क्या इसे धर्मनिरपेक्षता की मिसाल मान सकते हैं?

मैंने कई बार इस देश और इस देश के वाशिंदो (हमें भी गिना जाये) पर संशय किया है, उनके धर्मनिरपेक्ष होने और उनकी धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाये। लेकिन आज इस खबर को पढ़कर मुझे लगा कि मेरी इस सोच को पुनर्विचार की जरूरत है। क्या अब हम वाकई सही मायनों में धर्मनिरपेक्षता की मिसाल कहे जा सकते हैं? कैसे, देखिये -

गुजरात में मुसलमानों (यदा कदा हिंदू), जम्मू काश्मीर में हिंदुओं (यदा कदा मुसलमान) और उड़ीसा में ईसाईयों (यदा कदा अभी होना है) का मारा जाना/जलाया जाना/काटा जाना क्या इस ओर इशारा नही करता

नई ईबारतः छोटे थे तब ये पढ़ा सुना था -

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई
आपस में है भाई भाई।

वक्त ने करवट ली, सियासत पसंदों ने अंगड़ाई, आपस का प्यार और सोचने का ढंग बदला। आज जब भाई भाई के आपस में झगड़ने की खबरें आम होने लगी है तो क्या इस ईबारत को कुछ ऐसे लिखा जा सकता है -

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई
देखो आपस में लड़ मरे भाई।

एक सवालः सियासत कट्टरता को तानाशाही कह सकते हैं, धार्मिक कट्टरता को क्या कहेंगे?

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    Tarun
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    11 Responses to “ क्या इसे धर्मनिरपेक्षता की मिसाल मान सकते हैं? ”

    1. पहला और बदला शेर दोनों एक्ट्रिम हैं-बीच में कहीं बात है अभी यथार्थ मे.

    2. Sirji, jaroor karta hai ji ishara

    3. किसी की जान ले लेना वो भी धर्म के नाम पर, विचलीत करती है.

      यह भी सोचने को मजबुर हूँ की आखिर उड़ीसा में ही ईसाईयों पर ज्यादा हमले क्यों हो रहे है?

      एक और बात ताली एक हाथ से नहीं बजती.

    4. दोनो ही शेर अपनी जगह सही है..

    5. एक घर में भाइयों में भी वैमनस्य होता है। लिहाजा इन उदाहरणों से धार्मिक असहिष्णुता सिद्ध नहीं मान लेनी चाहिये। पर कशीर से किस तरह हिन्दुओं की डी-वीडिंग की गयी है वह राष्ट्रवाद पर बड़ा तमाचा है।

    6. यही बडी बात है कि आप इस पर सोचकर नया शेर ( सँशोधित ) लिखते हैँ और जिनके दिल मेँ ज़हर भरा है वे निर्दोषोँ को डँख दे कर मौत के घाट उतारने मेँ अपने धरम के नाम पर खुश होते हैँ - न्याय कौन करे ? अब ऊपरवाला तो नीचे आने से रहा ~~ तो भुगतेँगेँ निर्दोष ही !
      - लावण्या

    7. क्या कहें? निंदनीय.

    8. क्या कहें? निंदनीय घटना.

    9. sayad hum sabhi apne apne ko uper mante hain,,,us ek power ka, jo duniya chala raha hai, koi dar nahi raha…man ke bheetar bhi andhkaar hai aur bahar ka ujala to dikhta hi nahi…bhagwaan aisoon ko sad-budhdhi de,,,,aman kayam rahe,,,,
      thnx tarun ji>>>>>>>>>> vichar achche nikle

    10. पता नहीं ये कब तक चलेगा!

    11. किसी की जान ले लेना वो भी धर्म के नाम पर, विचलीत करती है.

      यह तो सदियों से होता आ रहा है संजय भाई, बड़ी बात वह है जो अनूप जी ने कही, कि पता नहीं कब यह मार-काट थमेगी! :(

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