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रस्सी जल गयी पर बल नही गया

पाकिस्तान के ऊपर ये कहावत बिल्कुल ठीक बैठती है, हाल ही में आयी बाढ़ ने पाकिस्तान के एक हिस्से का जन-जीवन तहस नहस कर दिया है। तकदीर के मारे उन लोगों को पाकिस्तान सरकार उतनी तेजी से जरूरत के हिसाब से राहत मुहया नही करा पा रही है, इसके बाद भी उस देश के हुकुमरानों के तेवर कुछ यूँ हैं -

Basit said India was formally notified that Pakistan would accept an earlier offer of $5 million through the United Nations — but not directly from India.

He said Pakistan did not accept the aid directly from India because “that is our government’s policy.” However, Basit said, Pakistan has received aid directly from other countries.

विनम्रता अच्छी बात है लेकिन जरूरत से ज्यादा विनम्रता को कमजोरी समझा जाता है, ये बात इन नेताओं को को जितनी जल्दी समझ आ जाये उतना अच्छाकमाल की ऐंठ है, ऊपर से भारत के उन ४०० डाक्टरों की एंट्री पर भी राजनीति जो तकदीर के मारों की मदद के लिये तैयार हैं उस देश में जाने के लिये जिस के ऊपर बार बार आतंकवादियों की मदद की तोहमत लगती रहती है (मुम्बई हादसा के जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने के लिये राजनीति की खींचातानी अब कोई छुपी नही है)।

पाकिस्तान की बाढ़ के कुछ चित्र यहाँ और यहाँ देखे जा सकते हैं।

ये तो एक दूसरे देश की बात है इसलिये हमारी समझ ना आये मुमकिन है लेकिन अपनी ये समझ नही आता कि भारत के हुकुमरानों के पेट में ऐसी कौन सी मरोड़ उठ रही है जो मदद देने के लिये जबरदस्ती कर रहे हैं

खुले में पड़ा पड़ा अनाज सड़े जा रहा है, ये नही कि उन्हें अपने देश के गरीबों में बाँटने का इंतजाम किया जाये लेकिन नही दूसरे की फटी में टाँग अड़ाने में लगे हैं। विनम्रता अच्छी बात है लेकिन जरूरत से ज्यादा विनम्रता को कमजोरी समझा जाता है, ये बात इन नेताओं को को जितनी जल्दी समझ आ जाये उतना अच्छा।

एक दूसरे न्यूज आर्टिकिल में, कुछ यूँ पढ़ने को मिला -

Despite all this, India has gone ahead and announced an additional aid of $20 million (Rs94 crore) for Pakistan. Does our neighbour deserve such consideration from India?

क्या आप भी ऐसा सोचते हैं कि हमारा पड़ोसी देश ये मदद डिसर्व नही करता? या फिर आपको लगता है ये कैच ट्वेंटी टू जैसी स्थिति है?

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8 Responses to “रस्सी जल गयी पर बल नही गया”

  1. समीर लाल Says:

    कैस २२ ही है महाराज!

  2. बलखाती इठलाती रस्सी Says:

    Pakistan would accept an earlier offer of $5 million through the United Nations — but not directly from India.
    आप इसमें पाकिस्तान के दक्षिणा के द्रव्य पर गँगाजल के छींटे देकर स्वीकार करने का ब्राम्हणत्व क्यों नहीं देखते, बाऊ ?
    भूल गये क्या.. ” और कुछ करो तो करो, लेकिन आज मुँह मत चूमना मुसली दाज़्यू, आज एकादशी है । ”

    Does our neighbour deserve such consideration from India ?
    लो कल्लो बात, क्या हम यह भी भूल जायें कि, हम उस महान प्राचीन सँस्कृति की धरोहर हैं, जो अपने जाँघ की माँस देकर बाज़ को खिला देता है.. नारायण नारायण !

    भारत के हुकुमरानों के पेट में ऐसी कौन सी मरोड़ उठ रही है जो मदद देने के लिये जबरदस्ती कर रहे हैं ।
    पब्लिक दैट इज़ जनता के पैसे के बल पर अपनी मूँछों पर घी चुपड़ने की ज़मीन्दारी सरकार को हमीं ने सौपी, और हम ही बगावत कर दें ? यह तो बड़ा दोगला चरित्र होगा ।

  3. राज भटिया Says:

    इसे कहते है दिखावा, जो हमारे महान नेता कर रहे है, घर मै लोग भुखे मर रहे है ओर यह चले राजा भोज बनाने.
    जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें।

  4. प्रवीण पाण्डेय Says:

    क्या कर सकते हैं?

  5. Abhishek Says:

    अब क्या किया जा सकता है मुसीबत में पड़े लोगों की मदद करनी ही चाहिए. अब उन्हें समझ नहीं तो हम क्या करें !

  6. अनूप शुक्ल Says:

    जय हो। बहुत चौकस समझाइस है।

  7. hempandey Says:

    हमारी सरकार हर हालत में स्वयं को अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी के सामने खुले दिल का साबित करना चाहती है, इसमें वह कहाँ तक सफल हुई है यह विश्लेषण का विषय है |

  8. ePandit Says:

    अपने यहाँ गरीब भुखमरी से मर रहे हैं और सरकार दूसरों को (वो भी अपना खून बहाने वालों को) दान देने को मरी जा रही है। ये तो वही बात हुयी “घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने”।

    महात्मा गाँधी ने ५५ करोड़ की राशि पाकिस्तान को दिलवाकर जो गलत परम्परा शुरु की थी आज हमारे नेता उसी पर चल रहे हैं।

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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