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अरे भाया कोई Sweeps का मतलब समझायेगा

सबसे पहले अंग्रेजी पत्रकार बंधुओं को धन्यवाद ना वो यूँ स्विपयाते ना हम ये पोस्ट लिखकर इसका मतलब पूछ पाते। मन को काम से आराम देने के लिये हमने सोचा क्यों ना कुछ खबर-शबर पढ़ी जाय, देखा तो सभी अंग्रेजी खबरची स्विपयाने में लगे थे। कोई हैडिंग में स्विपया रहा था तो कोई कंटेंट में। [...]

[ More ] February 26th, 2008 | 6 Comments | Posted in खालीपीली, फिल्‍म |

प्रचार, प्रसार और फिर समीक्षक की मार

पिछले कई हफ्तों से समाचारों की सुर्खियों में छायी रहने वाली दोनो फिल्में आखिरकार समाचार चैनलों से निकल बड़े पर्दे में आ ही गयी। इन दोनों फिल्मों के निर्माताओं ने इसके प्रचार और प्रसार में कोई कसर नही छोड़ी। बात आगे बढ़ाने से पहले मैं आपको प्रचार और प्रसार का अंतर समझा दूँ। हमने दिवाली [...]

लगे रहो मुन्नाभाईः एकदम मस्त

बंदे में था दम – वंदे मातरम्, अब ये बंदा कौन है ये जानने के लिये तो आपको मुन्नाभाई से मिलने जाना पड‌ेगा क्योंकि मैं तो आपको बताने से रहा। ३ साल बाद एक बार फिर मुन्नाभाई अपने जिगरी सर्किट के साथ आपका मनोरंजन करने आ पहुँचे हैं। लगे रहो मुन्नाभाई एक बहुत ही मस्त [...]

कोरपोरेट और कीटनाशक शीतलता

कल ही मधुर भंडारकर की नई मूवी कोरपोरेट देखी, जो व्यवसायिक रूप से असफल रही। लेकिन मधुर तारीफ के हकदार हैं ऐसी फिल्म बनाने के लिये, जहाँ दूसरे फिल्मकार वही पुरानी शराब बार-बार प्रोसेस कर नई बोतल परोसने में लगे हैं वहीं कुछ ही फिल्मकार हैं जो हर वक्त कुछ अलग परोसने की कोशिश करते [...]

[ More ] August 5th, 2006 | 1 Comment | Posted in फिल्‍म, रिव्‍यू |

कॉल सेंटर

ये जनाब शायद इंडिया के कॉल सेंटर से रूबरू हुए बिना ही यह मूवी बना बैठे, १२ मिनट की मूवी आप भी देखिये और मजा लीजिये।

[ More ] July 24th, 2006 | 2 Comments | Posted in फिल्‍म, बस यूँ ही |

मेरी भैंस को डंडा क्‍यों मारा

यहाँ महमूद का गाया कोई गीत नही सुनाया जा रहा बल्‍कि ऐसा ही कुछ कहना है मेनका जी का। मेनका कौन? अरे वही जो ‘एनीमल वेलफेयर बोर्ड आफॅ इंडिया’ (AWBI) की सदस्‍या हैं, और संयोग से नेता भी। ये सारा हल्‍ला-बोल हो रहा है आने वाली नई फिल्‍म ‘रंग दे बसंती’ में हुए कुछ घोड़ों [...]

[ More ] January 13th, 2006 | 1 Comment | Posted in फिल्‍म, राजनीति |