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घर की जोगन जोगनी आन गाँव की सिद्ध

November 20th, 2010 | 3 Comments | Posted in समाज और समस्‍या

इस पोस्ट को आगे बढ़ाने से पहले ये बेहतर होगा कि इस टाईटिल का मतलब समझ लिया जाय, जस्ट इन केस अगर किसी को समझ ना आये। दरअसल ये एक हिन्दी मुहावरा है ‘घर का जोगी जोगना आन गाँव का सिद्ध” चूँकि मैं बात महिला की करने वाला हूँ इसलिये जोगन जोगनी कर दिया, इसका मतलब होता है – A Wise (wo)Man to the rest of the world but a nobody at home. इस मुहावरे के मतलब को घर की मुर्गी दाल बराबर से भी कम्पेयर करके समझा जा सकता है।

बहराल, कुछ दिनों पहले खबरों में पढ़ा कि टेलीविजन के दो सीरियल ने लक्ष्मण रेखा पार कर डाली जिस कारण सरकार ने उनका समय प्राइम टाईम से हटाकर रात के ११ बजे करने का निर्णय लिया। सास-बहू के देश में ऐसा केसे केसे (कैसा समझा जाये) सोचते सोचते नजर गयी सीरियल के नाम में, एक का नाम था राखी का इंसाफ और दूसरा बिग बॉस।

बिग बॉस ३ के कुछ ऐपिसोड यू ट्यूब में देखे तो राखी के पारिवारिक समाचार मिले (यानि की अंदर की खबर), और फिर जब यू ट्यूब ये जानने के लिये खंगाला कि ऐसा क्या है जो देर रात खिसकाया जा रहा है। देख के अपने तो तोते उड़ गये, राखीजी दूसरों के झगड़े सुलझा रही थी, बिछड़े हुओं को मिलाने की कोशिश कर रही थी। जो खुद बिछड़ा हो, जिसकी खुद अनबन हो वो दूसरों के झगड़े सुलझाये, करमचंद बने, ज्ञान बाँटे तो कहना ही पड़ेगा ना – घर की जोगन जोगनी, आन गाँव की सिद्ध। पहले तो इसे बंद कर देना चाहिये लेकिन भाषा या विचारों की स्वतंत्रता (ऐसा ही कुछ था ना?) की दुहाई देकर ये चालू रहता है तो ये सीरियल ११ के बजाय १२ बजे करना चाहिये क्योंकि कुछ घरों में बच्चे देर से सोते हैं और टीवी-एमए यानि (TV-MA: TV for matured) व्यस्कों के लिये की रेटिंग के साथ दिखाना चाहिये।

यकीन नही होता कैसी कैसी गंद परोसी जा रही है प्राइम टाईम पर, जिस बुद्धू बॉक्स में आज से कुछ सालों पहले हम रामायण, महाभारत, दादा-दादी की कहानी, विक्रम बेताल, परमवीर चक्र, देख भाई देख, हम लोग, बुनियाद, नुक्कड़, भारत एक खोज, चाणक्य, ये जो है जिंदगी, मालगुड़ी डेज जैसे सीरियल देख के बड़े हुए उसमें इंसाफ और बॉस के नाम पर क्या क्या दिखाया जा रहा है। अब इनसे कौन क्या सीखेगा वो तो कुछ सालों में दिख ही जायेगा फिलहाल तो आप इस लिंक पर जाकर देखिये हमारे तोते क्यों उड़े, नेशनल टीवी में प्राईम टाईम में आने वाले सीरियल में ये देख जैरी स्प्रिंगर को भी कंपटीशन का खतरा मँडराने लगे।

वार्निंगः ये क्लिप सिर्फ और सिर्फ तभी देखिये जब कोई बच्चा आसपास ना हो
Warning: Watch it alone due to abusive language in the clip

ये कैसा इंसाफ

अब अगर आप मुम्बई में रहते हैं तो क्या बतायेंगे कि शिव सैनिकों ने राखी के इंसाफ को लेकर कुछ हल्ला मचाया कि नही या उनका विरोध सिर्फ पाकिस्तानी प्रतियोगियों तक ही सीमित था।

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3 Responses to “घर की जोगन जोगनी आन गाँव की सिद्ध”

  1. प्रवीण पाण्डेय Says:

    पता नहीं लोग ऐसे कार्यक्रम कैसे झेल लेते हैं।

  2. S.R.Ayyangar Says:

    How can an item number girl like Rakhi do justice with counselling others when her own house is in disarray.The programme is mediocre and does not deserve any prime time space. It is better to take out the slot rather than continue with the tamasha!

  3. Dr. monika sharma Says:

    yahi samasya hai…. soch kar sharm aur hansi aati hai ki Rakhi kya insaf karengi…. jinke khud ke jeevan ki koi aachar sanhita hi nahin hai….

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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