< Browse > Home / Announcement / Blog article: ब्लोगिंग के 5 सालः कुछ फायदे कुछ नुकसान

| Mobile | RSS

ब्लोगिंग के 5 सालः कुछ फायदे कुछ नुकसान

March 4th, 2009 | 44 Comments | Posted in Announcement

विगत १५ फरवरी २००९ को ब्लोगिंग करते अपने को ५ साल पूरे हो गये, मंदी के इस दौर में ये बताने की रफ्तार भी कितनी मंद रही ये इसी से दिखता है कि हम ये बात आज ४ मार्च को बता रहे हैं। सोचा आज क्यों ना थोड़ा पीछे मुड़ कर देखा जाये और जानने की कोशिश की जाय कि आखिर बगैर किसी टंकी में चढ़े, बगैर किसी पत्र पत्रिका में छपे और कहीं भी अपने चिट्ठों की चर्चा/समीक्षा हुए बगैर कैसे करके ये निरंतरता बनी रही।

१५ फरवरी २००४ के दिन हमने अपना पहला ब्लोग My Lonely Planey अंग्रेजी में रेडिफ की साईट में ओपन किया और पहली पोस्ट १८ फरवरी को लिखी। वर्तमान में इसका नाम बदल कर जीरो आवर कर दिया है। उसके १ साल बाद हमें पता चला कि हिंदी में भी ब्लोगिंग की जा सकती है और २६ फरवरी २००५ के दिन पहले हिंदी चिट्ठे निठल्ला चिंतन की पहली पोस्ट लिखी। यानि कि हिंदी ब्लोगिंग के भी ४ साल पूरे हो गये हैं।

इंटरनेट में हिंदी की सामग्री की अनुपलब्धता हिंदी में ब्लोगिंग शुरू करने की मुख्य वजह बनी और इसी मकसद के साथ लिखना शुरू किया। टिप्पणियों से परे यही शायद हमारे निरंतर लिखने की वजह और मोटिवेशन है।

आज देखने में आता है कई लोग टिप्पणी ना मिलने का रोना रोते हैं, इस वजह से शायद उनके उत्साह में कमी भी आती है। यही नही इतने सारे हिंदी के एग्रीगेटर और अन्य साधन होने के बावजूद जबरदस्ती दूसरों को मेल करके अपना पढ़वाना चाहते हैं। तो मैं बताऊँ, जब ४ साल पहले निठल्ला चिंतन शुरु किया था तब हिंदी का ना कोई एग्रीगेटर था ना ही रीडर, फीड या अन्य कोई साधन। बावजूद इसके कभी भी कोई एक दूसरे को अपना पढ़वाने के लिये मेल नही करता था।

तब जब चिट्ठों की संख्या मुश्किल से ३०-४० रही होगी हमें मिलने वाली टिप्पणियों का एवरेज ७ के आसपास रहता था और आज जब ये संख्या हजारों में है तब भी टिप्पणियों का एवरेज १२ के आसपास ही है। कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना ही है कि आपने अगर चंद महीने से ही लिखना शुरू किया और उसके बावजूद भी अगर ४-५ टिप्पणियाँ आपको मिलती हैं तो उसे बहुत जानिये।

मैंने एक अंग्रेजी चिट्ठे पर कभी पढ़ा था कि अगर आपके ब्लोग को एवरेज ५ टिप्पणियाँ भी मिलती हैं तो आप समझिये कि आप औसत से अच्छा कर रहे हैं। और ये अंग्रेजी चिट्ठों के संदर्भ में था तो हिंदी के लिये ५ का नंबर कहीं अधिक है।

मैं टिप्पणियों की संख्या को कभी भी किसी पोस्ट की गुणवत्ता का आधार नही मानता लेकिन बावजूद इसके अगर आपका ब्लोग लिखने का मकसद ज्यादा से ज्यादा टिप्पणियाँ पाना है तो आपको भी ज्यादा से ज्यादा टिप्पणियाँ करनी होगी। इसके लिये या तो पर्सनली दूसरे ब्लोगरों से ज्यादा घनिष्ठता बनायें और उनका लिखा पढ़ कर अपने विचार व्यक्त करें या फिर अपने कटेंट को इतना समृद्ध करें कि लोग टिप्पणी किये बिना ना रहें।

निठल्ला चिंतन मेरे लिये उस की तरह है जिस पर सबसे ज्यादा ध्यान और समय दिया जाय और वो अंत में सबसे खोटा निकल आये। आज जब अपने इस ब्लोग की अन्य ब्लोग से तुलना करता हूँ तो मुझे ऐसा ही लगता है। क्योंकि सबसे ज्यादा वक्त देने के बावजूद इसके रेगुलर रीडर (फीडबर्नर) की संख्या हमेशा ३५ से नीचे ही रही, हाँ एक अच्छी बात ये थी कि मेरा ये चिट्ठा मेरे अन्य ब्लोगस की तुलना में ब्लोगरस के बीच ज्यादा पढ़ा जाता है।

मेरे गृह राज्य उत्तरांचल के बारे में भी इंटरनेट में हिन्दी में लगभग ना के बराबर कुछ मिलता था और यही वजह बनी मेरे दूसरे हिंदी के चिट्ठे उत्तरांचल को शुरू करने की (१८ फरवरी २००६), वो चिट्ठा जिसे मैंने सबसे कम वक्त दिया, वो चिट्ठा जो सिर्फ गिने-चुने ब्लोगरस द्वारा ही पढ़ा जाता है। बावजूद इसके मेरी नजर में यही मेरा सबसे सफल चिट्ठा है और इसकी एकमात्र वजह शायद इसका कटेंट और उससे पाठकों को जुड़ाव रहा है। आज की तारीख में इसे फीडबर्नर से पढ़ने वालों की संख्या ४८० है, और अगर आंकडा ही कोई पैमाना होता है तो किसी एक पोस्ट को मिली अधिकतम टिप्पणी की संख्या है ४४०

इसलिये वो जो कम टिप्पणियाँ मिलने से दुखी रहते हैं उनसे सिर्फ एक बात कहना चाहूँगा कि कटेंट में ध्यान दें अगर आप के कटेंट में दम होगा तो धीरे धीरे पढ़ने वाले भी जुड़ते जायेंगे, धीरे धीरे रे मना धीरज से सब होय

फिर आयी १८ फरवरी २००७ और इस दिन से शुरूआत की तकनीकी ब्लोग कंट्रोल पैनल की, इसकी वजह भी वही थी। उस वक्त हिंदी में तकनीकी ब्लोग चलाने वाले दो मुख्य लोग थे, ई-पंडित वाले श्रीश और रवि रतलामीजी। ऐसे में सिर्फ ब्लोगिंग से जुड़े तकनीकी विषय या टिप में ब्लोग केंद्रित करने के बजाय हमने इसे ब्लोगर और नान-ब्लोगर दोनों से संबन्धित विषयों पर लिखेंगे सोच कर शुरू किया। निठल्ला चिंतन के चलते इस पर भी उतना समय नही दे पाये जितनी की दरकार थी। लेकिन मेल और टिप्पणियों से पता चलता रहता है कि इस में लिखे गये आलेखों से ब्लोगर और नान-ब्लोगर दोनों को काफी मदद मिली है।

इसी साल फरवरी ६, २००९ से हमने शुरू किया गीतों का ब्लोग गीत गाता चल किसने अभी सिर्फ क्रॉल करना शुरू किया है। इसके अलावा भी कई अन्य छोटे बड़े प्रोजेक्टस में हमने हाथ डाल उसे शुरू किया लेकिन वक्त की तंगी के चलते वो प्रायः निष्क्रिय हो चुके हैं। संक्षेप में बोले तो अपने सभी चिट्ठे फरवरी में शुरू किये गये।

एक बात तो मैने नोट की है कि अमेरिका में रहकर भारत पर लिखना वो भी हिंदी में इतना आसान नही है क्योंकि इन ब्लोगस का ज्यादातर पाठकवर्ग भारत में ही है। शायद यही वजह है कि भारत से बाहर रहकर हिंदी में ब्लोगिंग करने वालों की संख्या आज उस वक्त से भी कम है जब हिंदी में सिर्फ ३०-४० ब्लोग हुआ करते थे।

अब उस बात को भी कर लेते हैं जो टाईटिल में कही है यानि फायदे नुकसान वाली। ब्लोगिंग का सबसे बड़ा फायदा ये हुआ कि हमारी बहुत सारे अच्छे लोगों से जान पहचान हुई और इसी की वजह से हिंदी में बहुत कुछ अच्छा पढ़ने को मिला, बहुत कुछ नया सीखा। अपने से कहीं बेहतर लिखने वाले लोग मिले उनका लिखा फ्री में पढ़ने को मिला ;) । कई लोगों का स्नेह और दोस्ती मिली।

लेकिन ब्लोगिंग से नुकसान भी हुआ किताबें पढ़ना कम हुआ, लायब्रेरी जाना कम हुआ, टीवी देखना बंद हुआ (हम सीरियल नही कह रहे, वो हमने लिये भी नही हैं), म्यूजिक से ध्यान हटा और हर वक्त लैपटॉप पर चिपके रहने की आदत लग गयी। हर वक्त कंप्यूटर के सामने रहना अच्छा नही, हमारा तो दिनभर काम भी इसमें घूसे रहकर ही होता है।

आने वाले साल का बजट कुछ यूँ है – निठल्ला चिंतन में समय की सबसे ज्यादा कटौती की गयी है, कंट्रोल पैनल और उत्तरांचल को बजट में अधिक समय दिया गया है। थोड़ा बहुत समय चिट्ठाचर्चा के लिये भी रखा गया है।

और अंत में उन सभी लोगों का हार्दिक धन्यवाद जो निरंतर हमारा लिखा पढ़ते या हिम्मत के साथ झेलते रहे, उन लोगों को थोड़ा और विशेष धन्यवाद जिन्होंने टिप्पणी कर करके कर करके निरंतर उत्साहवर्धन किया। आशा है आप सभी लोगों का स्नेह आगे भी बना रहेगा। साथ ही साथ चिट्ठों की कमियों कि तरफ भी ध्यान दिलाते रहेंगे।

कुछ अन्य डिटेल जानने के इच्छुक पिछले साल लिखा गया आलेख – …और ब्लोगिंग के 4 साल पूरे भी शायद देखना चाहें।

Leave a Reply 2,471 views |
Follow Discussion

44 Responses to “ब्लोगिंग के 5 सालः कुछ फायदे कुछ नुकसान”

  1. Dr.Arvind Mishra Says:

    बहुत बधाई इस सिंहावलोकन को साझा करने के लिए ,आप तो हिन्दी चिट्ठाकारिता के आदि देवों में हैं ! हमें प्रेरित करते रहें !

  2. Manoshi Says:

    आपको बधाई। हम आपसे १ साल जूनियर हैं ब्लागिंग में। हमने २००५ मार्च में शुरु की थी ब्लागिंग। आपका कहना सही है, टिप्पणी मिलने पर इंसान के स्वभावगत साइकोलाजी के चलते खुशी तो ज़रूर होती होगी सभी को, मगर इसका मतलब ये नहीं कि आपकी पोस्ट बुरी है अगर टिप्पणी न मिली तो। मैंने देखा है, कई श्रेष्ठ ब्लाग पोस्ट भी मरहूम रह जाते हैं टिप्पणियों से और कई पोस्ट सिर्फ़ किसी पापुलर गीत के पोस्ट करने पर भी ३० टिप्पणियाँ पा जाते हैं। in any case, आपका ब्लाग एक सुलझा हुआ, नपे तुले पोस्ट्स का ब्लाग है। quality बड़ी चीज़ होती है, नि:संदेह।

  3. Manoshi Says:

    by the way,आपने ४ साल पूरे किये ब्लागिंग में, यानि कि फिर तो ब्लागमेट (क्लासमेट टाइप्स) हुये।

  4. premlata pandey Says:

    संतुलित बात! बधाई!पाँच साल होने पर।
    “कंट्रोल पैनल और उत्तरांचल को बजट में अधिक समय दिया गया है।” – सार्थक योजना।

  5. ghughutibasuti Says:

    बधाई हो। शायद आपको फरवरी का महीना अच्छा लगता है। वैसे पिछले महीने मैं भी ब्लॉगलेखन में दो साल पुरानी हो गई।
    घुघूती बासूती

  6. seema gupta Says:

    ब्लॉग के चार वर्ष पूरा करने पर बहुत बधाई और शुभकामनाये …. बेहद रोचक आलेख होते हैं आपके….अलग अलग विषय पर…..”

    Regards

  7. ranju Says:

    बधाई .बहुत अच्छा विश्लेषण किया है आपने …

  8. ranjan Says:

    आपने बहुत अच्छे तरीके से अपने अनुभव शेयर किये और साथ ही साथ नये ब्लोगर के लिये टिप्स भी दे दी..

    ब्लोग के नुकसान भी है.. ” हर वक्त लैपटॉप पर चिपके रहने की आदत लग गयी…” ये ही सबसे खतरनाक है.. कुछ समाधान मैं भी सोच रहा हूँ.. आप भी मौका मिले तो उबरने के उपाय बताये..

    शुभकामनाऐं…

  9. seema gupta Says:

    “oh sorry sorry ..please read it five years instead of four years…it was typing error”

    regards

  10. जीतू Says:

    भई सबसे पहले तो पाँच साल पूरे करने पर ढेर सारी बधाईयां।

    तुमने टिप्पणी चर्चा का अच्छा विश्लेषण किया है। पुराने दिनो की याद ताजा करा दी। ब्लॉगिंग का सबसे बड़ा फायदा यही है कि एक जैसे(अथवा विरोधी) विचारो वाले लोगों से सम्पर्क बनता है, आत्मीयता बढती है। सबसे बड़ी बात है लिखना, टिप्पणी पाने के लिखना, मेरी नज़र मे लघुकालीन होता है, मेरे कई ऐसे लेख है, जिनमे दो दो साल तक कोई टिप्पणी नही आयी, लेकिन आज उन कई लेखों पर लोग आ रहे है, टिप्पणी कर रहे है। यदि ब्लॉगर टिप्पणी ना मिलने पर हतोत्साहित हो रहा है तो इसमे गलती के ब्लॉगर की ही है। यकीन मानिए, टिप्पणी के व्यापार से किसी का भला नही होता। इसलिए अपने मन की मानो, जब मर्जी आए लिखो, लगातार लिखो, बार बार लिखो। इन्ही शुभकामनाओं के साथ,
    -तुम्हारा (बुजुर्गवार) भाई जीतू

  11. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    बहुत कुछ जानने को मिला इस आलेख से। पाँच वर्ष की ब्लोगिंग के लिए मुबारकबाद।

  12. cmpershad Says:

    ब्लागिंग जगत में पांच साल तक टिके रहने के लिए बधाई। आप ने सही कहा है कि कमेंट किसी ब्लाग की स्तरीयता का पैमाना नहीं हो सकता इसलिए किसी भी ब्लागर को कमेंट की कमी से हताश नहीं होना चाहिए। इसका एक कारण यह भी है कि सब ब्लागर तैयार हुए पर हमारे जैसे खालिस कमेंटकार शायद कम ही तैयार हुए:) एक बार पुन्ः बधाई आप की इस लगन के लिए॥

  13. अंशुमाली Says:

    शुभकामनाएं। फायदे से ज्यादा नुकसान गिनने चाहिए ताकि सुधरने का मौका मिल सके।

  14. Lovely Says:

    बहुत बधाई ५ साल पुरे होने की.

  15. neeraj1950 Says:

    आपने बहुत सच कहा कंटेंट अच्छा हो तभी लोग अधिक जुटते हैं पढने के लिए…और टिप्पणियां सही मापदंड नहीं होती है लेखन का…कुछ लोग जबरदस्ती प्रोत्साहित करते हैं अपने ब्लॉग पर आने के लिए जो गलत है…
    चार साल और वो भी हिंदी ब्लॉग्गिंग में…आपको बहुत बहुत बधाईयाँ…आप तो सबके गुरु हैं भाई…
    नीरज

  16. समीर लाल Says:

    ये बच्चा तो बहुत बड़ा हो गया. अब तो हॉफ पैन्ट पहन कर स्कूल जायेगा. शाबास, मुन्ने-पोयम सुनाओ-मछली जल की रानी वाली.

    बहुत बधाई हो जी और ढ़ेर शुभकामनाऐं.

  17. सुरेश चिपलूनकर Says:

    बहुत बधाईयाँ… “टिप्पणी” के बारे में आपके विचार दिल के करीब लगते हैं… हमें तो अभी सिर्फ़ 2 साल ही हुए हैं और अभी भी तकनीकी मुद्दों के लिये हम आप जैसों का मुँह तकते रहते हैं… :)

  18. anil kant Says:

    badhayi ho aapko…achchha vishleshan kiya hai

  19. रवि Says:

    कंट्रोल पैनल में नियमितता बढ़ाकर उसे बरकरार रखें तो वाकई अच्छा रहेगा. पांच वर्ष की नियमित प्रतिबद्ध ब्लॉगिंग बधाई की हकदार तो है ही!

  20. dr.anurag Says:

    पञ्च सल् एक लम्बा अरसा होता है तरुण जी .अछे बुरे तमाम अनुभव…अच्छा बुरा सब पढना .ये भी खासा अनुभव है ..बस उसी उर्जा को बनाये रखना शायद यही मुश्किल काम होता है…

  21. पूनम Says:

    बधाई हो. न सर्फ पांच साल पूरे करने के बल्कि इस अंतराल में निरंतर लिखने रहने के लिए भी. मैंने भी फरवरी २००६ में हिंदी ब्लॉग शुरू किया था और उस समय के गिने चुने ब्लोगर्स में आपको ब्लॉग दुनिया में पाया था..

  22. amit Says:

    सबसे पहले तो हिन्दी ब्लॉगिंग में चार वर्ष और कुल जमा ब्लॉगिंग में पाँच वर्ष पूरे करने पर बहुत-२ बधाई और आगे के सफ़र के लिए शुभकामनाएँ। :)

    १५ फरवरी २००९ के दिन हमने अपना पहला ब्लोग My Lonely Planey अंग्रेजी में रेडिफ की साईट में ओपन किया और पहली पोस्ट १८ फरवरी को लिखी।

    आपने 15 फरवरी 2009 को अपना पहला ब्लॉग चालू किया? ;) तरूण भाई, तारीख की गलती में सुधार करो वर्ना पाँच साल कैसे गिने जाएँगे!! :D

    जब ४ साल पहले निठल्ला चिंतन शुरु किया था तब हिंदी का ना कोई एग्रीगेटर था ना ही रीडर, फीड या अन्य कोई साधन।

    उस समय देबू दा का चिट्ठाविश्व था और कदाचित्‌ नारद भी शुरु हो चुका था। ब्लॉगों की फीड तो उससे काफ़ी पहले से उपलब्ध थी, RSS 0.92 तथा RDF फॉर्मेट तो पुराने थे ही RSS 2.0 भी कब का आ चुका था। फीड पढ़ने के लिए कंप्यूटर पर स्थापित होने वाले कई सॉफ़्टवेयर थे और ऑनलाईन पढ़ने के लिए ब्लॉगलाईन्स 2 वर्ष पहले लाँच हो चुका था! :)

    इसके लिये या तो पर्सनली दूसरे ब्लोगरों से ज्यादा घनिष्ठता बनायें और उनका लिखा पढ़ कर अपने विचार व्यक्त करें या फिर अपने कटेंट को इतना समृद्ध करें कि लोग टिप्पणी किये बिना ना रहें।

    सेलेब्रिटी बन के भी टिप्पणियाँ थोक के भाव पाई जा सकतीं हैं, तब तो किसी के ब्लॉग पर जाकर टिप्पणी करने की भी आवश्यकता नहीं रहती, जैसे ही कुछ अपने ब्लॉग पर छापा टिप्पणीकर्ताओं का तांता लग जाता है! ;)

    बाकी आपकी इस बात से मैं भी इत्तेफ़ाक रखता हूँ कि टिप्पणियाँ किसी भी पोस्ट/लेख की गुणवत्ता का पैमाना नहीं होती। किसी लेख पर ढेरों टिप्पणियाँ हैं और किसी पर कम – तो इन चीज़ों को देख के यह नहीं कहा जा सकता कि पहला लेख बढ़िया है और दूसरा घटिया!! जो टिप्पणियाँ पाने के लिए लिखते हैं वे ही उनके न मिलने पर अधिक हतोत्साहित होते हैं और जो टिप्पणियों की परवाह किए बिना लिखते हैं वे लिखते रहते हैं और टेन्शन मुक्त (टिप्पणियों के मामले में) रहते हैं, ऐसा मेरा मानना है और ऐसा मैंने ऑबज़र्व किया है। :)

  23. ज्ञान दत्त पाण्डेय Says:

    बहुत बधाई!
    “लेकिन ब्लोगिंग से नुकसान भी हुआ किताबें पढ़ना कम हुआ, लायब्रेरी जाना कम हुआ, टीवी देखना बंद हुआ” - यह लिखा देख कर मैं सोचने लगा हूं!

  24. अतुल शर्मा Says:

    बधाइयाँ!

  25. swapandarshi Says:

    Congrates!

    Often I read your posts and do not comment.
    So include one comment which is invisible

  26. आलोक सिंह Says:

    जोहार
    ब्लॉग जगत में पांच साल पुरे करने पर हार्दिक बधाईया.
    आप ऐसे ही लिखते रहे .

  27. Manish Says:

    टिप्पणियों और कान्टेंट के बारे में आपके आकलन से मैं पूरी तरह सहमत हूँ। पाँच साल का ल्बा समय यहाँ गुजारने के लिए बधाई।

  28. हरि जोशी Says:

    चार साल का लंबा सफर तय करने वर बधाई। आपका आलेख पढ़ने के बाद लगता है कि कितना रोमांचक सफर रहा होगा आपका।

  29. Shastri JC Philip Says:

    प्रिय तरुण, इस सिंहावलोकन को पढ कर बडा अच्छा लगा!!

    जो लोग इस राह पर सबसे पहले चले थे उनकी प्रेरणा से अगली पीढी के लोग पथिक बने. जल्दी ही यह एक बहुत बडा प्रवाह बन जायगा (2010 के अंत तक). यदि पहले पथिक न चलते तो ऐसा न हो पाता.

    अनुभव, विश्लेषण आदि भी पढ कर अच्छा लगा!!

    प्रभु से कामना है कि “चिंतन” शतायु हो !!

    सस्नेह — शास्त्री

    – हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

    महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

  30. संजय बेंगाणी Says:

    बधाई स्वीकारो भाई. उस समय चिट्ठाविश्व था.
    हिन्दी ब्लॉगिंग में आपके आस पास ही प्रवेश किया था, तब का अलग आनन्द था. टिप्पणी लिखने के लिए हिन्दीनी पर लिख कट-पेस्ट करना पड़ता था. दो टिप्पणी मिले तो आनन्द आ जाता था.

  31. Tarun Says:

    @अमित, संजय
    देबू दा का चिट्ठाविश्व थोड़ा बाद में शुरू हुआ था और जहाँ तक यादाश्त साथ दे रही है उसमें पहले कुछ पोस्ट के बारे में बताते थे, बाद में एग्रीगेटर की तरह भी यूज करने लगे थे, अपडेट में थोड़ा टाईम लगता था। उसके काफी बाद फिर नारद आया, फिर प्रतीक ने भी एग्रीगेटर बनाया था।

    यहाँ पर ये कहने का मतलब है कि जब हमने चिट्ठा शुरु किया था उस वक्त कोई एग्रीगेटर नही था जिससे दूसरों को हमारे चिट्ठे का पता चल पाता।

    @अमित, गल्ती सुधरवाने के लिये शुक्रिया, सैलिब्रेटी बनने से ज्यादा आसान अन्य दो बातें थी, इसलिये वो ही कहा। ;)

  32. Tarun Says:

    आप सभी लोगों को बहुत बहुत धन्यवाद, आप लोगों का स्नेह ही जो ये निरंतरता बनाये रखता है, आशा है ये स्नेह यूँ ही बना रहेगा।

    @मानोशी, जी हाँ हम ब्लोगमेट ही हुए, आपको भी बधाई।

    @घुघुतीजी आपको भी बहुत बहुत बधाई २ साल पूरा करने पर।

  33. ताऊ रामपुरिया Says:

    आपको पांच साल पूरे करने पर हार्दिक बधाई. आपका भूतकाल का स्मरण हम जैसे नये लोगों को भी पीछले समय की अच्छाई, बुराईयों और तकलीफ़ों को जानने का अवसर देता है .

    पुन: आपको बधाई और शुभकामनाएं.

    रामराम.

  34. अजित वडनेरकर Says:

    बहुत बधाई तरुण भाई…पांच साल की ब्लागरी के लिए । ये बड़ी बात है।
    आपके सभी चिट्ठे स्तरीय हैं। सबसे अच्छा मुझे उत्तरांचल ही लगता है। ब्लागिंग में टिप्पणी को मुद्दा नहीं है। सही है। कई चिट्ठे है जिन्हें टिप्पणियां कम मिलती हैं पर खूब पढ़े जाते हैं। तकनीकी तौर पर पिछले महिने हमें दो साल हमारे भी कभी के पूरे हो गए। पर नियमित रूप से लिखते हुए दो साल पूरे होने में अभी चार महिन बाकी हैं :)

  35. amit Says:

    देबू दा का चिट्ठाविश्व थोड़ा बाद में शुरू हुआ था और जहाँ तक यादाश्त साथ दे रही है उसमें पहले कुछ पोस्ट के बारे में बताते थे, बाद में एग्रीगेटर की तरह भी यूज करने लगे थे, अपडेट में थोड़ा टाईम लगता था। उसके काफी बाद फिर नारद आया, फिर प्रतीक ने भी एग्रीगेटर बनाया था।

    तरूण भाई, अब चिट्ठाविश्व का तो मुझे इतना आईडिया नहीं है, मैंने उसी वर्ष नवंबर में लिखना शुरु किया तब नारद था। जीतू भाई से पूछा तो बोले कि 2005 के मध्य से पहले नारद शुरु हो चुका था। बाकी हो सकता है कि फरवरी में न हो जब आपने शुरु किया!

    सैलिब्रेटी बनने से ज्यादा आसान अन्य दो बातें थी, इसलिये वो ही कहा।

    ही ही ही, बात तो सही है आपकी, लेकिन फिर भी विकल्प तो देना ही चाहिए ना जब सुझाव दे रहे हैं, क्या पता कोई ठान ही ले कि सेलेब्रिटी बनना ही है!! :D

    और आभी देखा कि आपके इस ब्लॉग पर समीर जी के बाद सबसे अधिक टिप्पणी हम ही किए हैं, समीर जी से कोई कंपीटीशन नहीं है, उनको पकड़ पाना लोहे के चने चबाना है! :)

  36. Satish Chandra Satyarthi Says:

    सबसे पहले तो आपके ब्लॉग के ५ साल पूरे होने पर ढेरों बधाइयां
    आप नए ब्लोगर्स के लिए प्रेरणादीप के सामान हैं.

  37. कविता वाचक्नवी Says:

    पाँचवीं वार्षिकी पूरे करने पर हार्दिक शुभकामनाएँ।

  38. पैचान कउन ? Says:


    तो यह आपका निट्ठला चिंतन है, तरुण भाई ?
    यदि सक्रिय होता, तब तो ब्लागजगत में चक्रवात ही आ जाता :)

  39. Lavanya Says:

    Heartiest congratulations Tarun bhai ..& wish you many more successful Blogging years in future.

  40. राज भाटिया Says:

    हार्दिक शुभकामनाएँ पांचवी वर्ष गांठ पर, आप का लेख हम भी पढ लेते है, बाकी आप की सभी बाते ठीक लगी.
    धन्यवाद

  41. HEY PRABHU YEH TERA PATH Says:

    ब्लॉग के चार वर्ष पूरा करने पर बहुत बधाई और शुभकामनाये…
    क्रम को जारी रखे।

  42. HEY PRABHU YEH TERA PATH Says:

    xxxx क्षमा करे ५ कि जगह चार वर्ष लिखा, कृपया सुधार कर पढे।

  43. anitakumar Says:

    पांच वर्ष्…॥नहीं नहीं अब तो उससे भी बड़े हो गये शायद एक डेढ़ महीना, पूरे करने के लिए ढेर सारी बधाई। नफ़ा नुकसान जो भी गिनवाये वो सब हमारे साथ भी हुआ। आप ने कहा “इंटरनेट में हिंदी की सामग्री की अनुपलब्धता” थी इस लिए आप ने लिखना शुरु किया। इस वाक्य ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मैं क्युं ब्लोगिंग में आयी और क्युं पिछले दो साल से बनी हुई हूँ? खैर अभी चिंतन चल रहा है।

  44. cam balkon Says:

    cam balkon kapama turkiye valla iyidir

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

टिप्पणियों का शटर नयी पोस्ट पब्लिश करने के बाद कुछ दिनों ही खुला रहता है। पुरानी पोस्टस में आने वाले स्पॉम टिप्पणियों के मद्देनजर यह निर्णय लेना पड़ा, असुविधा के लिये खेद है। आप को अगर ये ब्लोग और इसमें लिखी पोस्ट पसंद आती हैं तो आप इसे सब्सक्राइब करके भी पढ़ सकते हैं, धन्यवाद।