अनिश्चित काल के लिये निठल्ला चिंतन बंद
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि निठल्ला चिंतन अनिश्चित काल के लिये बंद करना पड़ रहा है। निठल्ले के अचानक से त्याग पत्र देने की वजह से ऐसा किया जा रहा है। निठल्ले को मनाने और वापस लाने के लिये हमारी बातचीत जारी है लेकिन ये जल्दी होता नही दिख रहा।
ये अभी तक पता नही चल पाया कि साढ़े चार साल से निरंतर बकवास करते रहने के बाद अचानक निठल्ले ने चुप्पी क्यों साध ली। निठल्ले के बिना चिंतन करने का कोई औचित्य हमें नजर नही आता इसलिये हम भी फिलहाल के लिये यहाँ से किनारा कर रहे हैं।
हम उन सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहते हैं जो निरंतर आकर चिंतन पढ़ते रहते थे, उनके प्यार, सौहार्दय और सानिध्य के लिये हम दिल से आभार व्यक्त करते हैं। साथ ही उन लोगों का तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं जो बगैर इस बात को देखे कि हम उनके ब्लोग पर टिपियाते हैं कि नही फिर भी निरंतर टिप्पणी से हमारा उत्साह बढ़ाते रहे।
आप सभी लोगो को आगे बढ़ने के लिये बहुत बहुत शुभकामनायें और भूले भटके इस पोस्ट तक आने वालों की नजर ये गीत करते जा रहे हैं। धन्यवाद।
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आखिर क्या हो गया? चलिए इंतज़ार रहेगा फिर मिलने का।
५ दिन की लास वेगस और ग्रेन्ड केनियन की यात्रा के बाद आज ब्लॉगजगत में लौटा हूँ. मन प्रफुल्लित है और आपको पढ़ना सुखद. कल से नियमिल लेखन पठन का प्रयास करुँगा. सादर अभिवादन.
इंतज़ार रहेगा!!
उम्मीद करते है कि जल्दी ही वापस आयेंगे। बहुत ही अच्छा गीत सुनवाने के लिए धन्यवाद।
Ganimat hai anishchit kaal ke liye hai… matlab kal bhi wapasi ho sakati hai. Agar wapasi ke liye kuchh andolan jaisa karna pade to bataiyega !
छुट्टी पर जा रहे हो भाई ?
निठ्ठले भी हो और व्यस्त भी!! बात हज़म नहीं हुई
जाना जुवाना छोड़ो, अगला लेख कब आ रहा है बताओ…
हे तरुण मैं तुहारी /आपके अगले (क्या इसी ?) पोस्ट के लिए पलक पावडे बिछाए बैठा था पर यह तो शोकिंग है कब लौटोगो भाई !
अरे, निठल्ला ज्यादा समय चुप रह कर बोर नहीं हो जायेगा? उसे मनाने में लगे-जुटे रहिये!
निठल्ले को मनाइए भइया, नहीं तो हमें जिया सराय बेर सराय वाले छड़ा छड़ी के किस्से कौन सुनाएगा
अले जे क्या है जी? आपका चिन्तन पढ़ के हमे सहारा मिलता था कि बकवास करने में अपन ही आगे नहीं हैं वरन् अपने जैसे और लोग भी मौजूद हैं! हुण साड्डा की होगा??!!
तरुण जी, भाई ऐसी भी क्या नाराजी ? कल ही तो आपने ताऊ से
जान पहचान की ! आज ताऊ थमनै ढुन्ढता २ मुश्किल से
थारै अड्डै पर पहुंचा है ! और आप अड्डा बंद करने की गंगा
बहाने लग रहे हो ! ये नही चलेगा ! या फ़िर आप मजाक तो
नही कर रहे हो ? देखते हैं कल चिठ्ठा चर्चा आप करने वाले हो !
उससे अंदाज लग जायेगा ! वैसे आप बंद क्यूँ कर रहे हो ? और
ताऊ को जैसे आपकी आग और लोमडी (फायर फॉक्स) नही समझ
आया था ! वैसे ही ये निठ्ठल्ला कौन है ? जो हमारे तरुण भाई
को नखरे दिखा रहा है ! भाई मेरा लट्ठ ले जा !
और इसके खुपडिया पे बजा दे , दो चार !
अपने आप मान जायेगा !
गारंटेड इलाज सै यो !
Tarun ji Namskar
aap acha likh rahe ho likhte rahiye.
Anand Rana (Lamgara Almora)
Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration,
Mussoorie
साहेब बधाई साढ़े चार साल पूरे होने की।