक नही बहस को [...]

सोच रहा हूँ इन्हे अबला कहूँ या सबला या बेवकूफों का पागलपन

हाईस्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों की क्या उम्र हो सकती है १५-१६ या १७? क्या इस उम्र तक आते आते अक्ल आ जाती है, शायद हाँ, शायद ना। लग रहा हूँ ना कन्फ्यूज क्या करूँ जहाँ एक और भारत ये पेक्ट कराने के पीछे पढ़ा है कि हर कोई देश ये कहे कि वो पहले [...]

महिला दिवस पर विशेष: तस्वीर के दो पहलू

8 मार्च यानि एक बार फिर महिला दिवस, ऐसे समय में दो चौंकाने वाली खबरें जो बताती हैं कि अभी भी बेटियाँ कोई नही चाहता। ताज्जुब की बात ये है कि पढ़े लिखे लोग भी ऐसी संकुचित सोच रखते हैं। अब पहले ही बच्चे के लिंग का पता चल जाने की वजह से कई लोग [...]