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मेरे बेटे की लिखी पहली हाइकू कविताः बर्फ

कविताओं के जानकारों का क्या कहना है एक छोटे से बच्चे की लिखी इस हाईकू कविता के बारे में। आज अभी जब मैं उसकी टीचर से मिलने गया तो सबसे बड़ा सरप्राईज मुझे मिला उसकी लिखी हाईकू कविता देखकर। वैसे उसने २ लिखी थीं लेकिन मैं ये वाली ही टिप पाया।

मेरा बेटा जो कि दूसरी कक्षा (2nd Grade) में है, हाइकू कविता के मामले में मुझ से बाजी मार ले गया। मैं आज तक हाइकू नही लिख पाया और उसने २ लिख डाली। कमाल है उसे ये भी पता है कि हाइकू को ५-७-५ के फार्मेट में लिखा जाता है। उसकी लिखी पहली हाइकू कविता का शीर्षक है – Snow (स्नो यानि बर्फ)

18 Snowballs fire

Icicles shoot down from cars

Coming like ice pops

अब आप लोग ही बतायें, कैसी रही उसकी पहली हाइकू कविता।

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18 Responses to “मेरे बेटे की लिखी पहली हाइकू कविताः बर्फ”

  1. अनूप शुक्ल Says:

    शानदार! अब सीख लो बच्चे से और लिखो हायकू!

  2. Dr.Arvind Mishra Says:

    child is the father of man !

  3. mehek Says:

    bahut hi shandar

  4. ranjan Says:

    बेट तो बहुत प्यार.. बहुत प्यारी कविता..

  5. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    बधाई! हो

  6. pratyaksha Says:

    this one is really good !

  7. ताऊ रामपुरिया Says:

    भाई पूत के पांव पालने मे दिखाई देने लगे हैं. बहुत बधाई और आशिर्वाद.

    रामराम.

  8. seema gupta Says:

    बहुत प्यारी कविता, बेटे को प्यार

    Regards

  9. कुश Says:

    पूत के पाँव पालने में ही नज़र आ रहे है..

  10. समीर लाल Says:

    बेहतरीन!!

  11. समीर लाल Says:

    सीखो बच्चे से

  12. परमजीत बली Says:

    बहुत बढिया!!

  13. mohan vashisth Says:

    ये तो बहुत खुशी की बात है कि इतनी सी छोटी उम्र में ही इतना बडा काम जिसे शायद आप और हम अभी तक नहीं कर पाए उस बच्‍चे ने कर दिया वाह जी वाह बेहतरीन मेरी ओर से उस मास्‍टर प्‍लेयर और कवि को ढेर सारी शुभकामनाएं बहुत बढिया

  14. कौतुक Says:

    इसे कहते हैं “बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी”.

    बधाई हो, पूत के पाऊँ पालने में दिख रहे हैं.

  15. Gyan Dutt Pandey Says:

    होनहार बिरवान के होत चीकने पात। बालक प्रगति करे। आशीष।

  16. Lavanya Says:

    Very well said son – God bless !!

  17. mahen Says:

    बेटे ने सोचा पिताजी तो बहुत देर लगा देंगे.. मैं ही लिखना शुरू कर लेता हूँ… हाइकु की अपनी समझ नासमझी पर शुरू होकर वहीँ ख़त्म हो जाती है. मगर यह तय है कि बच्चे की लिखी हुई तो कतई नहीं लग रही.

  18. pallavi trivedi Says:

    sukhad aashcharya hua itne chhote bachche ko aisa likhte dekh kar…god bless him.

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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