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इंडियन कहाँ हैं?

March 6th, 2009 | 19 Comments | Posted in जरा हट के

एक अमेरिकन इंडिया घूमकर वापस अमेरिका आया और जब वो अपने इंडियन दोस्त से मिला तो उस इंडियन दोस्त ने उससे इंडिया के बारे में जानना चाहा।

उसने अमेरिकन से पूछा, तो मेरा देश तुम्हें कैसा लगा?
अमेरिकन ने जवाब दिया, इंडिया इज ग्रेट कंट्री विद सोलिड एंसियेंट हिस्ट्री एंड इमेंसली रिच विद नेचुरल रिसोर्सेज।

उसके इंडियन दोस्त ने फिर पूछा, अच्छा तो फिर इंडियन कैसे लगे?
अमेरिकन ने आश्चर्य के साथ कहा, इंडियन?? व्हट इंडियन? मुझे वहाँ इंडिया में कोई इंडियन नही मिला।

उसके इंडियन दोस्त ने कहा, क्या बकवास कर रहा है, तूझे इंडिया में इंडियन के अलावा भला कौन मिलेगा?
अमेरिकन ने जवाब दिया, कश्मीर में मैं कश्मीरी से मिला, पंजाब में पंजाबी से, गुजरात में गुजराती, बंगाल में बंगाली, तमिलनाडु में तमिल, बिहार में बिहारी, महाराष्ट्र में मराठी….

और फिर उसके बाद मुझे कोई मुस्लिम मिला, कोई हिन्दू, कोई जैनी, कोई बौद्ध, कोई ईसाई, कोई कुछ लेकिन कसम से मेरे को एक भी इंडियन नही मिला

हो सकता है किसी को ये जोक्स लगे और इसे पढ़कर हंस दे लेकिन कहीं सचमुच एक दिन ऐसा ना आये जब कुछ क्षेत्रिय नेता और राजनितिक पार्टियाँ निहित स्वार्थ के लिये हमें इसी तरह से बाँट कर रख दे।

कहने से पहले सोचें और हमेशा कहें – हम हिन्दुस्तानी, व्ही आर इंडियन

मुझे एक ईमेल आयी थी जिसका अनुवाद करके मैने यहाँ पोस्ट कर दिया, क्योंकि मुझे लगा बात में दम है, जब तक है देश तब तक ही हम हैं

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19 Responses to “इंडियन कहाँ हैं?”

  1. pinki Says:

    really good…….

  2. Dinesh Says:

    this is so true

  3. Dr.Arvind Mishra Says:

    बिलकुल दुरुस्त बात !

  4. Ratan Singh Says:

    तरुण जी ये जोक नहीं यही हमारी हकीकत है ,हम भारतीय होने से पहले हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई और उसके बाद मराठी,बिहारी,राजस्थानी,बंगाली आदि ही होते है जबकि सबसे पहले हमें अपनी पहचान एक भारतीय के तौर पर ही रखनी चाहिए ! हमारी इसी कमी का फायदा हमेशा विदेशी आक्र्न्ताओं ने उठाया वे चाहे मुग़ल हो या अंग्रेज या पुर्तगाली | और अभी भी हमारी इसी कमी का फायदा पाकिस्तान की आई एस आई हमारे यहाँ आतंक का नेटवर्क चलाने में उठाती है क्योंकि धर्म के नाम पर उसे भारत में सहयोग करने वाले आसानी से मिल जाते है ! काश हमारे देशवासी इस संकुचित विचारधारा से ऊपर उठ भारतीय बने तो दुनिया में हम सबसे आगे हों ! रही बात नेताओं की, हमारे नेताओं को वोट बैंक के अलावा कुछ नहीं सूझता और ये एसा ही करते रहेंगे कभी नहीं सुधरेंगे,जब तक हम इनकी बात मानकर इनके पीछे लगे रहेंगे ये सुधरे भी क्यों ?
    आपने ईमेल का अनुवाद कर यहाँ प्रस्तुत कर बहुत अच्छा किया, मेरे विचार से यह मुद्दा हमारे देश के लिए सबसे ज्यादा ज्वलंत है इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की बहुत जरुरत है |

  5. premlata pandey Says:

    सच सभी इंडियन बनें। नहीं तो गाँव की कहावत है-”गांठ खुली घर साजला, कुनवा बाराबाट’ लागू होती है।

  6. कुश Says:

    बिल्कुल ठीक..

  7. mehek Says:

    sahi baat,jab tak sab hindustani nahi honge,tab tak aisa hota rahega.

  8. संजय बेंगाणी Says:

    यह चुटकुला नहीं जी करारा व्यंग्य है. एक सच्चाई है.

  9. ज्ञान दत्त पाण्डेय Says:

    गर्व, जब भारतीय होने में गर्व होने लगेगा, तब न होंगे भारतीय!

  10. Lovely Says:

    बिलकुल सच्ची बात .

  11. amit Says:

    पढ़कर हंसी नहीं आई, यह सच्चाई सी प्रतीत होती है कि लोग अपने को बंगाली, पंजाबी, बिहारी, मराठी आदि पहले मानते हैं, भारतीय नहीं! :(

  12. sushil kumar Says:

    सच बात कह दी। पोस्ट में लगाई फोटो भी अच्छी है। क्या आप ये फोटो भेज सकते है जिससे इसे हम अपने स्क्रीन पर ऐसे ही चला सके।

  13. anil kant Says:

    बहुत ही करारा व्यंग्य है …

    मेरी कलम – मेरी अभिव्यक्ति

  14. arun arora Says:

    हमे कोई भारतीय नही मिला इंडियन तो फ़िर भी मिल जाते है जी :)

  15. समीर लाल Says:

    सटीक बात कही है.

  16. संगीता पुरी Says:

    बहुत सही ..

  17. dr.anurag Says:

    इत्तिफकान आज ही मेरे पास एक पेशेंट अपनी बच्ची को दिखाने आया …इस्राइल में पिछले ५ साल से है कहने लगा डॉ साहब देशभक्ति ओर नम्रता तहजीब क्या होती है वहां आकार देखिये….ओर आज अपने ये लेख लिखा….

  18. gagansharma Says:

    तरुण जी, यह एक कड़वी सच्चाई है।

  19. डा. अमर कुमार Says:


    अपने चरण तो इधर को पठाओ, बँधु !
    ऎंवेंई छूने को दिल चाह रहा है !

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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