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माइनस डिग्री तापमान, फुटबाल मैच और कुछ अधनंगे लड़के लड़कियाँ

November 23rd, 2008 | 11 Comments | Posted in बस यूँ ही

आज सुबह यहाँ का तापमान था जीरो डिग्री, जिसे ठंडी हवाओं ने माइनस सात डिग्री (-7 सेंटिग्रेट) पहुँचा दिया था और ऐसे में हमें जाना था अपने बेटे के आखिरी फुटबॉल मैच के लिये। ठंड का अनुमान तो फील्ड में पहुँचने पर ही लगा, लेकिन ये कमाल के बच्चे थे ऐसी ठंड में भी रोते हुए मैच खेलने की ठान के निकले थे (ठंड से आंख, नाक दोनों जगह से पानी आ रहा था)। टोरनेडो (बच्चे की फुटबॉल टीम) का ये सीजन अच्छा रहा, सात में से ४ मैच जीते, १ बराबर किया और २ हार गये।

ठंड में भी जैकेट, दस्ताने और टोपी संभालते संभालते टोरनेडो ने अपना आखिरी मैच जीत कर सीजन समाप्त किया और हम अपने ठंड से जम चुके हाथों को किसी तरह संभाल के घर की और रूखसत हो लिये। ठंडी हवा का नजारा सीधे खड़े रहने वाले कोर्नर के झंडे को देख कर लगाया जा सकता है, जिसे हरदम खड़े रहना चाहिये वो जमीन चूमने को कितना बेताब हुए जा रहा है

अब बात टाईटिल के दूसरे हिस्से की, कल रात जब मैं आफिस से घर वापस आने के लिये ट्रैन स्टेशन की तरफ जा रहा था तो देखता हूँ स्टेशन के ठीक सामने कुछ लड़के-लड़कियों का झुंड (शायद २५ के ऊपर के ही होंगे सब) फोटो खिंचवाने को खड़ा था। अपन और ज्यादातर सभी सिर-कान से लेकर पाँव के अंगुठे तक पैक थे लेकिन देखता हूँ कि इनका ये ग्रुप अचानक अपने बाहर के कपड़े उतार देता है, लड़कों के बदन पर रह जाते हैं सिर्फ कच्छे (अंडरवियर) और लड़कियों के ब्रा और कच्छे। इधर उधर गुजरते सब लोग उनको ही देखने लगते, मैं उनको क्रॉस करते हुए एक उड़ती नजर डालता हूँ तो हायला ये क्या वो लड़के लड़कियाँ जो सबसे पीछे खड़े हैं, जिनका फोटो में चेहरा भी मुश्किल से आयेगा वो भी कपड़े उतारे फोटो खिंचवा रहे थे।

अब इसे क्या कहूँ पागलपन या जोश में होश खोती जवानी के लम्हों को संजो कर रखने की एक अनोखी और यादगार कोशिश जिसे दिवार में टांगकर तो रख नही सकते, किसी आल्मारी में ही रखना पड़ेगा।

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11 Responses to “माइनस डिग्री तापमान, फुटबाल मैच और कुछ अधनंगे लड़के लड़कियाँ”

  1. Dr.Arvind Mishra Says:

    संस्मरणात्मक !

  2. परमजीत बाली Says:

    अब यही हमारी नयी पीड़ी है।जोश बहुत है लेकिन होश नही है।अच्ची पोस्ट लिखी है।बधाई।

  3. ताऊ रामपुरिया Says:

    “टोरनेडो ने अपना आखिरी मैच जीत कर सीजन समाप्त किया ”

    बधाई बेटे को इस जूनून के साथ फूटबाल खेलने के लिए और शानदार सीजन समाप्ति के लिए ! असल में बचपन की यही आदते ही आगे बड़ा काम करने का जज्बा और हौसला देती हैं ! बच्चो की इन आदतों को बड़े अपने त्याग से आगे बढाते हैं जैसे अभी अआप इतनी ठण्ड में उसको लेकर जारहे हैं ! यही आगे आदत हो जायेगी ! आपको बहुत धन्यवाद !

    दूसरा फोटो वाला कार्यक्रम क्या कोई फेस्टिवल के तहत हो रहा था या शुद्ध रूप से मस्तीखोरी ? :)

  4. ज्ञानदत्त पाण्डेय Says:

    दूसरे वाले कार्यक्रम के समय आपका कैमरा कहां गया था! :-)

  5. Abhishek Ojha Says:

    इन बच्चों के जूनून को सलाम ! और दुसरे इवेंट की फोटो के बिना मामला कुछ जमा नहीं :-)

  6. अशोक पाण्‍डेय Says:

    जो फोटो खिंचवाने के लिए खड़े थे, उनकी फोटो तो लेनी चाहिए थी :)

  7. Tarun Says:

    कैमरा तो हर समय रहता है साथ फोन में लेकिन उस इवेंट की फोटो ना लेने की दो वजह थीं – पहली २ मिनट में ट्रैन निकलने वाली थी और मेरा एक Appointment था जहाँ वक्त पर पहुँचना था और दूसरी मूझे अच्छा नही लगा कि मैं फोटो लूँ।

    ये कोई ईवेंट के तहत नही हो रहा था, टोटल मस्तीखोरी थी।

  8. अनूप शुक्ल Says:

    वाह, वा! बधाई!

  9. ghughutibasuti Says:

    बेटे के मैच जीतने पर बधाई । दूसरा फोटो नहीं लिया यही उचित भी था । कपड़ों का होना या न होना तो कारण हो सकता है उसके अलावा भी हम किन्हीं अन्य लोगों का फोटो उनकी अनुमति के बिना न ही लें तो बेहतर है ।
    घुघूती बासूती

  10. amit Says:

    ठंड में कपड़े उतारने की यह कोई बड़ी बात नहीं!! अभी 1-2 वर्ष पहले पढ़ा था कि दिसंबर की सर्दियों में ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में एक बड़ा कपड़ों का स्टोर खुला था और उन्होंने घोषणा की थी कि सुबह पाँच बजे जो लोग नग्न अवस्था में स्टोर में आएँगे उनको कपड़े मुफ़्त दिए जाएँगे। लेख से बाजू में फोटू छपा था कि कैसे सैकड़ों लोगों की कतार (सभी जवान लोग थे 20-35 के बीच और लड़के और लड़कियाँ दोनों थे) नग्न खड़ी थी स्टोर के बाहर और सबको फोकटी कपड़े मिले!! ;)

  11. Rewa Smriti Says:

    Hmmm…gazab ke log hein yesab…dimag ko dukan mein bech dete hein. :(

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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