“सुर्पनखा बन नाक कटाये”,, क्या इसे कहावत बना सकते हैं?
ये तो सभी जानते हैं कि त्रेता युग में विभिषण ने रावण को हरवाने में भगवान राम की मदद की थी जिसके फलस्वरूप इस तरह के केस के लिये ही ये कहावत बनी है - घर का भेदी लंका ढाये।
उसी त्रेता युग में सुर्पनखा भी हुई थी, जो पहले राम पर लट्टू हुई लेकिन राम के मना करने पर लक्ष्मण से विवाह करना चाहती थी। कुछ देर तक तो वो दोनों भाईयों के बीच शंटिंग करती रही और फिर अंततः लक्ष्मण ने उसकी नाक काट उसे भागने पर मजबूर किया।
ये सुर्पनखा टाईप केस तो आजकल भी होते रहते हैं बल्कि अभी तो एक इसी तरह का केस फिजा में चाँद बन सभी तरह की सीमा तोड़ गूँजायमान है। बस फर्क इतना है तब शंटिंग करने वाली एक स्त्री थी और अब एक पुरूष। तो क्या इस तरह के केस में हम ये कह सकते हैं - सुर्पनखा बन नाक कटाये (बिल्कुल उसी लहजे में जैसे घर का भेदी लंका ढाये)।
Send to Twitter and Follow me on Twitterनिठल्ली त्रिवेणीः अपन को भाषा की इत्ती समझ नही है कि नियम के मुताबिक त्रिवेणी लिख सके, इसलिये निठल्ली त्रिवेणी कह रहे हैं यानि त्रिवेणी का हमारा जेनेरिक वर्जन, वैसे ही जैसे कभी आपको निठल्ले दोहे सुनाये थे। भारत में कुछ शहर ऐसे हैं जहाँ वोटरों के पास कोई च्वाइस नही होती, उन्हीं को ध्यान पर रख ये लिखने की कोशिश की है।
कोई है चोर, कोई है डाकू
कोई चलाये छुरी, कोई चलाये चाकूजनता का क्या, खरबूज बन के जाती है और कट के आती है।












This post has 8 comments
February 6th, 2009
सुर्पनखा बन नाक कटाये (बिल्कुल उसी लहजे में जैसे घर का भेदी लंका ढाये)।
” हा हा हा हा हा हा बहुत खूब…..सच मे कहावत तो बन भी गयी और साबित भी हो रही है….”
Regards
February 6th, 2009
बहूत खूब -मुहावरा और कविता दोनों ही लाख टके की !
February 6th, 2009
हा हा हा! सही है. आज से ये मेरी मुहावरा सूची में शामिल हो गया.
February 6th, 2009
निठल्ली त्रिवेणी तो बढ़िया है ! खांटी त्रिवेणी तो कई बार पल्ले ही नहीं पड़ती
February 6th, 2009
क्या बात है !
आपकी त्रिवेणी तो गजब है ।
February 6th, 2009
ज्यादा सटीक होगा - सूपर्णख बन नाक कटाये! जेण्डरीय मेज्योरिटी मर्दों के पास है।
February 6th, 2009
मजौ आयो लला !
पन, आजकल ई नाक कहाँ पायी जाती है,
जो साबूत हो, और काटने लायक हो ।
नकटो की नाक कितनी बार कटेगी, लला ?
February 9th, 2009
i proud to be garhwali…….
garhwal is the hesven in ths world.
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