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भारतीय संस्कृति भी कोई दूध की धुली नही है

मैने अपनी पिछली पोस्ट में एक टीन प्रीगनेंसी का जिक्र किया था जो कि हमारे समाज (क्या पश्चिम क्या पूर्व) की विफलता का ही शायद नतीजा है। उसमें शास्त्रीजी की एक टिप्पणी आयी थी, जिसे पढ़कर ही मुझे कहना पड़ रहा है भारतीय संस्कृति (या सभ्यता या समाज) भी कोई दूध की धुली नही है। [...]

छोटी सी आशा पिता बने 13 साल के बच्चे के लिये

ब्रिटेन के अखबारों में ये बात सुर्खियां बनी थी (हैं), सही गलत की बहस अभी जारी है। 13 साल का एक बच्चा अभी अभी पिता बना है, माँ बनी लड़की की उम्र है 15 साल। अमेरिका के सी एन एन की मानें तो इसका एक तीसरा एंगल भी है और वो है 16 साल का [...]

[ More ] February 16th, 2009 | 12 Comments | Posted in देश दुनिया |

अगर मुन्नाभाई फूलों की जगह चड्ढी भेजता तो…

ध्यान रहे मैने गुलाबी नही कहा, क्यों? वो बाद में बताऊंगा पहले चड्ढी की कबड्डी से संबन्धित तीन पोस्ट का जिक्र करना चाहूँगा जो मैने पिछले १-२ दिन में पढ़ी थी। पहली पोस्ट थी सुरेश चिपलूनकर की जिन्होंने शुरूआत तो गुलाबी चड्डी भेजने के विरोध से की लेकिन फिर मुद्दे से भटक गये और व्यक्तिगत [...]

मेरा वाला जेनेरिक: सूर्य अस्त शराबी मस्त

आप सोच में तो नही पड़ गये कि ये क्या बला हुई, ज्यादा मत सोचिये पहले मैं आपको ये बताऊँगा ये क्या है और उसके बाद जेनेरिक शेर भी सुनाऊँगा। आपने ये शायद ही कभी पहले सुना हो क्योंकि अभी अभी हमने ये बिल्कुल ताजा अपने दिमाग की भट्टी से निकाला है, शब्द तो पुराना [...]

“सुर्पनखा बन नाक कटाये”,, क्या इसे कहावत बना सकते हैं?

ये तो सभी जानते हैं कि त्रेता युग में विभिषण ने रावण को हरवाने में भगवान राम की मदद की थी जिसके फलस्वरूप इस तरह के केस के लिये ही ये कहावत बनी है – घर का भेदी लंका ढाये। उसी त्रेता युग में सुर्पनखा भी हुई थी, जो पहले राम पर लट्टू हुई लेकिन [...]

एक मीडिया, एक गाली, एक ब्लोगर और बचेखुचे भारतीय

कुछ लिखने से पहले ही बता दूँ मेरी समझ से ‘बचेखुचे’ कहना गाली में नही आता, अगर आता है तो बता दें मेरा भी थोड़ा ज्ञान बढ़ जायेगा। अभी पिछले कुछ दिनों में ही पत्रकार बनाम ब्लोगर प्रकरण पढ़ने में आया। कुछ लोग खासकर मीडिया वाले पत्रकार (बरखा दत्त) का पक्ष ले रहे हैं, वहीं [...]

क्या ये नैतिक है? – सात बच्चे सोचे थे लेकिन वो आठ थे

यहाँ अमेरिका में एक ३३ साल की औरत ने आठ बच्चों को एक साथ जन्म दिया, उसके पहले से ही ६ बच्चे थे। एक ही उम्मीद में ये सब किया गया लेकिन हो गये आठ, यहाँ तक की डाक्टर भी ७ बच्चे समझ के डीलिवरी करवा रहे थे। ऐसा पढ़ने में आया कि वह औरत [...]

[ More ] February 2nd, 2009 | 5 Comments | Posted in देश दुनिया |