Archive for August 2008

You are browsing the archives of 2008 August.

प्रेम कविता

जिन्हें अब तक नही मालूम उन्हें बता दें कि यदा कदा हम भी कविता जैसे शब्द कागज में उड़ेल लेते हैं। ये अलग बात है कि उसमें प्रेम या श्रृंगार रस नही के बराबर पाया जाता है। लेकिन ऐसा नही है कि हम शब्दों को प्रेमरस या श्रृंगार रस की चासनी में भिगोने का प्रयास [...]

क्या इसे धर्मनिरपेक्षता की मिसाल मान सकते हैं?

मैंने कई बार इस देश और इस देश के वाशिंदो (हमें भी गिना जाये) पर संशय किया है, उनके धर्मनिरपेक्ष होने और उनकी धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाये। लेकिन आज इस खबर को पढ़कर मुझे लगा कि मेरी इस सोच को पुनर्विचार की जरूरत है। क्या अब हम वाकई सही मायनों में धर्मनिरपेक्षता की मिसाल कहे [...]