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एक टिप्पणी गलत पड़ी थी कुछ नये हिंदी ब्लोगस में

June 5th, 2009 | 27 Comments | Posted in बस यूँ ही

एक परेशान दिल से निकली आह की कराह जानकर बतायें आप किस जमात में शामिल है, सताये हुए की या सताने वाले की। आजकल जिंदगी बहुत व्यस्त चल रही है, कई कई दिनों तक ब्लोगिंग में उपयोग लायी ई-मेल चैक नही हो पाती और आज जब थोड़ा फुरसत में चैक की तो देखकर दिल से यही निकला -

एक टिप्पणी गलत पड़ी थी कुछ नये हिंदी ब्लोगस में
उनकी पोस्ट के लिंक फिर ईमेल में स्पैम की तरह आते रहे

फिलहाल तो बिना पढ़ी ईमेल का आंकड़ा १०० की संख्या छू रहा है पार कर गया है, आपके सामने रोना जरूर रो रहे हैं लेकिन अपने ईन-बॉक्स की इस हालात के हम खुद जिम्मेदार हैं। कालांतर में जब नये हिंदी ब्लोग आ रहे थे और हम फुरसत में हुआ करते थे तो प्रोत्साहन की गरज से उनके ब्लोग में टिप्पणियाँ कर आते थे। ये अलग बात है कि उनमें से ज्यादातर ने निठल्ले के चिंतन को जानने की कोई जरूरत नही समझी और बदले में टिप्पणी ना मिलने पर हम ये समझाते रहे चलो अच्छा हुआ डाटॉबेस में कुछ तो जगह बची। तब नही सोचा था कि हमारी भलमनसाहत हमारी ही ईमेल के ईनबॉक्स को ले डूबेगी

सबसे पहले जिसने पीठ में लात मारी उसने अपनी किसी पोस्ट का लिंक हमारे ईमेल को इस तरह से यूज करके भेजा जैसे किसी न्यूड बीच में लोग घूमा करते हैं यानि कि सौ और लोगों को हमारा ईमेल एड्रैस मिल गया। उसके बाद धीरे धीरे कुछ इस तरह से ईमेल आने लगी – “एक विशेष नयी पोस्ट कल सुबह के लिये लगा के रखी है, जरूर आइये” और उसके अगले दिन ईमेल आती है “वो विशेष पोस्ट जो कल लगा के रखी थी पब्लिश हो गयी है और आपकी बाट जोह रही है“। जहाँ कुछ लोग सीधे लिंक थमा के भेज देते हैं वहीं कुछ थोड़ा सजा के यानि टेक्सट को हाइपर लिंक लगा के जैसे टेक्सट होगा “छप्पन छुरी की तिरछी नजर” और उस पर लिंक लगा होगा।

अब तो कई ऐसे लोग भी अपनी नयी पोस्ट के लिंक भेजने लगे हैं जिनका नाम भी पहली बार सुन रहे हैं। लिंक देखकर दिल से यही निकल रहा है, आप भी क्यों हिंदी ब्लोगर हो गये? यही नही कुछ लोग तो खुद का ही ब्लोग फोलो करके फिर उस ब्लोग को फोलो करने के लिये भी लिंक भेजने लगे हैं, उस लिंक पर क्लिक किया नही कि आपकी तस्वीर उनके यहाँ दिवार पर शोभा बढ़ाने लगेगी।

हमारी ईमेल का नाम तो पड़ोस के घर से भागे किसी नवयुवक के नाम जैसा बदनाम हो गया है, ना जाने कहाँ कहाँ किस किस की जुबाँ पर चढ़ गया है। सिर्फ ब्लोग ही नही कभी कुछ आता है तो कभी कुछ, अभी कुछ देर पहले ही एक ईमेल आयी जिसके सब्जेक्ट में लिखा है – कैटरीना मस्ट गैट इनटू बिकनी। अब बिकनी में घूमे या बिनाकनी के, कोई हमारे तुम्हारे सामने तो टहल नही रही है जो मेल लिखकर खाना खराब कर रहे हो। शुरू शुरू में ऐसी ईमेल के लिये फिल्टर लगा देते थे अब लगता है अगर ऐसे ही लगाते रहे तो हमारा ईनबॉक्स फिल्टरबॉक्स बन जायेगा।

और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सब लोग कभी हमारी गली आकर झांकते नही, ऐसा ही चलता रहा तो कहीं हालात इस कदर ना बिगड़ जायें कि हमें हिंदी ब्लोगस की दुनिया को कहना पड़े –

तेरी दुनिया से हो के मजबूर चला,
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला।
इस कदर दूर कि फिर लौट के भी आ ना सकूँ,
अपने नये ईमेल का पता किसी को भी बता ना सकूँ
और ब्लोगिंग होती है क्या जिंदगी में कभी दोहरा ना सकूँ,
तेरी दुनिया से….

अच्छा तो हालात के सताये इस ब्लोगर की कराह सुनकर आप भी अपना हाले दिल बताते चलें –

क्या आप भी इस कदर सताये हुए हैं?
या किसी को इस कदर सता कर इसे पढ़ने यहाँ आये हुए हैं।

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Follow Discussion

27 Responses to “एक टिप्पणी गलत पड़ी थी कुछ नये हिंदी ब्लोगस में”

  1. रवि Says:

    पोस्ट दो बार प्रकाशित दिख रही है?

    इधर एक दर्द और है. लोग बाग अपने ब्लॉग को हमारे ईमेल से सब्सक्राइब कर देते हैं जबरन और जब भी उनकी पोस्ट आती है, हमारे इनबाक्स में द्न्न से. अब भई उन्हें कैसे बताएं कि हमें भी अपना लिखा दूसरों को पढ़वाने का शौक है, बजाय पढ़ने के….

  2. Vineeta Yashswi Says:

    Is pareshani se to mai bhi bahut pareshaan hu…pata nahi kaun kaun aake apne post bhej raha hai…

    bahut se to aise bhi hai jo facebook pe apni photo dekhne ki liye bhi kah dete hai…aur bhi jane kya kya…

    mera haal to ye hai ki kai baar mai kaam ke mail bhi miss kar jati hu…

  3. Ratan Singh Says:

    इस परेशानी से तो लगभग सभी लोग परेशान है |

  4. RAJ SINH Says:

    गुरु अभी से घबरा गए ……?
    अभी साबुन तेल बेचनेवाले तो पहुंचे ही नहीं .:)

  5. Tasliim Says:

    अजी, सभी इस गम के सताए हुए हैं।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  6. हिमांशु Says:

    हाल तो हम सबका यही है । धन्यवाद ।

  7. amit Says:

    अपन तो इस मामले से पहले काफ़ी टैम से परेशान हैं, साल भर पहले ठेले थे इस पर। इस मामले में अपनी एक सीधी साधी पॉलिसी है, यदि कोई परिचित ऐसी ईमेल भेजता है बारंबार तो उसको एक बार ईमेल द्वारा मना कर देता हूँ कि पुनः ऐसी ईमेल न भेजे, मुझे ब्लॉग पढ़ना होगा तो मैं फीड सब्स्क्राईब कर लूँगा। बहुत से परिचित एक ही बार में मान जाते हैं। जो नहीं मानते तो फिर उनकी ईमेलों को 1-2 बार स्पैम मार्क करना पड़ता है और उसके बाद अपनी जान छूट जाती है और उनकी प्रत्येक ईमेल स्पैम में चली जाती है। जो लोग परिचित नहीं होते उनको तो एक अवसर भी नहीं देता, पहली ईमेल से ही स्पैम में डाल देता हूँ और फिर भविष्य में उनकी ईमेल स्पैम में ही जाती हैं सीधी।

    आप भी कुछ ऐसी ही पॉलिसी रखो अपने इनबॉक्स के लिए, शिष्टाचार अशिष्ट लोगों के साथ नहीं बरता जाता!! :)

  8. dr.anurag Says:

    सारे ज़माने का दर्द है भाई….

  9. ताऊ रामपुरिया Says:

    भाई आपका दुख हमारा दुख. हम भी दुखी आपभी दुखी.

    जब इतना परेशान थे तो ताऊ को एक मेल तो कर ही सकते थे? तो ठीक है.

    हम ऐसा करते हैं कि हमारा ब्लाग का इमेल अलग और रोजी रोटी सेट करने का अलग… अब असली वाला तो हम खुद ही नही जानते कि क्या है? तो किसी दुसरे को तो पता चलने से रहा…

    ब्लाग के इमेल पर जो इस तरह ललचाकर धमकाकर पढवाने की मेल भेजता है उसे सीधे स्पेमनगर का रास्ता दिखा देते हैं और भूले से भी इन लिंकों की पोस्ट पर नही टिपियाते. अगर एक बार ये गलती करली तो हमेशा करते रहेंगे.

    अब आप भी ऐसा ही कर सकते हैं और नही तो ताऊ का लठ्ठ पकडिये और आप भि उनको डबल सजा इसी रुप मे दे दिजिये.:)

    रामराम.

  10. Abhishek Ojha Says:

    जब तक जीमेल था तब तक तो ठीक था. स्पैम फोल्डर में डाल देते थे. लेकिन किसी महानुभाव ने ऑफिस की ईमेल आईडी को भी नहीं छोडा तो बहुत गुस्सा आया. हमने तुरत ईमेल भेजा कि कम से कम इस आईडी को तो हटा दो. बदले में उधर से दन्न से दो और ईमेल दाग दिए उन्होंने ! अब क्या करें इनका.
    मैं तो बस ऐसे ब्लोग्स को इग्नोर करता हूँ. भले ही कितना अच्छा ब्लॉग हो ! पर मेरे इग्नोर करने से क्या हो जाएगा :(

  11. Prashant (PD) Says:

    Same problem Boss..
    Apan bhi ek post likh chuke hain is par.. :(

  12. अविनाश वाचस्‍पति Says:

    वैसे इंतजार करो उस दिन का
    जिस दिन ऐसी ई मेल पर
    करने से क्लिक पायेंगे ढेर नोट।

    जैसे ये आती हैं
    वैसी ही ईनाम वाली भी आती हैं
    खूब इनाम बंट रहे हैं चारों ओर
    बंट तो लैपटाप भी रहे हैं
    लेने वाला चाहिए।

  13. अविनाश वाचस्‍पति Says:

    परेशानी को समझो आन बान और शान
    तभी बनोगे बंधुआ हिंदी ब्‍लॉगर महान

  14. Lovely Says:

    सबकी यही समस्या है ..मैं स्पेम मार्क कर देती हूँ अक्सर

  15. Ranjan Says:

    ऎसी मेल से अक्सर सामना हो जाता है.. पर मैं तो प्रेम भाव से इग्नोर कर देते हैं….

  16. cmpershad Says:

    भैया, सीधा सरल सा उपाय है डिलीट कर दीजिए। आखिर मेल ही तो है कोई फ़ीमेल नहीं:)

  17. ghughutibasuti Says:

    जो मुझे अपना ब्लौग पढ्वाना चाहते हैं उनकी बात तो समझ सकती हूँ किन्तु जो अपना फ़ोटो दिखाना चाहते हैं, उनकी बिल्कुल नहीं। भाई मेरे, क्या करोगे 54 वर्ष में दो महीने से कम स्त्री को अपना फ़ोटो दिखाकर? और मैं देख भी लूँ तो आपको क्या मिल जाएगा? किसी का ई मेल आई डी न हुआ खजाना हो गया!
    अब दुनिया में आए हैं तो जीन ही पड़ेगा,
    ब्लौग बनाए हो तो झेलना ही पड़ेगा
    की तर्ज में कुछ बुदबुदा देते हैं।
    घुघूती बासूती

  18. Tarun Says:

    @RAJ SINH: घबरा के क्या करेंगे, ऐसी पोस्ट को ट्रैश करने का जुगाड़ तो है ही

    @अमित: ऐसी ईमेल के लिये फिल्टर लगा देता हूँ, काफी पहले कंट्रोल पैनल में तरीका भी बताया था। कुछ दिनों मेल चेक नही की तो नयी नयी ईमेल दिखी तो ठेल दी पोस्ट

    ताऊजी: अपन ने भी ऐसा ही कुछ किया है

    सीएमप्रसादजी: मेल फीमेल का तो पता नही लेकिन फ्रीमेल जरूर है जिसकी कम से कम अपने को जरूरत नही है

    :D :D

  19. PN Subramanian Says:

    लिंक्स रोज आते हैं. वैसे दुःख बांटने के लिए आभारभैय्या हम भी झेल ही रहे हैं. परन्तु जिन विषयों में रूचि है उनके ब्लोग्स को देख भी लेते हैं. हमारे मेल बॉक्स में कमसेकम १५० .

  20. Indrani Says:

    Translate to English option is there?

    Thank you very much for your comment at my blog. I appreciate it a lot. :)

  21. Pramod Tambat Says:

    भाई तरुण जी
    जब से मैंने अपना ब्लॉग शुरू किया है और यहाँ वहाँ से जुगाड़ कर ४००-५०० ईमेल एड्रेसों पर अपने ब्लॉग की सूचना भेजी है कुछ बदमाश लोग हाथ धोकर मेरे पीछे पड गए हैं। वे मुझे लाखों डालर मुफ्त में देकर मालामाल कर देना चाहते है। औसत आठ-दस ऐसी ही फर्जी सूचनाएँ रोज़ाना मेरे मेल में आ रही हैं। कृपया इनसे निपटने का कोई तरीका हो तो बताएँ।

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल

  22. dhiraj kumra shah Says:

    यह तो आदत बन चुकी है,इतनी जल्दी जाने वाली नही है ।
    धन्यवाद

  23. maya bhatt Says:

    think possitive,sab aachcha lagne lagega,life is too short for complaining,cheer up!!!!!!!!!!

  24. maya bhatt Says:

    hum toh pardesh mai,desh mai nikla hoga chand…………

  25. नरेश सिह Says:

    सभी भाई लोग परेशान है लेकिन यहाँ कोई नया आदमी चान्द से नही आया है । जो भी है वो भी आप मे से ही एक है । यहाँ सभी लोग इस समस्या को पैदा कर रहे है और खुद ही परेशान होने की भी बात कर रहे है ।

  26. अजित वडनेरकर Says:

    क्या किया जा सकता है। कुछ सूचनाओं के आधार पर साथियों का लिखा पढ लेते हैं, बाकी तो सारे काम तभी होंगे जब हमारे पास वक्त होगा। और भी ग़म हैं ज़माने में …

  27. amar Says:


    यह तो वही मसल है कि, चीलर के डर से कच्छा उतार फेंको..
    काहे अलविदा का ख़्याल लाये. अपने पापी दिल में ।
    बेशर्मों के बीच बेशमों की तरह डटे रहिये !

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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