< Browse > Home / sports, खेल खिलाड़ी / Blog article: मुक्केबाज हो तो मेरी जैसी

| Mobile | RSS

मुक्केबाज हो तो मेरी जैसी

September 20th, 2010 | 2 Comments | Posted in sports, खेल खिलाड़ी

भारत में क्रिकेट के अलावा बाकि खेलों की दशा दिनप्रतिदिन दयनीय होती जा रही है, ऐसे में १-२ प्रतिभायें हैं जो आशा की किरण बन कर हल्की सी उम्मीद को जिंदा रखती है। इन्हीं में से एक हैं महिला मुक्केबाज एम सी मेरी कॉम (M C Mary Kom) जिन्होंने विश्व मुक्केबाजी में लगातार पाँचवी बार खिताब जीतकर एक ऐतिहासिक विजय प्राप्त की

The former Khel Ratna awardee from Manipur thus remained the only boxer to have won a medal in each edition of the World Championship.

मुझे अब ये जानने में जरूर उत्सुकता रहेगी कि उनकी इस उपलब्धि को कितना पुरस्कृत किया जाता है नेताओं तथा अन्य उन लोगों के द्वारा जो भारतीय क्रिकेट टीम के ४-५ सालों में कोई एक क्षेत्रीय या अन्य चैंपयनशिप जीतने पर धन वर्षा करने से पीछे नही रहते।

मेरी के केस में ज्यादा इसलिये भी उत्सुकता है क्योंकि खेलों और खेल प्रतिभावों के साथ भेदभाव करने के कई कारणों में से दो मुख्य कारण मुझे उनमें दिखते हैं। कारण नंबर १, वो पुरूष नही बल्कि महिला मुक्केबाज हैं जब महिला और पुरूष क्रिकेट टीम में ही काफी अंतर किया जाता है तो ये तो मुक्केबाजी है। कारण नंबर २, वो देश के उस हिस्से से आती है जो भारत का हिस्सा तो है लेकिन सरकार और नेताओं के बर्ताव में ऐसा दिखता नही यानि मणिपुर।

अगर भारत, भारतीय नेता और खेल संस्थायें (जैसे बीसीसीआइ, जो पैसे को दबाकर बैठी रहती है यहाँ तक कि क्रिकेट के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी खर्च नही करती बाकि तो वैसे भी पदाधिकारियों के चलते ठन ठन गोपाल हैं) अभी भी नही चेतती तो भले ही भारत ईकॉनोमी में नंबर १ क्यों ना हो जाये खेलों में कभी भी सुपर पॉवर नही बन पायेगा।

मेरी तुम्हें बहुत बहुत बधाई, तुम पर हमें गर्व है, यू आर द बेस्ट।

Leave a Reply 7,457 views |
Follow Discussion

2 Responses to “मुक्केबाज हो तो मेरी जैसी”

  1. अनूप शुक्ल Says:

    मुक्केबाज मेरी वाकई में काबिले तारीफ़ हैं। महान हैं। सबसे अच्छी हैं!

  2. ashok pandey Says:

    एमसी मेरी कॉम की उपलब्धियां वाकई महत्‍वपूर्ण है। लेकिन राजनीति का बाजार और बाजार की राजनीति के लिए शायद फायदेमंद नहीं।

    आपके विचारों से पूर्ण सहमति है।

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

टिप्पणियों का शटर नयी पोस्ट पब्लिश करने के बाद कुछ दिनों ही खुला रहता है। पुरानी पोस्टस में आने वाले स्पॉम टिप्पणियों के मद्देनजर यह निर्णय लेना पड़ा, असुविधा के लिये खेद है। आप को अगर ये ब्लोग और इसमें लिखी पोस्ट पसंद आती हैं तो आप इसे सब्सक्राइब करके भी पढ़ सकते हैं, धन्यवाद।