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अनुगूँज 21: चुटकुलों की गूँज

एक सोफ्टवेयर प्रोग्रामर मरने के बाद यमराज के पास पहुँचा, उसे बताया गया कि उसके कर्मो के आधार पर उसे ये च्वाइस दी जाती है कि वो स्वर्ग या नर्क में से एक चुन ले। उसने कहा कि वो पहले दोनो जगह देखना चाहेगा। उसे जब दोनो जगह दिखाई गयी तो उसने देखा कि नर्क [...]

[ More ] July 14th, 2006 | 3 Comments | Posted in अनुगूँज |

अनुगूँज 20: नेतागिरी, राजनीति और नेता

नेतागिरी, राजनीति और नेता पर कुछ कहने से पहले इनके पीछे छुपे अर्थ को जान लेते हैं। नेता यानि जिसमें नेतृत्‍व करने की क्षमता हो जो आगे आगे रहे और जनता पीचे पीछे। नेतागिरी यानि राजनीति से जुड़े लोगों द्वारा दादागिरी अर्थात अपनी पसंद की बात मनवाना। राजनीति यानि वो नीति जिसमें राज्‍य का फायदा [...]

[ More ] June 26th, 2006 | 2 Comments | Posted in अनुगूँज |

संस्कृतियाँ दो और आदमी एक

संस्कृतियाँ दो और आदमी एक, इसे अगर यहाँ अमेरिका में एक शब्‍द में या संक्षेप में कहना हो तो कहेंगे ए.बी.सी.डी. यानि की अमेरिकन बोर्न कंफ्‍यूज्‍ड देसी। जी हाँ, अपनी जवानी में अमेरिका आये लोगों की संतानें इसका सबसे बढ़िया उदाहरण है। अब घर में उन्‍हें माँ बाप भारत की संस्‍कृति सभ्‍यता सिखाने में लगे [...]

[ More ] May 21st, 2006 | 5 Comments | Posted in अनुगूँज |

धर्म बोले तो…….

इस बार काफी दिनों बाद अनुगूँज का आयोजन किया गया और इसकी गूँज इधर उधर सुनायी भी गई। इस बार का विषय है – मेरे जीवन में धर्म का महत्‍व। वैसे अगर देखा जाय तो हेमामालिनी जी भी काफी कुछ इसमें लिख सकती हैं लेकिन उनको कहे कौन। उनके धर्म पे ज्‍यादा जोर ना दे [...]

[ More ] April 3rd, 2006 | 11 Comments | Posted in अनुगूँज, धर्म |

हिन्दी सुभाषित सहस्र: १२वीं अनुगूँज

गागर में सागर भरने की कोशिश में अपनी तरफ से कुछ बुंदें – देर से ही सही पर बरसी तो। सफलता 1. हार का स्‍वाद मालूम हो तो जीत हमेशा मीठी लगती है – माल्‍कम फोर्बस 2. हम सफल होने को पैदा हुए हैं, फेल होने के लिये नही – हेनरी डेविड 3. पहाड़ की [...]

[ More ] September 3rd, 2005 | 1 Comment | Posted in अनुगूँज |

माजरा क्‍या है

पहले पढ़ सुन कर तो लगा इस बार बड़ा कॉमन सा विषय मिला है अनुगुँज के लिए, कॉमन इसलिए कह रहा हूँ क्‍योंकि ये ३ शब्‍द अक्‍सर लोगों के मुहँ से एक दूसरे को कहते हुए सुने जा सकते हैं। मसलन, “अरे मिंयाँ आज बड़े चहक रहे हो ‘माजरा क्‍या है’ और या फिर कभी [...]

[ More ] June 29th, 2005 | 2 Comments | Posted in अनुगूँज |

एक पाती प्रीटी वूमेन के नाम

10 वीं अनुगूँज का विषय रखा गया – “एक पाती ‘…’ के नाम”। अब पाती लिखे तो हमें जमाना बीत गया, ऊपर से समस्‍या थी कि पाती लिखे तो किस के नाम, और किस विषय को ले कर। याद आया कि विषय को लेकर थोड़ी छूट मिली हुई है पाती के लिए यूँ ही गप-सड़ाका [...]

आशा ही जीवन है

आशा ही जीवन है, सुनने मे बड़ा अच्‍छा लगता है लेकिन अगर देखा जाये तो अपने देश में क्‍या ये संभव है। क्‍योंकि आशा स्‍त्रीलिंग है, जीवन पुलिंग और अपने देश में आशा और जीवन के बीच कितना अन्‍तर है ये बताने की जरूरत नही है। जहाँ आशा को किसी श्राप से कम नही समझा [...]

[ More ] April 21st, 2005 | Comments Off | Posted in अनुगूँज, खबर गरमागरम |