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जालिमों ने हमें भी नही बख्शा

October 27th, 2010 | 15 Comments | Posted in Announcement

जालिमों के जुल्म के आखिर हम भी शिकार हो ही गये, ट्रकों के पीछे सही लिखा रहता है – सावधानी हटी दुर्घटना घटी। पिछले १-२ सालों से पर्सनल और आफिस के कामों की व्यवस्तता ने दिमाग का दही करके रखा था जिस वजह से ब्लोगस से ध्यान बिल्कुल ही हटा हुआ था, नतीजा – अपनी सभी साईटस हैक हो गयी, वो तो भला हो इंटरनेट के नुक्कड़ में ब्लोगस की दुकानों के लिये जगह देने वाले का जिसने ये सब बताया और सभी ब्लोगस में ताला चढ़ा दिया वरना तो गुगल भी अपनी साईटस की ऐसी तैसी कर डालता।

सभी टैंम्पलेट्स के ऊपर किया सारा काम स्वाह हो गया, कभी भी टैंप्लेटस का बैकअप नही लेने की आदत का खामयाजा ये कि अब फिर से कुछ नया किया जायेगा। लेकिन भला हो उन जालिमों का जिनके कारण बाबा आदम (२.० के वक्त से चला आ रहा डेटाबेस और सोफ्टवेयर) के जमाने से उपयोग में ला रहे चीजों को अपग्रेड तो कर दिया वरना और ना जाने कब तक और यूँ ही चला करता।

आज ब्लोगस हैक होने के लगभग १ महीने बाद टाईम मिला इसे फिर से चालू करने का तो सोचा क्यों ना एक टेस्ट पोस्ट डाल दें आखिर टेस्ट पोस्ट तो बनती ही है।

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15 Responses to “जालिमों ने हमें भी नही बख्शा”

  1. Nishant Mishra Says:

    यह तो बहुत बुरा हुआ. उम्मीद है कि धीरे-धीरे ब्लौग पुरानी रौनक में आ जाएगा.
    लेकिन इन हैक करने वालों को इससे मिलता क्या है?
    मैं अपना ब्लौग wordpress.com पर खुद के डोमेन पर होस्ट कर रहा हूँ. मुझे कितना सावधान रहना चाहिए?

  2. समीर लाल Says:

    हे भगवान…टंटा छूट जाता तो ही ठीक..हम तो समझे थे कि अब नहीं लिखोगे. :) तुम तो फिर आ गये.

  3. भारतीय नागरिक Says:

    किट्टू साहब लिखते थे, इस शीर्षक से… हैकिंग खतरनाक बला है..

  4. arvind mishra Says:

    ये क्या हुआ ..कब हुआ ….च च च ….चलिए फिर शुरू कीजिये …याद है एडिसन का सारा कामकाज एक बार जल गया था !

  5. अनूप शुक्ल Says:

    अरे भाई जब आप लोगों के खाते उड़ाये जा सकते हैं तो किसी के भी उड़ाये जा सकते हैं। बधाई फ़िर से वापस आने की। :)

  6. Uselessly your's Says:


    ब्लॉगिंग, है वह फ़साना
    कि हैक हो कर भी… इसीके गीत गायेंगे

    हम भी भुगत रहे हैं, भाई जी
    दो पटरानियों को तो सँभाल लिया
    दो और भी है, उनको भी सहेज़ दें.. अब देखो

    कँगाल क्या जानें,
    यहाँ लुटाने को कुछ है, तभी तो
    हैक होने या हैक होते देना का मज़ा कुछ और ही है
    फिर से सँभालें, नये सिरे से सजायें, कुछ नया सीखें और सिखायें…आह क्या आनँद है,
    तुम हैक होती रहो.. मैं सजाता रहूँ… तो मज़ा ब्लॉगिंग का और भी आता है

    तो.. टेस्ट पोस्ट कैसी रही.. मज़ा आया ?

  7. dr anurag Says:

    ओर हम सोच रहे है के ये मुई कितनी व्यस्त्त्ताये है ….जो आदमी पढता भी नहीं है ……

  8. Tarun Says:

    निशांत, अपने कंट्रोल पैनल ब्लोग में वक्त मिलते ही एक पोस्ट लिखने की सोच रहा हूँ, उसका लिंक आपको भेज दूँगा। आप शायद पहली बार मेरे ब्लोग में आये हैं, शुक्रिया।

  9. Tarun Says:

    समीर जी, छुटती नही काफिर हाथों से लगी हुई

  10. Tarun Says:

    नागरिक जी, पधारने का शुक्रिया, बला का क्या, शिकार के लिये खतरनाक शिकारी के लिये मजेदार

  11. Tarun Says:

    अरविंद जी समझा, एडिसन के पड़ोस में रहने का खामयाजा है ये

  12. Tarun Says:

    अनूप जी, जब बड़ी बड़ी सरकारों और कंपनियों के खाते उड़ जाते हैं तो हम भला कहाँ के सिकन्दर

  13. Tarun Says:

    अमरजी, मजा आयेगा माजा के साथ ठंडा ठंडा कूल कूल

  14. Tarun Says:

    अनुराग कभी मिलना हुआ तो बतायेंगे व्यवस्तता की लिस्ट, आदमी कभी कभी पढ़ता तो है लेकिन कई कई दिन और हफ्ते गुजर जाने के बाद

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