< Browse > Home / Archive by category 'बस यूँ ही'

| Mobile | RSS

जीना मरना साथ

याद है ये गीत, जीना मरना साथ तेरा मेरा जुदा होना मुश्किल है। इस गीत के बोलों को सही मायेने में संभव करके दिखाया इटली में मिले आलिंगन बद्ध जोडे के नर कंकालों के अवशेषों ने। ये अपनी तरह का पहला केस होगा शायद, अभी कहा तो यही जा रहा है कि ये पुरूष और [...]

[ More ] February 7th, 2007 | 5 Comments | Posted in बस यूँ ही |

एक बीटा की उम्र

क्या आप बता सकते हैं कि एक बीटा की उम्र कितनी हो सकती है या होनी चाहिये? आप कुछ गुणा भाग करें इससे पहले मैं जरा बता दूँ कि ये बीटा क्या होता है। कंप्यूटर सोफ्टवेयर की दुनिया में किसी भी उत्पाद को पब्लिक के सामने लाने से पहले उसका एक लिमिटेड वर्जन या कह [...]

[ More ] February 6th, 2007 | 8 Comments | Posted in खालीपीली, बस यूँ ही |

चलो कुछ जलाया जाय

अगर आप ये सोच रहे हैं कि हम बिजली वगैरह जलाने की बात कर रहे हैं तो गलत सोच रहे हैं क्योंकि जलाया तो उसे ही जाता है जो होता है। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कुछ बात नही होती फिर भी लोग आ जाते हैं कुछ ना कुछ जलाने। अब देखिये ना [...]

[ More ] December 4th, 2006 | 5 Comments | Posted in खालीपीली, बस यूँ ही |

इतना मत गुदगुदाओः एलमो

आजकल अमेरिका में इस एलमो खिलौने की धूम मची है, लोग खिलौने की दुकान में (Toy-R-US) सुबह ही से लाईन लगा कर खड‌े हो जाते है। एक व्यक्ति एक ही एलमो टॉय ले सकता है, इसके लिये पहले ही ग्राहक को इसका टिकिट दे दिया जाता है। सप्लाई कम है डिमांड ज्यादा और छुट्टियों के [...]

बिल्लू जी मजा नही आया

मुद्दतों बाद फुरसत मिली तो सोचा क्यों ना अपना ‘होम पेज‘ थोड‌ा चुस्त दुरस्त किया जाय। बहुत दिनों से घिस घिस कर हमको चिट्ठों के दर्शन कराता अपना आइ ब्राउजर भी थका सा दिखने लगा था, फायरफॉक्स को नयी नवेली दुल्हन की तरह सहेज कर रखा है कभी कभी ही काम करवाते हैं जब आइ [...]

[ More ] October 29th, 2006 | 5 Comments | Posted in बस यूँ ही, रिव्‍यू |

रिश्ता तेरा मेराः कोई शक!

मुकेश का गाया हुआ एक गीत जो बहुत पहले सुना था लगता है इस पोस्ट के लिये फिट बैठता है, वो गीत था “कि हम तुम चोरी से बंधे एक डोरी से, जइयो कहाँ ऐ हुजुर”। अब आधी पोस्ट के बारे में तो आप लोगों को वैसे ही पता चल गया होगा जो रह गया [...]

[ More ] September 27th, 2006 | Comments Off | Posted in खालीपीली, बस यूँ ही |

किसी हँसते हुए बच्चे को रूलाया जाय

आप सोच रहे होंगे मैने कहीं गलत तो नही लिख दिया इसलिये पहले ही बता दूँ बिल्कुल सही लिखा है बात हंसते हुए बच्चे को रूलाने की ही है। ये सब किया जा रहा है जबरदस्त फोटो खिंचने के लिये और ये सब किया है जिल ग्रीनबर्ग नाम की मोहतरमा ने। ये करती क्या हैं [...]

[ More ] September 7th, 2006 | 5 Comments | Posted in बस यूँ ही |

लॉस्ट इन ट्रांसलेशन

बहुत दिनों पहले गुगल ग्रुप में पोडकास्ट का हिन्दी शब्द ढूंढने की कवायद चली थी। तब से ही सोच रहा था कि ये अनुवाद होने कैसे चाहिये। क्या हर शब्द का अपनी भाषा में अनुवाद करना जरूरी है। मैं ऐसा नही मानता कि अनुवाद करते समय हर अंग्रेजी के शब्द का हिन्दी में अनुवाद किया [...]

[ More ] August 27th, 2006 | 9 Comments | Posted in बस यूँ ही |

वार्तालाप

चुंबन लो, पैसे दो पढ़ने के बाद हाल की एक घटना याद आ गई। न्यूयार्क पेन स्टेशन के बाहर बाल खिचड़ी, महिनों से बगैर नहाये, बेकार कपड़े पहना एक बेघर व्यक्ति खड़ा था। हम आफिस जाने के लिये ट्रेन स्टेशन से बाहर निकल वहाँ पहुँचे ही थे। तभी देखते हैं, दो पुलिस वाले उस आदमी [...]

[ More ] August 20th, 2006 | 3 Comments | Posted in बस यूँ ही |