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भस्मासुर को मिला वरदान है धर्मनिरपेक्षता

आप लोगों ने भस्मासुर का नाम तो सुना होगा अगर नही तो मैं बता दूँ भस्मासुर एक राक्षस था जिसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिये कठोर तपस्या की। शिव के प्रसन्न होने पर उसने वरदान माँगा कि वो यानि भस्मासुर जिसके सिर पर भी हाथ रखे वो भस्म हो जाये। शिव तो ठेरे भोले बाबा, ना आगे सोचा ना पीछे दे दिया वरदान। भस्मासुर भगवान शिव की सोच से ज्यादा होशियार निकला, उसने सोचा कि क्या ये वरदान वाकई में काम करेगा और शिव के दिये वरदान को टेस्ट करने के लिये, वेरिफाई करने के लिये उसने यानि भस्मासुर ने शिव के सिर पर ही हाथ रखने के लिये अपना हाथ ऊपर उठाया। खुद का दिया ये वरदान शिव के ही गले की हड्डी बन गया, जिसका तोड़ निकालते हैं तो उनके छवि की ही बाट लगती है और अगर सिर पर हाथ रखने देते तो उनकी।

खैर फिर भगवान शिव की जान बचाने के लिये भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धर के भस्मासुर को खुद के ही सिर पर हाथ रखने को मजबूर कर, उसी को मिले वरदान से नेस्तनाबुद कर दिया। और भारत के लिये कुछ इसी तरह का वरदान है धर्मनिरपेक्षता का तमगा।

धर्मनिरपेक्षता का तमगा लगा शायद भारत ही सिर्फ एक देश है, पाकिस्तान नही है (संप्रदाय से मतलब नही है, जैसे शिया सुन्नी) वहाँ शायद ही कभी धार्मिक दंगे होते हैं, नेपाल नही है वहाँ भी शायद ही धर्म के नाम पर दंगे होते हैं। ना ही अमेरिका, ब्रिटेन, बांगलादेश, चीन, ईरान, तुरान, रूस इत्यादि जैसे देशों में धार्मिक दंगों की कोई खबर नही आती। इन सभी देशों में अलग अलग धर्मों के लोग भी रहते ही हैं। भारत है धर्मनिरपेक्ष राज्य और यहाँ धार्मिक दंगे तो अक्सर ही सुनने को आते हैं चाहे खुले आम हों या फिर शक्ल बिगाड़ कर। यानि देश ने जिस धर्मनिरपेक्षता का तमगा लिया दूसरों पर असर डालने के लिये वो अपने ही लोगों की जान का दुश्मन बन गयी है। बाबरी मस्जिद को लेकर मचा हंगामा हो या अमरनाथ को लेकर चल रही उठापटक ये दोनों ही भारत की धर्मनिरपेक्षता के तमगे में चार चांद का काम कर रही है। और ऐसे छोटे छोटे कई अन्य सितारे भी हैं जो यदा कदा चमकते रहते हैं।

अब बस जरूरत है विष्णुरूपेण किसी मोहिनी की जो आये और आकर देश की जनता को यदा कदा चुभने वाले इस धर्मनिरपेक्ष तमगे से मुक्ति दिलाये। ये सब लिखकर मैं कोई हिन्दूवादी नही होना चाहता, ना ही कोई अलगाववादी या कुछ अन्य तरह का वादी, मकसद सिर्फ यही है कि आखिर कब तक धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देकर, उसके नाम के अलाव में नेता और इनकी राजनेतिक पार्टियाँ अपनी अपनी रोटी सेकतीं रहेंगी और निरीह जनता को धर्मनिरपेक्षता की इस ज्योति को प्रजवल्लित करने के लिये अपनी आहुति देते रहनी पड़ेगी।

[मैं बालेन्दुजी का जम्मू काश्मीर के ऊपर लिखा ये आलेख पढ़ रहा था, इसे पढ़कर मेरी समझ नही आया कि किस तरह से टिप्पणी करूँ कि वो उसी चर्चा का हिस्सा लगे, लेकिन मन में ये विचार कौंधा तो उसे यहाँ उड़ेल दिया।]

दोहरी नागरिकताः यानि की दूसरे दर्जे की नागरिकता, मेरी समझ से, जिसे ये मिली होती है उसे थोड़े कम अधिकार होते हैं मसलन वो वोट नही कर सकता।

अब इसे बूझें: जम्मू काश्मीर के लोगों को वोट देने का अधिकार तो है ही साथ ही साथ ये भी अधिकार है कि वो देश के किसी भी हिस्से में जमीन इत्यादि खरीद सकते हैं। जबकि भारत देश के राज्यों के अन्य नागरिक उनकी तरह ही वोट दे सकते हैं और देश के अन्य हिस्सों में भले ही जमीन खरीद सकते हों लेकिन जम्मू काश्मीर में नही। यानि कि इनके अधिकार जम्मू काश्मीर के लोगों की तुलना में थोड़े कमतर हुए ना। अब क्या आप भारत देश के दूसरे दर्जे की नागरिकता प्राप्त लोगों की जनसंख्या बता सकते हैं।

[अगर ऊपर लिखी मेरी बात गलत है तो इस बूझें पहेली को पूरी तरह से अवैध मानें और मुझे भी बतायें जिससे मैं इसे डिलीट कर सकूँ।]

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19 Responses to “भस्मासुर को मिला वरदान है धर्मनिरपेक्षता”

  1. अनूप शुक्ल Says:

    चिंता जायज है। मोहिनी के आने में देर काहे हो रही है। लगता है या तो विश्वमोहनी मेकअप कर रही हैं या शायद अभी बात भगवान की जान तक नहीं पहुंची।

  2. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    नहीं कोई मोहनी नहीं आएगी, खुद ही कुछ करना पड़ेगा।

    आजाद है भारत,
    आजादी के पर्व की शुभकामनाएँ।
    पर आजाद नहीं
    जन भारत के,
    फिर से छेड़ें संग्राम
    जन की आजादी लाएँ।

  3. Raaj Says:

    Mohini tu Ab to Aaja…but what’s the answer?

  4. लावण्या Says:

    हर व्यक्ति हिमालय बन जाये,
    हर शक्ति हिमालय बन जाये,
    किन किन को लाँधेगा दुश्मन ?
    - लावण्या

  5. समीर लाल Says:

    कौन मोहनी?? कहाँ है?? होती है क्या कोई मोहनी?? प्रश्न ही प्रश्न-जबाब एक्को नहीं!!!

    छोड़ो:

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

  6. yoginder moudgil Says:

    शुभकामनाएं पूरे देश और दुनिया को
    उनको भी इनको भी आपको भी दोस्तों

    स्वतन्त्रता दिवस मुबारक हो

  7. mamta Says:

    स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं।

  8. सिरिल गुप्ता Says:

    I agree with your riddle, but not with the inappropriate usage of ‘secularism’. It’s a word that ought to be respected. The meaning holds a lot more than it’s used for.

    Selfish politicians on both sides of the divide use like a swear word, and they’ve degraded the meaning.

  9. Tarun Says:

    @Cyril, that is what happenning here in India, just a plain mis-use of secularism. There is no use of only respecting a word, it’s better to respect every religion and their belief. And I agree meaning holds lot more but this is not how it’s being used.

    Aap sabhi ko: स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं।

  10. राजीव रंजन प्रसाद Says:

    तरुण जी,

    आपने गंभीर प्रश्न उठाया है। धर्मनिर्पेक्षता के लिये भस्मासुर सही संकल्पना है..सचमुच शिवशंकर के हालात से देश गुजर रहा है। कश्मीर को भार का हिस्सा न तो वो अलगाववादी मानते हैं जिन्हे सरकारी टुकडों पर पलने की सहूलियत है न ही हमारे दृष्टिकोण विहीन राजनेता।

    तथापि आशावादिता कहती है “वो सुबह कभी तो आयेगी…”

    स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें..

    ***राजीव रंजन प्रसाद

    http://www.rajeevnhpc.blogspot.com
    http://www.kuhukakona.blogspot.com

  11. अरूण Says:

    मोहिनी अब आ ही जाओ कही ये तुम्हारे आने तक सर्वनाश कर ही ना डाले :

  12. संजय बेंगाणी Says:

    कोई टिप्पणी नहीं….

    स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं।

  13. DR.ANURAG Says:

    सब जगह राजनीति है ओर अपना स्वार्थ है जहाँ जातिवाद इतना फैला हो वो धर्मनिरपेक्षता की बात कैसे कर सकते है ?नापंसुक राजनीती है…..इस देश का भला अब भगवान् भी नही कर सकता ….अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया

  14. अशोक पाण्‍डेय Says:

    धर्मनिरपेक्षता गुण है, अवगुण नहीं। लेकिन इस देश के स्‍वार्थी राजनेताओं व निहित स्‍वार्थ वाले बुद्धिजीवियों ने इस शब्‍द के अर्थ का ही अनर्थ कर डाला है। इस प्रवृत्ति की भर्त्‍सना होनी ही चाहिए।
    सच तो यह है कि तुष्टिकरण करनेवाले लोग धर्मनिरपेक्ष है ही नहीं, वे घोर सांप्रदायिक हैं। वे वोट हासिल करने के लिए संप्रदायवाद को हवा देते हैं। आपने जिस पहेली की चर्चा की है, वह इसी का देशद्रोहपूर्ण उदाहरण है।
    स्‍वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

  15. Amit Gupta Says:

    Cyril, I think what Tarun wanted to say was that “secularism” holds just that much value in India as what “democracy” holds. In their own right both these mean much more, heck, the point is that they mean something good, but thanks to the senile & idiot politicians who’ve ruled the country for last 61 years, the meanings of these words have been lost in the gutters of ill-conceived politics and new evil meanings have been forged which just reflect the pain of every Indian whether he knows it or not!

    India is just staggering along on mindless rules & regulations formed ages ago most of which are not even useless but a heavy burden in these times in their original form. Things need to evolve but our system & administration has not evolved, atleast not for good. On face India is world’s largest democracy but for more than 50 years of independence we, the common citizens, were not even allowed to hoist our own flag, the revered tricolour which we identifies us on this world stage!! That privilege was an exclusive right for the govt. sponsored entities!!

  16. Gyan Dutt Pandey Says:

    अगर वोट बैंक के आधार पर सरकार का चयन बन्द हो तो यह समस्या हल हो सकती है। पर जनता और नेता को चुनाव की अफीम का स्वाद भूलना होगा!

  17. Anunad Singh Says:

    दोहरी नागरिकता या अल्पाधिक अधिकार वाले और भी उदाहरण हैं जो धर्मनिरपेक्षता का खुलेआम माखौल उड़ा रहे हैं:

    १) अलपसंख्यक अपना विद्यालय/महाविद्यालय/विश्वविद्यालय खोल सकते हैं और उसमें मजहबी शिक्षा दे सकते हैं।

    बहुसंख्यक नहीं!!!!

    २) कुछ को चार बीबियाँ रखने और उन्हें ‘इन्स्टैन्ट’ तलाक की आजादी है; कुछ के लिये ऐसा करना भारी अपराध है।

    ३) एक दूसरे देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये कुछ लोगों को सबसिडी दी जाती है। अपने ही देश में तीर्थयात्रा करने के लिये मौलिक सुविधाओं नहीं दे पाते।

    सूची लम्बी है…

  18. Brijesh Saini Says:

    jo khud ko na pahchan paye vo mohini ko kaise pahchanege. mohini humre khud kay andr hai bus der hai to khud andr jhaknay ki, khud ko jagrat krnay ki, khud jagrat ho gye to sayad kuch kar paye. Bhole baba to majboor the bhagvan jo tahre. hum to majboor nai, hum to lachar nai. hum kyu kisi ko dosh de rhe hai jub hum khud hi doshi hai. kyu hum sirf baato may hi baat bnaa rhe hai kuch krne ka dum kyu nai hai. pahle khud ko jitna hoga pahle khud ko samjna hoga sayad fir hum es desh ko bhi jagrat kar sake, kyu khud sote rhe to dehs ko kaise jgaa payege.

  19. Balendu Sharma Dadhich Says:

    तरुणजी आपने मेरा आलेख पढ़कर यह विचारोत्तेजक आलेख लिखा, उसके लिए साधुवाद। आपकी बातों पर मनन, मंथन और बहस की जरूरत है और उसके बाद एक मजबूत एवं सटीक निर्णय की भी।

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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