अगर तुम ना होते
मैं इस नाम की फिल्म की बात नहीं करने जा रहा बल्िक एक काल्पनिक लेख की बात कर रहा हूँ। धार्मिक भावना वाले व्यक्ति को हो सकता है इसे पढ़ के ठेस पँहुचे (जिसका मेरा कतई इरादा नही है), इसलिये गुजारिश है कि वो इसे या तो ना पढें और या फिर निठल्ला चिंतन समझ [...]
कुछ बिखरे बिखरे शब्द
आजकल व्यस्तता कुछ ज्यादा ही है वक्त कब मुट्ठी में से रेत की तरह फिसल जाता है पता ही नही चलता। कुछ वैसे ही जैसे कभी-कभी पर्सनल पत्र चर्चा में आ जाते हैं या कब कैसे थूक मुँह से निकल किसी के चेहरे पर आ लगता है या २ साल का कोई बच्चा घर को [...]


