प्रेम कविता

जिन्हें अब तक नही मालूम उन्हें बता दें कि यदा कदा हम भी कविता जैसे शब्द कागज में उड़ेल लेते हैं। ये अलग बात है कि उसमें प्रेम या श्रृंगार रस नही के बराबर पाया जाता है। लेकिन ऐसा नही है कि हम शब्दों को प्रेमरस या श्रृंगार रस की चासनी में भिगोने का प्रयास नही करते, बिल्कुल करते हैं जी। देखिये लास्ट टाईम जब हम ये ट्राई कर रहे थे तो शब्दों का क्या हुआ, लेकिन हम भी हार मानने वालों में से नही हैं किसी और दिन फिर से कोशिश करेंगे।

प्रेम कविता
प्रेम कविता लिखने की, एक दिन हमने भी ठानी
लिखने से पहले मन बोला, कहाँ है दिल की रानी।

कहाँ है दिल की रानी, जो प्रेम रस को घोले
अपना भी दिल कभी, कुछ इलु इलु बोले।

आये कोई, हमें भी, जो थोड़ा दर्द दे जाय
कवि ना बन पाये ये दिल तो शायर बन जाय।

तभी अचानक सामने, आयी अति सुंदर बाला
चंदा सा मुखड़ा था, और थी हाथों में माला।

आकर बोली, अब तक तुम, छुपे कहाँ थे नाथ
चाहे कितनी प्रलय आये, रहे तुम्‍हारा साथ।

साथ हसीना का पाकर, हम भी लगे इतराने
यार दोस्‍त बढ़ने लगे, कुछ लोग लगे खिसयाने।

कुछ लोग लगे खिसयाने, तभी एक धक्‍का खाया
आखँ खुली, अपने को, खटिया से नीचे पाया।

टूटा सपना, सपने की तस्‍वीर चकनाचूर हुई
प्रेम कवि बनने की हमसे, ‘तरूण’ भारी भूल हुई।

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Tarun
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14 Responses to “ प्रेम कविता ”

  1. टूटा सपना, सपने की तस्‍वीर चकनाचूर हुई
    प्रेम कवि बनने की हमसे, ‘तरूण’ भारी भूल हुई।

    –क्या बात कर रहे हो!!! इतना बेहतरीन लिख रहे हो—जारी रहो-कब खराब लिखा है-पब्लिक जानकारी दे देगी अपने तरीके से. :)

  2. :-)

  3. लिखते रहो। हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती।

  4. Keep writing…in this poem emotion hai Drama hai, I mean kya nahi hai.

  5. बहुत अच्छा । जानकर खुशी हुई कि आप हार मानने वालों में से नही हैं किसी और दिन फिर से कोशिश करेंगे। अगली कोशिश का फिर इंतजार रहेगा।

  6. आये कोई, हमें भी, जो थोड़ा दर्द दे जाय
    कवि ना बन पाये ये दिल तो शायर बन जाय…
    bahut badhiya .likhate rahiye.

  7. bahut badhiya .likhate rahiye.

  8. ha ha ha ha ha great, but nice love poem written han,

    Regards

  9. जमाये रहिये, वैसे ही जैसे हमने जमाई दही!

  10. likhte rahiye pta nahi kab ye kwab sach ho jaye

  11. सुबह सुबह..हंसा दिया! शीर्षक देख कर सोचा था कुछ पंक्तियाँ चुरायेंगे :)

  12. सही ठेले हो भाई….

  13. गिर पड़े तो क्या हुआ उठिए और दुबारा कोशिस कीजिये :-)

  14. तो अभी आप जिया सराय, बेर सराय वाले छड़ा-छड़ी मूड में ही हैं :)
    फिर कोशिश कीजिए.. प्रेम कविता लिखने में हमेशा खटिया से थोड़े गिरेंगे :)

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