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क्या इसे धर्मनिरपेक्षता की मिसाल मान सकते हैं?

मैंने कई बार इस देश और इस देश के वाशिंदो (हमें भी गिना जाये) पर संशय किया है, उनके धर्मनिरपेक्ष होने और उनकी धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाये। लेकिन आज इस खबर को पढ़कर मुझे लगा कि मेरी इस सोच को पुनर्विचार की जरूरत है। क्या अब हम वाकई सही मायनों में धर्मनिरपेक्षता की मिसाल कहे [...]

[ More ] August 26th, 2008 | 11 Comments | Posted in धर्म, बस यूँ ही |

दिल की भडास निकालो आओ हिन्दू मुस्लिम खेलो

आज दिन में नारद चैक किया तो देखा कि “आईना मोहल्ले के साथ बंद होने की इजाजत मांगे” गोया कह रहा हो कि “हम तुम एक कमरे में बंद हों और चाभी खो जाय”। हमें जगदीश भाई कम से कम अपने से तो ज्यादा समझदार लगते थे इसलिये सोचा हो सकता है कि होली की [...]

तेरे नाम

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा कि ही तर्ज पे थोड‌ा घुमा के कांग्रेस पार्टी ने बोल ही दिया, “तुम हमें वोट दो हम तुम्हें देश के संसाधनों के उपयोग का पहला हक देंगे”। गोया भारत के संसाधन कांग्रेस पार्टी की जागीर हों। माना कि राजप्रथा की तरह इस पार्टी में भी वंशज [...]

[ More ] December 13th, 2006 | 5 Comments | Posted in धर्म, राजनीति |

ईसाई योगा

यानि योग (योगा) में भी लगने लगा धर्म का पैबंद। योगा एक प्राचीन अनुशासित अभ्‍यास है जिसमें व्‍यक्‍ति अपने दिमाग, शरीर और आत्‍मा का मिलन करने या कराने की कोशिश करता है। योगा आज से पहले शायद ही किसी भगवान या धर्म से सीधा जुड़ा हो क्‍योंकि ये एक ऐसा अभ्‍यास है जिसमें हमें अपने [...]

[ More ] April 27th, 2006 | 5 Comments | Posted in धर्म, संस्‍कृति |

बलि और मासूम बच्‍चे

अभी अभी बी. बी. सी न्‍यूज में ये स्‍टोरी देखी जो दिल दहलाने वाली थी। खबर है कि उत्तर प्रदेश के किसी दूर दराज के गाँव में धार्मिक क्रिया के नाम पर दर्जनों बच्‍चों की बलि दी गयी (दी जा रही) है। आफिसरों का कहना है कि ऐसा अब बहुत कम होता है लेकिन चाहे [...]

धर्म बोले तो…….

इस बार काफी दिनों बाद अनुगूँज का आयोजन किया गया और इसकी गूँज इधर उधर सुनायी भी गई। इस बार का विषय है – मेरे जीवन में धर्म का महत्‍व। वैसे अगर देखा जाय तो हेमामालिनी जी भी काफी कुछ इसमें लिख सकती हैं लेकिन उनको कहे कौन। उनके धर्म पे ज्‍यादा जोर ना दे [...]

[ More ] April 3rd, 2006 | 11 Comments | Posted in अनुगूँज, धर्म |

तेरा पानी अमृत, मेरा पानी पानी

ये सारांश कह रहा हूँ उस बात की चर्चा का जो अफगानिस्‍तान की गलियों और पश्‍चिमी देशों के गलियारों के बीच चल रहा है। (आप चाहें तो तेरा को मेरा कर दें और मेरा को तेरा अर्थ नही बदलने वाला) अभी तक अगर नही समझे तो कुछ यहाँ पढ़ोकुछ यहाँ पढ़ो और कुछ यहाँकुछ यहाँ। [...]

धर्म और बोलने की आजादी

बोलने या लिखने की आजादी है इसका मतलब ये नही कि कोई कुछ भी लिखता जाय, अब अगले ने लिख दिया और हमें पसंद नही आया तो इसका मतलब ये भी नही कि गुस्‍से में अपने ही देश की संपत्ति को नुकसान पहुँचायें या क्रौध की अग्‍नी के जलजले में अपने ही लोगों की चिता [...]

[ More ] February 21st, 2006 | 7 Comments | Posted in खबर गरमागरम, धर्म |