Archive for October 2008

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आदमी को क्या चाहिये

क्या आप जानते हैं कि एक आदमी को क्या चाहिये? अगर नही और जानना चाहते हैं तो हमारी शब्दों के साथ खेलने की कोशिश पर नजर दौड़ाईये।
आदमी को चाहिये चबाने को दाँत और पेट में आँत
नेता को चाहिये कुछ घूँसे और संसद में चलाने को लात।
आदमी को चाहिये दो वक्त की रोटी और पीने को [...]

गीत गाता चल में एक नया प्रयोग

मैने जब गीत गाता चल पर मिली प्रति टिप्पणी पर ये पोस्ट लिखी थी तो उसमें दिनकरजी की टिप्पणी आयी थी -
बहरहाल मुझे तो आपका गीत गाता चल अच्छा नहीं लगा निठल्ला चिन्तन और कन्ट्रोल पैनल के ब्लागर से एसे ब्लाग की उम्मीद नहीं थी
सिर्फ गीत की सामान्य तरीके से प्रस्तुति तो आम [...]