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ढोल ज्यादा शोर करता है या मीडिया

मेरा मानना है कि वाधयंत्रों (music instruments) में ढोल (या नगाड़ा) सबसे ज्यादा बेसुरा यंत्र है, इसके दो कारण हैं – एक, हल्के सी थाप देने में भी ये जोर की आवाज करता है और दूसरा हर कोई ऐरा-गैरा इस बजाता हुआ मिल जाता है। हो सकता है आपको मेरी बात से इत्तेफाक ना हो क्योंकि ऐसा सिर्फ मेरी नजर में है।

अभी कोई २ महीने पहले अपने पहाड़ी दोस्तों के साथ कैंपिंग के दौरान मुझे पता चला था कि धोनी शादी कर रहा है, किससे कर रहा है, कैसे मिले, कब कर रहा है वगैराह वगैरह। और फिर धोनी की शादी भी हो गयी, उसके बाद जो मीडिया ने ढोल बजाया है उसके बाद ही ये सवाल मेरे मन में उठा कि ढोल ज्यादा शोर करता है या मीडिया।

कहानी बनाने में मीडिया का कोई सानी नही उसे अपने मन से कहानी गढ़ने में वो ही महारत है जैसे इस बच्चे को -

टीचर ने क्लास में एक सवाल पूछा, डोनाल्ड वॉटर का रासायनिक सूत्र (chemical formula) बताओ?
डोनाल्डः H I J K L M N O
टीचरः क्या बक रहे हो?
डोनाल्डः कल ही तो आपने बताया था कि वॉटर का सूत्र है H to O

यानि कि मीडिया को H और O का पता होता है और बाकि अफसाना। यही नही कई बार तो आपने ध्यान दिया होगा कि कुछ खबरें और बातें तो सिर्फ किसी एक विशेष चैनल वालों को ही पता होती है। वैसे ही जैसे इस बच्चे की कहानी -

टीचरः मारिया, मानचित्र (Map) में जाकर बताओ नार्थ अमेरिका कहाँ पर है?
मारियाः ये रहा, यहाँ पर।
टीचरः बिल्कुल सही, अब क्लास तुम ये बताओ अमेरिका की खोज किसने की?
क्लास (एक स्वर में): मारिया ने।

तो जनाब ये होती है एक्सक्लूसिव खबर। एक बात और याद आती है, आपने देखा होगा कई रिपोर्टर (और खबरें बोलने वाले) बातों को, खबरों को चिल्ला चिल्ला कर बतातें हैं। अगर आप अभी तक समझ नही पायें है वो ऐसा क्यों करते हैं, तो इस बच्चे की बात को सुनिये, शायद कुछ समझ में आ जाये -

टीचरः ग्लेन, बताओ तुम Crocodile को कैसे स्पेल करोगे?
ग्लेनः K-R-O-K-O-D-I-A-L
टीचरः नही, ये बिल्कुल गलत है।
ग्लेनः हो सकता है ये गलत हो लेकिन आपने पूछा था कि मैं कैसे स्पेल करूँगा?

यही बात खबरों को पढ़ने और बताने के संदर्भ में भी समझी जा सकती है। मीडिया से ज्यादा पंगा भी नही लिया जा सकता, देखा ही होगा कोई ज्यादा पंगे लेता भी नही है। कारण है मीडिया के हाथ में संचार तंत्र की ताकत होना। हाथ में ताकत होने से मुझे एक और बच्चे की बात याद आ रही है -

टीचरः क्या तुम जानते हो जार्ज वाशिंगटन ने अपने पिता के चेरी के पेड़ को सिर्फ काटा ही नही बल्कि इस बात को स्वीकार भी किया। अब लुईस, तुम ये बताओ कि उसके पिता ने उसे कोई सजा क्यों नही दी?
लुईसः सिपंल, क्योंकि जार्ज के हाथ में अभी तक वो कुल्हाड़ी थी जिससे उसने पेड़ को काटा था।

ये होता है हाथ की ताकत का कमाल। पहले मुझे ताज्जुब होता था कि ज्यादातर मीडिया चैनल वाले एक ही बात को यानि एक ही खबर को एक ही तरीके से बार बार क्यों दिखाते हैं लेकिन इस बच्चे से मिलने के बात कोई ताज्जुब नही होता -

टीचरः क्लाईड, ‘मेरे कुत्ते’ के ऊपर तुम्हारा लिखा कंपोजिसन तुम्हारे भाई से हूबहू मिलता जुलता है, सच सच बताओ, क्या तुमने उससे कॉपी किया है?
क्लाईडः नही सर, बिल्कुल नही लेकिन वो एक ही कुत्ता है (it’s the same dog), जिसके ऊपर हमने लिखा।

इतना सब होने के बाद भी मैं अभी भी इसी सोच में हूँ ज्यादा शोर कौन करता है, ढोल या मीडिया?

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6 Responses to “ढोल ज्यादा शोर करता है या मीडिया”

  1. डैमफूल Says:

    चर्चा पर दी टिप्पणी में से कुछ जुगाड़ अपने लिये भी निकाल लीजियेगा ।
    डरिये नहीं, मीडिया वालों को नहीं बताऊँगा ।

  2. अनूप शुक्ल Says:

    बहुत खूब! काश मीडिया वाले तुम्हारी ये पोस्ट पढ़ते!

  3. समीर लाल Says:

    बहुत सही और मजेदार!

  4. ajit gupta Says:

    बहुत ही सटीक और रुचिकर पोस्‍ट है। आपका लेखन बहुत अच्‍छा है लेकिन पाठक कम लग रहे हैं। आपके विचारों को स्‍थान मिलना ही चाहिए इस‍के लिए कुछ परिश्रम करें और अन्‍य ब्‍लाग पर जाकर अपनी श्रेष्‍ठ टिप्‍पणी भी दें। एक बार आपके बारे में जानकारी होने पर स्‍वत: ही आपके पाठक बढ़ जाएंगे। नहीं तो इतना श्रेष्‍ठ लिखने के बाद भी अन्‍य लोग इस रचना से वंचित रह जाएंगे।

  5. राज भाटिया Says:

    इन मिडिया वालो को लगता है की जनता पागल है, ओर जो यह बकवास करते रहे गे जनता चुप चाप सुनती रहेगी, लेकिन सब से बडे यह मिडिया वाले बेवकुफ़ है… जो बिन सिर पेर की खबरे दे रहे है, कल अपनी अम्मा की शादी भी दिखा देगे…. अपनी टी आर पी के लिये

  6. अतुल शर्मा Says:

    ये बच्चे तो अद्भुत हैं :-)

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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