क्या इसे धर्मनिरपेक्षता की मिसाल मान सकते हैं?
मैंने कई बार इस देश और इस देश के वाशिंदो (हमें भी गिना जाये) पर संशय किया है, उनके धर्मनिरपेक्ष होने और उनकी धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाये। लेकिन आज इस खबर को पढ़कर मुझे लगा कि मेरी इस सोच को पुनर्विचार की जरूरत है। क्या अब हम वाकई सही मायनों में धर्मनिरपेक्षता की मिसाल कहे जा सकते हैं? कैसे, देखिये -
गुजरात में मुसलमानों (यदा कदा हिंदू), जम्मू काश्मीर में हिंदुओं (यदा कदा मुसलमान) और उड़ीसा में ईसाईयों (यदा कदा अभी होना है) का मारा जाना/जलाया जाना/काटा जाना क्या इस ओर इशारा नही करता।
नई ईबारतः छोटे थे तब ये पढ़ा सुना था -
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई
आपस में है भाई भाई।
वक्त ने करवट ली, सियासत पसंदों ने अंगड़ाई, आपस का प्यार और सोचने का ढंग बदला। आज जब भाई भाई के आपस में झगड़ने की खबरें आम होने लगी है तो क्या इस ईबारत को कुछ ऐसे लिखा जा सकता है -
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई
देखो आपस में लड़ मरे भाई।
एक सवालः सियासत कट्टरता को तानाशाही कह सकते हैं, धार्मिक कट्टरता को क्या कहेंगे?
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This post has 11 comments
August 26th, 2008
पहला और बदला शेर दोनों एक्ट्रिम हैं-बीच में कहीं बात है अभी यथार्थ मे.
August 26th, 2008
Sirji, jaroor karta hai ji ishara
August 26th, 2008
किसी की जान ले लेना वो भी धर्म के नाम पर, विचलीत करती है.
यह भी सोचने को मजबुर हूँ की आखिर उड़ीसा में ही ईसाईयों पर ज्यादा हमले क्यों हो रहे है?
एक और बात ताली एक हाथ से नहीं बजती.
August 26th, 2008
दोनो ही शेर अपनी जगह सही है..
August 26th, 2008
एक घर में भाइयों में भी वैमनस्य होता है। लिहाजा इन उदाहरणों से धार्मिक असहिष्णुता सिद्ध नहीं मान लेनी चाहिये। पर कशीर से किस तरह हिन्दुओं की डी-वीडिंग की गयी है वह राष्ट्रवाद पर बड़ा तमाचा है।
August 26th, 2008
यही बडी बात है कि आप इस पर सोचकर नया शेर ( सँशोधित ) लिखते हैँ और जिनके दिल मेँ ज़हर भरा है वे निर्दोषोँ को डँख दे कर मौत के घाट उतारने मेँ अपने धरम के नाम पर खुश होते हैँ - न्याय कौन करे ? अब ऊपरवाला तो नीचे आने से रहा ~~ तो भुगतेँगेँ निर्दोष ही !
- लावण्या
August 26th, 2008
क्या कहें? निंदनीय.
August 26th, 2008
क्या कहें? निंदनीय घटना.
August 27th, 2008
sayad hum sabhi apne apne ko uper mante hain,,,us ek power ka, jo duniya chala raha hai, koi dar nahi raha…man ke bheetar bhi andhkaar hai aur bahar ka ujala to dikhta hi nahi…bhagwaan aisoon ko sad-budhdhi de,,,,aman kayam rahe,,,,
thnx tarun ji>>>>>>>>>> vichar achche nikle
August 27th, 2008
पता नहीं ये कब तक चलेगा!
August 27th, 2008
यह तो सदियों से होता आ रहा है संजय भाई, बड़ी बात वह है जो अनूप जी ने कही, कि पता नहीं कब यह मार-काट थमेगी!
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