जीना सिखाती ये तस्वीरें
कहते हैं एक तस्वीर कई बार हजार शब्दों से ज्यादा प्रभावी होती है, कई बार ऐसा होता है कि मुश्किलों के आगे और कई तरह की असुविधाओं के चलते हम लोग थोड़ा डाउन महसूस करते हैं। और ऐसे समय में अगर इन लोगों को इन तस्वीर के जरिये देखें तो शायद यही कहना पड़ेगा - जीना सिखाती ये तस्वीरें।
अगर आपको लगता है कि सिर्फ आप ही है जो खुश नही हैं या सुखी नही हैं तो इन्हें देखिये

अगर आपको लगता है कि आपकी तनख्वाह सबसे कम है तो इसके बारे में क्या सोचते हैं

अगर आपको लगता है कि आपके ज्यादा दोस्त नही हैं या बहुत कम हैं तो इनकी सोचिये

जब आप थक हारकर हिम्मत छोड़ने की सोचें इस व्यक्ति की तरफ देखियेगा

अगर आपको लगता है जिंदगी में आप ही सबसे बड़ी परेशानी उठा रहे हैं तो एक नजर इधर भी डालिये

जब अपने ट्रांसपोर्ट सिस्टम को लेकर शिकायत करने का मन हो तो इनके ट्रांसपोर्ट सिस्टम को देखिये

अगर आपको लगता है कि आपका समाज आपकी चिंता नही करता, तो इनकी हालत देखिये

जिंदगी के मजे लीजिये यही सोचकर कि जैसे जीने को सिर्फ आज है, जिंदगी जैसे जैसे आती जाये वैसे वैसे जीते जाओ क्योंकि इस दुनिया में और भी कई ऐसे लोग हैं जो हम से भी बदतर जिंदगी जी रहे हैं, जिनके लिये हमसे कहीं अधिक मुश्किलें हैं।
इस दुनिया में ऐसी कई चीजें है जो हमारी आखों को बहुत अच्छी लगती है, इन्हें बहुत भाती हैं लेकिन कुछ ही चीजें होती हैं जो दिल को पसंद आये। और जो दिल को पसंद आये हमें उन्हें ही पाने की कोशिश करनी चाहिये।
कहीं सुख है कहीं दुख, कभी खुशियाँ कभी गम, शायद यही जिंदगी है।







मुझे ईमेल से ये चित्र प्राप्त हुए, इन्हें पोस्ट करने का सिर्फ एक ही मकसद है कि खुश रहने के लिये हमेशा अपने से नीचे या कम सुविधा प्राप्त या किसी गरीब की तरफ देखो और आगे बढ़ने के लिये या कुछ सीखने के लिये या कुछ बनने के लिये अपने से ज्यादा सुविधा संपन्न की तरफ देखो। दोस्ती फिल्म का वो गीत है ना -
राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है दुख तो अपना साथी है
सुख है एक छाँव, ढलती आती है जाती है
(गाने का विडियो अगर देखना चाहते हैं तो गानों के बोलों पर क्लिक करिये, राजश्री वालों ने Embeding बंद की हुई है।)
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This post has 26 comments
September 26th, 2008
behatarin photos….
sahi tasvir zindagi ki ……..
September 26th, 2008
bahut badiya hai. jindlgi ki ek aur saccahi saamne aa gyi.
September 26th, 2008
in chitron ko dekh kar samjh nahi aa raha hai ki kya kahu…..sabhi mai kuch n kuch shabad hai hai jo bahut kuch bol rahan hain….
September 26th, 2008
आँख नम है और जुबाँ खामोश
September 26th, 2008
तस्वीर जिंदगी की बनवातें हैं सब यहाँ
जैसी जो चाहता है बन पाती है लेकिन कहाँ ?
September 26th, 2008
सोचने को विवश करती तस्वीरें -शुक्रिया !
September 26th, 2008
तरूण जी, आपने सही कहा- यदि हम अपनी स्थिति से असंतुष्ट हैं तो अपने से नीचे तबके को देखें। आपने तो वो तस्वीर दिखा दी, जो बद से बदतर हालत में जीने को मजबूर हैं। ऐसी तस्वीरें कई बार अपने किए उन तमाम लफ्फाजी को खोखला सिद्ध कर देती है, जो हम अपने हक के नाम पर समाज और परिवार से बहस में करते हैं।
September 26th, 2008
पहले देखी थी, आपने फिर से ताज़ा कर दी.
September 26th, 2008
मार्मिक सत्य उकेरा है आपने। बधाई।
September 26th, 2008
जीने की राह दिखाता सच्। आभार आपका आंखो पर धीरे-धीरे छा रहे भ्रम के मोतिया को साफ़ करने का।
September 26th, 2008
जिंदगी की यही सच्चाई है ।
फोटो तो कह ही रही है साथ ही आपके लिखे कैप्शन भी ।
September 26th, 2008
खुश रहने के लिये हमेशा अपने से नीचे या कम सुविधा प्राप्त या किसी गरीब की तरफ देखो और आगे बढ़ने के लिये या कुछ सीखने के लिये या कुछ बनने के लिये अपने से ज्यादा सुविधा संपन्न की तरफ देखो।
तस्वीरों के साथ 2 आपका उपरोक्त संदेश बहुत सुंदर बन पडा है ! आपको बहुत धन्यवाद ! ऐसा ही ज्ञान देते रहिये !
September 26th, 2008
मारमिक तस्वीरे है. सच कि तस्वीरे.
September 26th, 2008
बहुत बढिया पोस्ट है।
September 26th, 2008
तस्वीरे बोलती हैं ..कई तो बहुत दर्दनाक है …
September 26th, 2008
कुछ तसवीरें तो झकझोर के रख देती हैं !
September 26th, 2008
ठीक कहते हो……आखिरी वाली मेरे पास भी एक दोस्त ने मेल से भेजी थी….भूख ओर अन्न से सम्बन्ध में.
September 26th, 2008
शब्द खामोश।
September 26th, 2008
वो गीत याद आ गया - दुनिया में कितना गम है, अपना गम कितना कम है..
आपकी संवेदनशीलता को नमन।
September 26th, 2008
hakikat se rubaru karane ke liye aabar.
September 27th, 2008
Jis prakaar honto se behtar jubaan ankho ki hoti hai, usi prakaar lame lekh se behtar expression aapke photos aur unke captions me hai
prakash chandalia
kolkata
September 27th, 2008
बिना बकबक किये बहुत बडा सच कहा आपने !!
September 27th, 2008
फ़िर देखी। फ़िर अफ़्सोस हुआ कैसे लोग रहने के लिये मजबूर हैं।
September 27th, 2008
UPSET ME
September 27th, 2008
Stark reality of life astouds the senses & numbs us into speechlessness
September 29th, 2008
Aisa hona nahi chahye bahut dukh hota hai aisa dakhkar. very bad
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