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चिट्ठाजगत जैसे चांदनी चौक, ब्लोगवाणी जैसे कोयल की कूक

बहुत दिनों से सोच रहा था कि इन दोनों को आमने सामने रख के तोलूँ, अब आप पूछोगे कितने दिनों से? तो जनाब उन दिनों से जब चिट्ठाजगत का स्वरूप धारावी (मुम्बई की मशहूर झोपड़पट्टी) जैसा हो गया था। लेकिन हर वक्त कंप्यूटर खोलते ही भूल जाता था। पिछले कई हफ्तों से मैने नोट किया [...]

प्रचार, प्रसार और फिर समीक्षक की मार

पिछले कई हफ्तों से समाचारों की सुर्खियों में छायी रहने वाली दोनो फिल्में आखिरकार समाचार चैनलों से निकल बड़े पर्दे में आ ही गयी। इन दोनों फिल्मों के निर्माताओं ने इसके प्रचार और प्रसार में कोई कसर नही छोड़ी। बात आगे बढ़ाने से पहले मैं आपको प्रचार और प्रसार का अंतर समझा दूँ। हमने दिवाली [...]

बिल्लू जी मजा नही आया

मुद्दतों बाद फुरसत मिली तो सोचा क्यों ना अपना ‘होम पेज‘ थोड‌ा चुस्त दुरस्त किया जाय। बहुत दिनों से घिस घिस कर हमको चिट्ठों के दर्शन कराता अपना आइ ब्राउजर भी थका सा दिखने लगा था, फायरफॉक्स को नयी नवेली दुल्हन की तरह सहेज कर रखा है कभी कभी ही काम करवाते हैं जब आइ [...]

[ More ] October 29th, 2006 | 5 Comments | Posted in बस यूँ ही, रिव्‍यू |

कोरपोरेट और कीटनाशक शीतलता

कल ही मधुर भंडारकर की नई मूवी कोरपोरेट देखी, जो व्यवसायिक रूप से असफल रही। लेकिन मधुर तारीफ के हकदार हैं ऐसी फिल्म बनाने के लिये, जहाँ दूसरे फिल्मकार वही पुरानी शराब बार-बार प्रोसेस कर नई बोतल परोसने में लगे हैं वहीं कुछ ही फिल्मकार हैं जो हर वक्त कुछ अलग परोसने की कोशिश करते [...]

[ More ] August 5th, 2006 | 1 Comment | Posted in फिल्‍म, रिव्‍यू |