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अपराध बोध

अध्याय १: भयानक रातें रात का अंधेरा चारों ओर फैला हुआ था, रात के सन्नाटे को चीरती किसी उल्लू की आवाज कभी-कभी सुनायी पड़ रही थी। दूर दूर तक कुछ नजर नही आ रहा था, अशोक के कदम बड़ी तेजी से घर की तरफ बढ़ रहे थे। अचानक आसमान में बड़ी तेजी से बिजली कड़की [...]

[ More ] January 12th, 2007 | 7 Comments | Posted in कथा कहानी |

बिखरती दुनिया

अरे नहीं जनाब, मुझमे वो कुव्‍वत कहाँ। मैं तो खुद अपनी ही किसी जद्दोजहद में उलझा हुआ था। टैम्‍पो रूका हुआ था, इशरत अली सोच रहा था ना जाने कहाँ से ये नामाकूल थानेदार आ टपका, उसने बाहर झांक के देखा दुकान पास पर ही थी, अली ने टैम्‍पो से उतरने में ही भलाई समझी। [...]

[ More ] June 13th, 2005 | Comments Off | Posted in कथा कहानी, खालीपीली |

मुंगेरी (एक कहानी) – ३

गतांक से आगे….. क्‍या करे क्‍या न करे मुगेरी की समझ नही आ रहा था, उसे यूँ बैठे हुए काफी देर हो गयी। अब तक रात का धुंधलका भी छाने लगा था। उसके पेट मे भूख से चूहे दौड़ने लगे, पास पर ही एक खाने का ठेली वाला नजर आया तो मुंगेरी उसी ओर चल [...]

[ More ] May 16th, 2005 | 2 Comments | Posted in कथा कहानी |

मुंगेरी (एक कहानी) – २

गतांक से आगे….. मुंगेरी बड़ा खुश था उसने दिल्‍ली जाने वाली ट्रैन जो पकड़ ली थी। लेकिन अन्‍दर से एक डर था मन मे, अन्‍जान शहर और वो कभी अकेला किसी शहर कभी गया भी नही था। एक गाँव से दुसरे गाँव यही एक सफर उसने अकेला किया था, उसमे भी अक्‍सर कोई यार-दोस्‍त साथ [...]

[ More ] April 23rd, 2005 | 5 Comments | Posted in कथा कहानी |

मुंगेरी (एक कहानी)

इन से मिलये, ये हैं मुंगेरी, वैसे तो इनका नाम बजरंगी है, लेकिन जब से ये सोते जागते सपने देखने लगे गांव वालो ने इनका नाम मुंगेरी रख दिया॥ बाप का क्या नाम है यह तो नही मालूम लेकिन गांव में सब उन्हें र्मिची सेठ कहके पुकारते हैं, सुना है ये पहले र्मिची बेचने का [...]