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मोहल्ले में मुसलमान हिन्दू हुए हैरान

गुलाम अली की एक गजल है, “दिल में एक लहर सी उठी है अभी, कोई ताजा हवा चली है अभी” अगर इसी की तर्ज पर नारद को देखते हुए कुछ कहूँ तो वो कुछ यूँ होगा – “नारद में हिट बड़े हैं अभी, कोई धर्म की बहस चली है अभी”। उल्टे प्रदेश में कोई फरमान [...]

[ More ] April 10th, 2007 | 22 Comments | Posted in खालीपीली |

प्रेम कविता – एक बार फिर

प्रेम कविता लिखने की, एक दिन हमने भी ठानी लिखने से पहले मन बोला, कहाँ है दिल की रानी। कहाँ है दिल की रानी, जो प्रेम रस को घोले अपना भी दिल कभी, कुछ इलु इलु बोले। आये कोई, हमें भी, जो थोड़ा दर्द दे जाय कवि ना बन पाये ये दिल तो शायर बन [...]

[ More ] April 8th, 2007 | 4 Comments | Posted in खालीपीली |

अलविदा हिंदी अलविदा ब्लोग

बहुत टाईम खोटी कर लिया इस लिखने पढने के चक्कर में, आज सोच लिया है कि बस अब और नही, और टाईम खोटी करने के लिये टाईम नही है। यहाँ तक की लाईनें १ अप्रैल को ध्यान में रख कर लिखी गयी थीं। इसलिये हिंदी के इस ब्लोग को विदा कर ही लेते हैं, आज [...]

[ More ] April 1st, 2007 | 5 Comments | Posted in खालीपीली |

प्रीटी वूमेन

प्रतीक तो समय नष्ट करने के साधन पेश करते ही रहते हैं, इस बार हमने सोचा क्यों ना हम भी ऐसा करके देखें लेकिन बिल्कुल निठल्ले चिंतन के अंदाज में। तो साहेबान आईये बालीवुड और हालीवुड दोनों जगहों की अदाकाराओं को एक नये अंदाज में देखिये।

नारद के लिये एक सुझाव

आजकल अपन लोगों की भी जनसंख्या काफी तेजी से बड रही है, पहले पन्ने पर जगह अब सिर्फ चन्द लम्हों के लिये ही नसीब होती है। लेकिन आजकल के ज्यादे चि्टठों की फिड में पोस्ट टाईटिल, चिट्ठाकार का नाम और ब्लाग के नाम के अतिरिक्त कुछ होता नही है यानि कि आप को पढने के [...]

[ More ] March 23rd, 2007 | 11 Comments | Posted in खालीपीली |

पत्रकार-रिपोर्टर और ब्रैकिंग न्यूज

आज ही अमित की ये वाली पोस्ट पढी और कुछ दिनों पहले स्वामी जी की ये वाली, और आज ही ब्रैक के दौरान आफिस में हमारे एक दोस्त ने पत्रकारों को लेकर ये बात बतायी तो सोचा लगे हाथ हम भी गंगा नहा लेते हैं। एक पत्रकार (रिपोर्टर) महोदय थे बहुत ही खरा खरा लिखने [...]

मेरे पांच जवाबः द लास्ट समुराई

मैथिली जी के पूछे गये पांच सवालों के जवाब। पांच सवाल रूपी टैग नामक योद्धा से अभी तक लगभग सभी चिट्ठाकार लोग भिड चुके हैं, हम शायद लास्ट समुराई ही होंगे। अगर आप लोग ये समझते हैं कि हमने हिन्दी में सक्रिय रूप से चिट्ठा लिखना अपने हिन्दी प्रेम की वजह से किया था तो [...]

[ More ] March 5th, 2007 | 13 Comments | Posted in खालीपीली |

आईना मुझसे पहली सी सुरत मांगे

जेड गूडी आजकल गुनगुना रही है, “आईना मुझसे मेरी पहली सी सुरत मांगे, मेरे अपने मेरे होने की निशानी मांगे” और उसी पहली सूरत को फिर से हासिल करने के लिये भारत आयी हुई है। नोटः ये अपनी छोटी सी पोस्ट नौ दो ग्यारह हुए आलोक को समर्पित, वैसे ये उनके हिसाब से शायद बडी [...]

[ More ] March 1st, 2007 | 7 Comments | Posted in खालीपीली |

हिंदी चिट्ठाजगत और २ बरस का सफर

वैसे तो ये पोस्ट हमें दो दिन बाद लिखनी चाहिये थी लेकिन हमें मालूम है कि आज नही लिख पाये तो फिर शायद ही इसका नंबर आयेगा। इसलिये आज को ही २६ तारीख समझ आप भी ये पोस्ट पढ लीजिये। कभी सोचा नही था कि टाईप कर कर के कुछ पोस्ट करने का सिलसिला यूँ [...]

[ More ] February 24th, 2007 | 11 Comments | Posted in खालीपीली |