फिल्म समीक्षाः Ice Age 3 - Dawn of the Dinosaurs
सिड, मेनी और डियेगो आर बैक इन आइस ऐज ३ एंड दिस टाईम बिगर एंड बैटर, बिगर बोले तो डायनासोर और बैटर बोले तो एनीमेशन। आइस ऐज का थर्ड वर्जन दूसरे वर्जन से बेहतर है स्टोरी आयडिया में भी और ग्राफिक्स में भी। साथ ही साथ बोनस के रूप में ये थ्री-डी वर्जन में भी रीलिज की गयी है। आपके आसपास अगर ये थ्री-डी में भी रीलिज हुई है तो मैं थ्री-डी वर्जन के लिये रिकमंड करूँगा।
इस फिल्म में एक नये पात्र “बक” को इंट्रोड्यूस किया है जिसे आप डायनासोर के जंगल का टार्जन समझ सकते हैं। कहानी कुछ यूँ है कि मेनी बाप बनने वाला है यानि उसकी फैमली लाईफ शुरू होने वाली है इसी वजह से डियेगो अपने को अकेला समझ इनसे दूर जाने की सोच लेता है। सिड को भी यही लगता है फिर एक दिन आइस केव में भटकते हुए उसे ३ बड़े अंडे मिलते हैं वो तीनों को अपने साथ ले आता है जिससे उसकी भी फैमली शुरू हो। अगले दिन उन तीनों अंडों में से निकलते हैं तीन नन्हें डायनासोर। लेकिन तभी उन नन्हें डायनासोर की असली माँ उन्हें ढूँढते हुए आ जाती है। बच्चे डायनासोर माँ को पहचानते नहीं और सिड डायनासोर और बच्चों के सामने खड़ा हो जाता है कुछ इस तरह का कहता हुआ - “बच्चे लेने के लिये तुम्हें मेरी लाश से गुजरना होगा”। जब डायनासोर के बच्चे सिड को बचाने के लिये उसके ही विरूद्ध खड़े होते हैं तो डायनासोर चारों को (सिड और तीनों बच्चे) अपने मुँह से पकड़ अपने जंगल में चला जाता है।

सिड को बचाने के लिये मेनी तैयार नही होता लेकिन जब उसकी खुद की बीबी गर्भवती होने के बावजूद सिड को बचाने चल पड़ती है तो मेनी को मन मारकर जाना ही पड़ता है, साथ ही डियेगो भी सिड को बचाने चल पड़ता है। यहाँ से शुरू होता है असली एडवेंचर, कैसे और
कितने जतन से वो सिड को बचाते हैं साथ ही कुछ खतरनाक भूखे डायनासोरों के बीच किस तरह से जन्म रहे बच्चे को बचाते हैं (बच्चे का नाम रखा जाता है पीच जो कि इनका कोड वर्ड होता है ये बताने का कि बच्चे के आने का टाईम आ गया है)। इस लड़ाई में उनका साथ देता है “बक”।
सिनेमा हाल बच्चों से भरा था और बच्चे काफी ठहाके भी लगा रहे थे जाहिर है कि उन्हें ये फिल्म पसंद आयी। अगर आपके भी बच्चे हैं तो इन गर्मियों की छुट्टियों में उन्हें ये फिल्म दिखाने जरूर ले जायें वो तो मजे करेंगे ही और आपका दिल अभी तक खूसट नही हो पाया है तो आप भी मजे करेंगे वैसे ही जैसे मुझे खूब मजा आया। थ्री-डी में इस फिल्म को देखने का मजा ही कुछ अलग था।
मेरा वोट मेरी राय: 




बारिश की जगह अगर खाना बरसने लगे तो
कभी आपने सोचा है कि अगर ऐसा हो जाये यानि बादलों से पानी की जगह खाना बरसने लगे, कभी बर्गर कभी पिज्जा कभी कुछ। अगर आप भी ये सब देखना चाहते हैं और इसका अंजाम भी तो इसी स्टोरी लाईन पर अगली थ्री-डी फिल्म आ रही है अगले कुछ हफ्तों बाद देखना ना भूलें।












This post has 9 comments
July 6th, 2009
बहुत अच्छी फिल्म है
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चर्चा । Discuss INDIA
July 6th, 2009
मेरा छुटकू बीमार है तरुण जी .वर्ना कल मुझे उसे यही दिखाने जाना था …..इसके पहले दोनों पार्ट मेरे पास घर में अब भी है…
July 6th, 2009
बहुत सुंदर धन्यवाद
July 6th, 2009
nice picture
July 6th, 2009
हम तो खुद ही बच्चे हैं ऐसी फिल्मों के लिए. जल्दी ही देखते हैं
July 6th, 2009
इसी चक्कर में हमें भी पता लगा जाता है.
July 7th, 2009
जानकारी मिली, धन्यवाद.
July 7th, 2009
अच्छी समीक्षा।
August 9th, 2009
Ah I don’t even know if this came to India and gone or not
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