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आया है मुझे फिर याद वो जालिम

August 13th, 2009 | 7 Comments | Posted in old days of childhood, खालीपीली

अभी कुछ दिनों पहले मैं लाइब्रेरी गया था अपने बेटे के लिये कुछ कॉमिक्स लेने, ना जाने कितने सालों बाद फिर से कॉमिक्स की शक्लें देखीं। इनमें से एक थी अवतार जो कि एशियन करेक्टर पर बनी कहानी है जो कि भारतीय मूल के एम नाइट श्यामलन की अगली फिल्म की विषय वस्तु भी है। हालांकि उनकी इस फिल्म को लेकर एशिया मूल के लोगों ने यहाँ कुछ विरोध किया था क्योंकि इसमें फायर देश जो कि बुरा देश है उसके नागरिकों एशियाई दिखाया है (स्लम डॉग मिलेनियर फेम देव पटेल) और जो कि एशियाई अवतार है वो वेस्टर्न है।

तो मैं कह रहा था कि उन कॉमिक्स को देख मुझे अपने बचपन के दिन याद आ गये, वो ही बेताल, बहादुर, बेला, फैंटम, फ्लैश गार्डन, मैंड्रेक, लोथार, अमर चित्र कथा, चाचा चौधरी, बिल्लू, राजन इकबाल, आशु बंटी निशा, लोट-पोट, डा झटका, मोटू पतलू, पिंकी, आर्ची, टिनटिन (टिनटिन तो यहाँ लाइब्रेरी में मिल गयी तो लाया हूँ फिर से) और ना जाने क्या क्या। नीचे ये चित्र देखिये और बताईये आप को कुछ याद आया क्या?

आया है मुझे फिर याद वो जालिम गुजरा जमाना बचपन का

अवतार (Avatar: The Last Airbender) के बारे में आप ज्यादा जानकारी यहाँ प्राप्त कर सकते हैं।

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7 Responses to “आया है मुझे फिर याद वो जालिम”

  1. बी एस पाबला Says:

    बहुत कुछ याद आया

  2. अनूप शुक्ल Says:

    हमें भी याद आया जी!

  3. रहग़ुज़र Says:


    आपने ऎसा याद दिलाया, जोशी दाज्यू.. कि अब दो तीन दिनो तक इनकी खोज कबाड़ी बाजार में चलती रहेंगी ।
    70 नये पैसे ( उनदिनों ऎसा ही बोला जाता था ) का जुगाड़ हमेशा जेब में मौज़ूद रहा करता था कि, कब नया इंद्रज़ाल आ जाये और हम लपक कर सबसे पहले पढ़ लेने वाले हीरो बन जायें । उसकी प्रति दूर से दिखा मित्रों को ललचा अपना रुका हुआ काम निकलवा लें । मुद्रा विनियम तब न जानता था, हमारे लिये तो कामिक्स विनियम ही सर्वश्रेष्ठ सौदा हुआ करता था । अब आप बताइये कि, आपको याद आया कुछ ?

  4. anita kumar Says:

    आप ने याद दिलाया तो मुझे याद आया कि मेरे भी दिल पे पड़ा था कभी इनका साया…॥:)

    बेताल और मैंड्रक मेरे फ़ेवरेट थे/हैं

  5. sanjupahari Says:

    arey sab kuch saaf saaf yaad aaa raha hai…..sabse last shayad maine padi thi “NAGRAAJ AUR JAIKAL KA AAATANK”….abhi bhi muzhey mile to firse padna shuru kar sakta hu…per aapne jo yaad dilayee hai…waah waah waah waah…
    yaar kisi library main CHACHA CHAUDHARI aur SABU ki koi mile to le aana mere liye bhi :)

  6. Gyan Dutt Pandey Says:

    क्या दिन थे वो!

  7. Mridula Says:

    I have read so many of them :D

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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