जाको राखे साईंया - क्या वाकई में?
हमारी और आसपास के लोगों की जिंदगी में अक्सर ऐसा कुछ ना कुछ घटित हो जाता है जिससे सभी का ‘जाको राखे साईंया’ कहावत पर यकीन बना रहता है। सवाल ये भी उठ सकता है जब बचाना उसी ने ही है तो वो क्यों ऐसी परिस्थिति आने देता है जहाँ उसे बचाने आना पड़े। इसका सही उत्तर तो मुझे नही पता लेकिन लगता है वो ये नही चाहता कि लोग उसे भूलने लगें इसलिये शायद अपने होने का एहसास कराने को ये परिस्थितियाँ आने देता हो।
मैंने बहुत पहले कहीं पढ़ा था जिसमें ये बात समझाने की कोशिश की गयी थी, कि ऐसे हादसे कैसे घटते हैं जिसमें समूह में लोगों को जान गँवानी पड़ती है या नुकसान होता है। जैसे मुम्बई की घटना, अफगानिस्तान, सुनामी, भूकम्प और या फिर कुछ दिन पहले हडसन नदी न्यूयार्क पर हुआ प्लेन क्रैश (शायद प्लेन लेंड)।
उसमें ये ग्रह नक्षत्रों के आधार पर समझाया गया था, मुझे अक्षरशः तो ठीक से याद नही है लेकिन सारांश ये था कि जैसे इंसान की जिंदगी की घटनायें ग्रह नक्षत्रों की स्थितियों से प्रभावित होती हैं उसी तरह से किसी स्थान विशेष पर भी इनका प्रभाव पड़ता है। इसलिये जब किसी जगह या वस्तु का खराब समय चल रहा हो तब अगर उस स्थान पर कोई भी प्रवेश करता है तो उस पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। मसलन अगर कोई बस या ट्रैन या हवाई जहाज जो समूह में लोगों को लेकर चलते हैं, किसी ऐसे वक्त में उस जगह में प्रवेश करते हैं जिस जगह का वक्त उस समय खराब चल रहा होता है तो ये घटनायें होती हैं जिसमें सामूहिक नुकसान पहुँचता है। ऐसे में ग्रह-नक्षत्रों की आपसी लड़ाई में जो जितता है विजय उसकी होती है अर्थात अगर किसी व्यक्ति विशेष के ग्रह नक्षत्र उस स्थान विशेष के ग्रह नक्षत्रों से ज्यादा शक्तिशाली होते हैं तो उस व्यक्ति को कोई नुकसान नही पहुँचता और वो इस दुर्घटना से बच निकलता है। फिर उसके लिये हम कहते हैं जाको राखे साईंया और कई बार ऐसे समय में माध्यम बन जाते हैं कुछ लोग जिनका संघर्ष और बचने बचाने की कोशिश उनके अंदर के हीरो को जिंदा कर देती है और वो मिसाल बन जाते हैं। अभी पिछले सप्ताह न्यूयार्क शहर की हडसन नदी में इसी तरह का प्लेन क्रैश हुआ जो पायलट की होशियारी और हिम्मत से महज एक प्लेन लैंड हो कर रह गया और उसमें सवार सभी लोग सकुशल बच गये।
बृहस्पतिवार का वो दिन शायद इस जाड़े का सबसे ठंडा दिन होगा जब ये घटना हुई। दिन के वक्त बाहर का तापमान था -९ डिग्री सेंटिग्रेड जिसे ठंडी हवायें -१७ डिग्री जैसा महसूस करा रही थीं। ऐसे में हडसन नदी के पानी की ठंडक का ऐहसास ही कंपकंपी छोड़ने के लिये काफी था। मैं जिस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था अगले दिन उसे रीलिज होना था तो मैं लास्ट मिनट की डिटेलस में व्यस्त था, तभी मेरे एक साथी ने आकर बताया कि यूएस एयरवेज का एक प्लेन हडसन नदी में गिर गया है। ये उसी समय हुआ था और जहाँ घटी थी वो जगह हमारे आफिस के बहुत पास थी (हमारा आफिस भी हडसन के किनारे ही है और सुबह के वक्त जो ठंडी हवायें चलती है बयाँ नही कर सकता)। कुछ देर के बाद पता चला कि लोगों को बचाया जा रहा है और अंत तक सभी लोग बच गये। पायलट ने बहुत ही होशियारी से हडसन नदी में उस हवाई जहाज को लैंड कराया था और शहर के बीच में होने की वजह से तुरंत ही Rescue worker भी वहाँ पहुँच गये। जिनके साथ ये हुआ वो शायद ही कभी इस बात को भूल पायेंगे और ना ही उस पायलट Captain Chesley Sullenberger को जिसकी होशियारी और हिरोइज्म की वजह से उन सब की जान बची थी।
ये विडियो देखिये, किस कुशलता से वो हवाई जहाज पानी में लैंड कराया गया था -
Chesley Sullenberger spent practically his whole life preparing for the five-minute crucible that was US Airways Flight 1549.
He got his pilot’s license at 14, flew fighter jets in the Air Force, investigated air disasters, mastered glider flying and even studied the psychology of how cockpit crews behave in a crisis.
When the ultimate test came on a descent over the Hudson River, he spoke into the intercom only once and gave perhaps the most terrifying instruction a pilot can give — “Brace for impact” — with remarkable calm.
खैर इस तरह की घटनाओं के घटित होने की जो भी वजह हो लेकिन इनसे बचकर आने वालों को देखकर, उनके बारे में सुन या पढ़ कर हम यही कहेंगे - जाके राखे साईंया, मार सके ना कोय, बाल ना बाँका हो सके जो जग बैरी होय।
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This post has 13 comments
January 20th, 2009
रुह काँप जाती है देख कर. वाकई, जाको राखे सांईयां मार सके न कोए..चरीतार्थ हो गई इस घटना में. बहुत आभार इस विडियो का.
January 20th, 2009
शुक्रिया इस वीडियो को यहां दिखाने के लिये।
January 20th, 2009
शुक्रिया तरुण इस लोमहर्षक घटना के वीडियो रिप्ले के लिए और प्रभावपूर्ण प्रस्तुति के लिए भी ! सारी क्रेडिट पायलट को ही है जैसे उन ताउम्र अपने को इसी हादसे के ट्रेन कर रखा था ! और हाँ ऐसी घटनाओं के कारणों का आपका विवेचन -आपकी संकल्पना बहुत रोचक है मगर इसे विज्ञान की पद्धति पर जाँचना होगा ! आपकी यह पोस्ट याद रहेगी ! आज कुछ ऐसा ही नक्षत्र काल है कि बहुत उम्दा पोस्टें आज दिख रही है -समीर जी की भी आज की पोस्ट पढ़ना मत भूलियेगा !
January 20th, 2009
इसी प्रकार की घटनाओं ने तो इस कहावत को जन्म दिया होगा।
January 20th, 2009
जिसको ईश्वर बचाए उस पर से हर विपदा ताल जाए ..सही हुई है यह बात इस भयानक हादसे को देख कर
January 20th, 2009
“बाप रे बाप, कितना खतरनाक हादसा होते होते रह गया, आज तो ये कहावत यहाँ सार्थक हो ही गयी…”
Regards
January 20th, 2009
भई अपना तो साईं में विश्वास है नहीं इसलिए अपन तो इसको विमान चालक और उसके सह चालक आदि की समझदारी और दिलेरी ही कहेंगे, बधाई के पात्र तो वही हैं न कि साईं। यदि जहाज़ में पंगा हो जाता और कोई न बचता तो कोई साईं को दोष न देता, तो जो नुकसान का ज़िम्मेदार हो सकता है वही लाभ का भी होना चाहिए!
January 20th, 2009
किस्मत ओर मुश्किल वक़्त पर साहस की तत्परता ….या फ़िर जाके राखो ….
January 20th, 2009
कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे इसे।
जब जहाज यात्रियों से भरा था तब ड़ूबा नहीं। सब के बच जाने पर उसने भी समाधी ले ली।
January 20th, 2009
बहुत अच्छा किया आपने यह वीडियो दिखाया वर्ना ऐसी घटना देखने से वंचित रह जाते और अखबारों मे जो छपा उसको देख भी लिया.
रामराम.
January 20th, 2009
सही लिखा आपने। मैं नहीं समझता कि थ्योरी ऑफ प्रॉबिबिलिटी से यह विलक्षण घटना समझाई जा सकती है।
January 20th, 2009
इस दुर्लभ क्षणों को उपलब्ध करवाने एवं
ईश्वर की महत्ता प्रमाणित करने का आभार ।
January 20th, 2009
Bahut badiya khabar Tarun ji…sahi bola aapne Jako Rakhe Sayiyaan Mar sake na koi….sach baat hai bhai,,
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